भारतीय संस्कृति में गाय को जो स्थान प्राप्त है, वह न केवल आस्था का प्रश्न है, बल्कि यह समाज, अर्थव्यवस्था और पर्यावरण के अंतर्सबंधों की वह सुदृढ़ डोर है, जिसने हजारों वर्षों से इस देश को जोड़े रखा है। प्रत्येक सनातनी के हृदय में गोमाता के प्रति श्रद्धा का जो भाव है, वह पीढ़ी दर पीढ़ी, अनवरत प्रवाहित होता रहा। आज के समय में जब विकास की अंधी दौड़ में परंपराएं पीछे छूट रही हैं तो उत्तर प्रदेश में सरकार गोसंरक्षण को सनातनी दृष्टि से स्थापित करती हुई दिखाई देती है। गोवंश की रक्षा का संकल्प सिर्फ धार्मिक भावना तक ही नहीं है, बल्कि कानून व्यवस्था, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और सामाजिक चेतना से भी जुड़ा हुआ है।
गो संरक्षण सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल
उत्तर प्रदेश में 2017 में जब योगी सरकार बनने के बाद 2017 से 2025 के मध्य गो हिंसा से जुड़े मामलों में लगभग 36 हजार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। इन गिरफ्तारियों के साथ-साथ 13,793 आरोपियों के विरुद्ध गुण्डा अधिनियम के अन्तर्गत कार्रवाई की गई। 178 अभियुक्तों पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) लगाया गया और 14,305 मामलों में गैंगस्टर एक्ट का प्रयोग किया गया। इसके अतिरिक्त 83 करोड़ 32 लाख रुपये की सम्पत्ति जब्त की गई। इन कदमों से यह स्पष्ट संदेश गया कि गोमाता के प्रति हिंसा न केवल कानूनी दृष्टि से दंडनीय है, बल्कि सामाजिक व्यवस्था के विरुद्ध संगठित होकर साजिशें रचने वालों के खिलाफ राज्य पूरी कठोरता से कार्रवाई करेगा।
अर्थव्यवस्था की रीढ़ गोमाता
आज उत्तर प्रदेश में गाय के दूध से निर्मित पनीर, मक्खन, घी और अन्य दुग्ध उत्पाद न केवल स्थानीय बाजारों में बल्कि पूरे देश में अपनी पहचान बना रहे हैं। गोबर से बनाई जा रही जैविक खाद किसानों के लिए वरदान सिद्ध हो रही है। आयुर्वेदिक औषधियों में गोघृत और पंचगव्य की मांग दिन-प्रतिदिन बढ़ रही है। गाय के गोबर से निर्मित दीये, अगरबत्ती, धूप और मूर्तियां धार्मिक बाजारों में बड़ी तेजी से स्थान बना रहे हैं। गोवंश आधारित उत्पादों के निर्माण में महिलाओं की भूमिका विशेष रूप से महत्वपूर्ण बन रही है। कई स्वयं सहायता समूह गोबर से दीये, अगरबत्ती और अन्य उत्पाद बनाकर बाजार में बेच रहे हैं। इससे महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ रही है और वे आत्मनिर्भर बन रही हैं।
गोकशी किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं
योगी सरकार ने सत्ता संभालते ही स्पष्ट संदेश दिया कि प्रदेश में गोकशी और अवैध पशु वध को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसी नीति के तहत गोकशी, पशु तस्करी और अवैध बूचड़खानों के खिलाफ व्यापक अभियान चलाया गया। सरकार ने कानून को और कठोर बनाते हुए उत्तर प्रदेश गोवध निवारण (संशोधन) अध्यादेश 2020 भी लागू किया जिसमें 10 वर्ष तक कठोर कारावास और 3 से 5 लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान किया गया।
समृद्धि व धर्म का आधार
उत्तर प्रदेश ने अपनी सांस्कृतिक विरासत को आधुनिक विकास के साथ जोड़ा है। गोसंरक्षण की नीति यह संदेश देती है कि विकास का मार्ग केवल आधुनिक तकनीक से नहीं, बल्कि परंपराओं के सम्मान से भी प्रशस्त होता है। जब सांस्कृतिक मूल्यों को आर्थिक विकास से जोड़ा जाता है, तब समाज में व्यापक सकारात्मक परिवर्तन दिखाई देते हैं।
(ये लेखक के निजी विचार हैं। लेखक श्याम बिहारी गुप्ता उत्तर प्रदेश गोसेवा आयोग के अध्यक्ष हैं।)