उत्तर प्रदेश सरकार बेसहारा गोवंश के संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री निराश्रित बेसहारा गोवंश सहभागिता योजना चला रही है। इसके तहत गोवंश की देखभाल की जिम्मेदारी लेने वाले किसानों, पशुपालकों और अन्य पात्र लोगों को अधिकतम चार गोवंश दिए जाते हैं। इनके पालन-पोषण के लिए सरकार हर गोवंश पर 1,500 रुपये प्रतिमाह की सहायता देती है। यह राशि डीबीटी के माध्यम से सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में भेजी जाती है।
अब तक 2.04 लाख से अधिक गोवंश की सुपुर्दगी
मुख्यमंत्री निराश्रित बेसहारा गोवंश सहभागिता योजना के तहत अब तक 2,04,762 गोवंश लाभार्थियों को सौंपे जा चुके हैं। इनमें से 3,619 गोवंश पोषण मिशन के तहत और 2,01,143 सामान्य लाभार्थियों को दिए गए हैं। इस योजना में गोवंश संरक्षण, फसल सुरक्षा, पशुपालन और पोषण को एक साथ जोड़ा जा रहा है।
गोवंश भी बचेगा, फसल भी खिलेगी
उत्तर प्रदेश सरकार ने निराश्रित गोवंश के संरक्षण को किसानों और पशुपालकों की भागीदारी से जोड़ा है। खुले में घूमने वाले बेसहारा गोवंश से फसलों और आम लोगों को सुरक्षित रखना इसका उद्देश्य है। साथ ही, देसी गोवंश नस्लों के संरक्षण और पशुपालन को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया जा रहा है।
गोवंश की जिम्मेदारी लेने वाले लाभार्थी को रखरखाव के लिए आर्थिक सहायता मिलती है, जिससे गोवंश संरक्षण के साथ पशुपालक परिवारों के लिए अतिरिक्त आय का अवसर मिलता है।
चार गोवंश के लिए 72,000 रुपये तक सहायता
एक इच्छुक व्यक्ति को अधिकतम चार गोवंश दिए जा सकते हैं। नवजात की अलग से गिनती नहीं होगी। मादा गोवंश और दूध पीती बछिया को एक इकाई माना जाएगा। भरण-पोषण के लिए प्रति गोवंश 50 रुपये प्रतिदिन की दर से सहायता दी जाती है। इस हिसाब से एक पशु पर महीने में 1,500 रुपये और चार पशुओं पर पात्र लाभार्थी को अधिकतम 6,000 रुपये प्रतिमाह की सहायता मिलती है। इस तरह, 12 महीनोंं में कुल 72,000 रुपये तक आर्थिक सहायता मिल सकती है।