उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार को नौ साल पूरे हो गए हैं। इन नौ वर्षों में कई बदलाव हुए हैं। पर्यटन का क्षेत्र भी उसमें से एक है। उत्तर प्रदेश सदियों से भारत की आध्यात्मिक आत्मा का केंद्र रहा है। काशी, अयोध्या, मथुरा, प्रयागराज - ये केवल शहर नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था के केंद्र हैं। उत्तर प्रदेश सरकार ने आस्था के इन केंद्रों का कायाकल्प करके एक संगठित 'टेंपल एंड फेस्टिवल इकॉनमी' में बदल दिया है। इसके चलते यूपी देश का सबसे बड़ा पर्यटन केंद्र बना रहा है।
आंकड़ों की जुबानी, पर्यटन के रिकॉर्ड की कहानी
अगर बदलाव को समझना हो तो आंकड़ों पर नजर डालना जरूरी है। 2017 में जहां उत्तर प्रदेश में लगभग 23.75 करोड़ पर्यटक आए, 2019 तक यह संख्या बढ़कर 54.06 करोड़ पहुंच गई। कोविड के दौरान गिरावट के बाद भी रिकवरी इतनी तेज रही कि 2024 में यह संख्या 64.91 करोड़ तक पहुंच गई।
2025 में महाकुंभ के दौरान 66.30 करोड़ तथा पूरे वर्ष में ओवरऑल पर्यटकों का आंकड़ा 156.18 करोड़ तक पहुंच गया, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है। पिछले 9 वर्षों में पर्यटकों की संख्या लगभग सात गुने का इजाफा हुआ है।
टेंपल एंड फेस्टिवल इकॉनमी साबित हुए गेमचेंजर
अयोध्या, काशी, मथुरा और प्रयागराज जैसे धार्मिक केंद्रों को केवल आस्था तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि उन्हें एक आर्थिक गतिविधि के केंद्र के रूप में विकसित किया गया। अयोध्या इसका सबसे बड़ा उदाहरण है - जहां 2017 में 2.84 लाख पर्यटक आते थे, वहीं 2024 में यह संख्या 16.44 करोड़ को पार कर गई और 2025 में लगभग 29.95 करोड़ श्रद्धालु पहुंचे। काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर, महाकुंभ और अन्य धार्मिक आयोजनों ने यह साबित किया कि जब आस्था और व्यवस्थाएं साथ आती हैं, तो पर्यटन अपने आप बढ़ता है।
पर्यटन नीति 2022 का असर
पर्यटन नीति-2022 ने इस बदलाव को संरचना दी। इस नीति के तहत 22 प्रकार की पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा दिया गया - होटल, होमस्टे, वेलनेस, एडवेंचर और इको-टूरिज्म जैसे क्षेत्रों में निवेश को प्रोत्साहन मिला। परिणाम यह हुआ कि ₹36,681 करोड़ का निवेश आकर्षित हुआ और 1,684 से अधिक पर्यटन इकाइयां पंजीकृत हुईं। इससे 5 लाख से अधिक रोजगार के अवसर पैदा हुए, जिसमें महिलाओं की भागीदारी भी बढ़ी।
टूररिस्ट सर्किट और कनेक्टिविटी
उत्तर प्रदेश ने पर्यटन को बिंदुओं में नहीं, बल्कि नेटवर्क के रूप में विकसित किया। रामायण सर्किट, कृष्ण सर्किट, बौद्ध, जैन, सूफी और स्वतंत्रता संग्राम सर्किट जैसे 12 से अधिक टूरिस्ट सर्किट विकसित किए गए। इसके साथ ही 83 धार्मिक मार्गों का चौड़ीकरण और विकास किया गया, जिससे यात्रा आसान और सुगम बनी। यह वही बदलाव है जो पर्यटन को 'स्पॉट विजिट' से 'ट्रैवल एक्सपीरियंस' में बदलता है।
सिर्फ मंदिर नहीं, पूरा इकोसिस्टम
पहले पर्यटन केवल दर्शन तक सीमित था। आज यह होटल, परिवहन, खुदरा व्यापार, प्रसाद एवं फल-फूल उद्योग और सेवा क्षेत्र तक फैल चुका है। 49 इको-टूरिज्म परियोजनाएं और 234 गांवों का चयन यह दिखाता है कि पर्यटन अब शहरों से निकलकर गांवों तक पहुंच चुका है। 197 से अधिक स्थलों का जीर्णोद्धार और दीपोत्सव, देव दीपावली, ब्रज की होली जैसे आयोजनों का वैश्विक स्वरूप यह दिखाता है कि सांस्कृतिक विरासत अब आर्थिक शक्ति में बदल रही है। उत्तर प्रदेश में पर्यटन का यह बदलाव केवल संख्या बढ़ाने की कहानी नहीं है, बल्कि यह एक स्पष्ट मॉडल की सफलता का उदाहरण है। आज पर्यटन होटल, परिवहन, व्यापार और सेवा क्षेत्र को सीधे प्रभावित कर रहा है।