मशहूर तबला वादक और पद्म विभूषण से सम्मानित जाकिर हुसैन के निधन से हर कोई अभी तक स्तब्ध है। इस खबर ने दुनियाभर में उनके प्रशंसकों को गमगीन कर दिया। परिवार की तरफ से साझा की गई जानकारियों के मुताबिक वह अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को स्थित एक अस्पताल में भर्ती थे। अब खबर आ रही है कि आज सैन फ्रांसिस्को में जाकिर हुसैन का अंतिम संस्कार किया जाएगा।
आज होगा जाकिर हुसैन का अंतिम संस्कार
पारिवारिक सूत्रों ने बताया कि तबला वादक जाकिर हुसैन को गुरुवार को सैन फ्रांसिस्को में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा।
जाकिर हुसैन जी का अंतिम दर्शन और अंतिम संस्कार 19 दिसंबर (आज) को सुबह 9 बजे सैन फ्रांसिस्को (टाइम्स) में शुरू होगा, भारत में यह आज रात 10:30 बजे होगा। दुनिया के सबसे बेहतरीन तालवादकों में से एक हुसैन का 15 दिसंबर सोमवार को सैन फ्रांसिस्को के एक अस्पताल में फेफड़ों की बीमारी इडियोपैथिक पल्मोनरी फाइब्रोसिस के कारण निधन हो गया। वह 73 वर्ष के थे।
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पीएम मोदी ने भी दी थी श्रद्धांजलि
15 दिसंबर भारतीय म्यूजिक इंडस्ट्री के लिए गमगीन दिन था। जाकिर हुसैन का जाना हर किसी को खल गया था। आम आदमी से लेकर बॉलीवुड सेलेब्रिटीज तक ने जाकिर हुसैन को श्रद्धांजलि दी थी। यही नहीं, भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी एक भावुक नोट लिखकर श्रद्धांजलि दी। पीएम मोदी ने लिखा था, 'महान तबला वादक उस्ताद जाकिर हुसैन के निधन से बहुत दुख हुआ, उन्होंने भारतीय शास्त्रीय संगीत में क्रांति ला दी और तबले को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाई, उनकी लयबद्धता ने लाखों लोगों को मंत्रमुग्ध किया और भारतीय संगीत को विश्व संगीत से जोड़ने में मदद की। वे सांस्कृतिक एकता के प्रतीक बन गए, उनके योगदान से आने वाली पीढ़ियां प्रेरित होंगी। परिवार और संगीत समुदाय के प्रति मेरी संवेदनाएं।
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प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित हुए थे जाकिर हुसैन
भारत के सबसे प्रसिद्ध संगीतकारों में से एक, प्रसिद्ध संगीतकार जाकिर हुसैन ने अपने करियर में चार ग्रैमी पुरस्कार जीते, जिनमें से तीन इस साल की शुरुआत में 66वें ग्रैमी पुरस्कार में मिले थे। उन्हें पद्म श्री (1988), पद्म भूषण (2002) और पद्म विभूषण (2023) से भी सम्मानित किया गया था।