सुमित व्यास बेटे वेद के साथ
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पिता बनने के बाद बदला क्रिएटिव नजरिया?
तमाम सितारे युवा दर्शखों को ध्यान में रखते हुए प्रोजेक्ट्स का चयन करने पर विचार करते है, वहीं सुमित व्यास इस मामले में अलग सोच रखते हैं। एएनआई से बात करते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी इतना सतर्क होकर फैसले नहीं लिए। न ही इस विचार ने उनके फैसलों पर कोई असर डाला है। एक्टर से जब पूछा गया कि क्या पिता बनने के बाद फिल्मों के प्रति उनके क्रिएटिव नजरिए में कोई बदलाव आया है? इस पर सुमित ने कहा,, 'ईमानदारी से कहूं तो मैं यह नहीं कहूंगा कि मैंने जानबूझकर कोई फिल्म चुनी है। हो सकता है कि अवचेतन रूप से यह बात मेरे दिमाग में चलती रही हो कि अगर मेरा बेटा इसे देखे तो क्या मुझे कोई आपत्ति होगी?
कहा- 'मैंने कभी सीमाएं नहीं लांघी'
सुमित व्यास ने साल 2020 में बेटे वेद व्यास का स्वागत किया। एक्टर ने अपने प्रोजेक्ट के टार्गेट ऑडियंस का जिक्र करते हुए यह स्वीकार किया कि उनकी ज्यादातर फिल्में और सीरीज आने वाले कई वर्षों तक उनके बच्चे के देखने लायक नहीं हैं। सुमित व्यास ने कहा, 'मेरा ज्यादातर काम ऐसा नहीं है, जिसे मेरा बच्चा अभी देख सके और शायद अगले 10-15 वर्षों में भी उसे नहीं देखना चाहिए'। उन्होंने आगे कहा, 'सच कहूं तो मुझे नहीं लगता कि मैंने कभी इतने साहसिक फैसले लिए हैं। मुझे नहीं लगता कि मैंने कभी ऐसे प्रोजेक्ट चुने हैं, जो वाकई सीमाओं को लांघते हों या जो इतने एक्सपेरिमेंटल हों। हालांकि, मैं किसी समय ऐसा जरूर करूंगा'।
सुमित ने बताया अपने घर का नियम
सुमित का कहना है कि उन्हें उम्मीद है ओटीटी और मुख्यधारा के सिनेमा की दुनिया की विविध कहानियों के प्रति उनके बेटे का दिमाग खुला हुआ हो और सोच खुली हो। एक्टर ने कहा, 'मुझे लगता है कि जैसे-जैसे मेरा बच्चा बड़ा हो रहा है, मैं चाहता हूं कि वह एक बेहतर इंसान बने। सोच में खुलापन हो। विभिन्न प्रकार की कहानियों को स्वीकार कर सके। मैं अपने घर में भी इसी तरह का खुलापन रखता हूं। कोई नियम नहीं हैं, सभी को वही करना चाहिए, जो उनका मन करे और सभी को उस तरह जीवन जीना चाहिए, जैसे कि वे जीना चाहते हैं। यह बहुत जरूरी है और यही एकमात्र नियम है'। बता दें कि एक्टर की सीरीज 'जिद्दी इश्क' 21 नवंबर से जियोहॉटस्टार पर स्ट्रीम होगी।