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Zakir Hussain: तो उस्ताद जाकिर हुसैन निभाते मुगल-ए-आजम में युवा सलीम का किरदार, बेटे के लिए दोस्त से लड़े पिता

Mon, 16 Dec 2024 12:59 PM IST
आकाश खरे एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला

सार

Tabla Maestro Zakir Hussain Death: कभी क्रिकेटर बनने का सपना देखा तो कभी फिल्म में हीरो बनने का ऑफर मिला। जानिए मशहूर तबला वादक उस्ताद जाकिर हुसैन साहब से जुड़े ये पांच किस्से...
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उस्ताद जाकिर हुसैन - फोटो : अमर उजाला

देश के मशहूर फनकार तबला वादक उस्ताद जाकिर हुसैन साहब नहीं रहे। पद्मश्री, पद्म भूषण और पद्म विभूषण जाकिर हुसैन ने अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में सोमवार सुबह अंतिम सांस ली। 73 वर्षीय उस्ताद जाकिर को रक्तचाप की समस्या के चलते अमेरिका के एक अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया गया था। तकरीबन 62 साल तक तबले के साथ जुगलबंदी निभाने वाले जाकिर हुसैन से जुड़े कुछ अनसुने किस्से, पढ़िए इस खबर में...

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पिता उस्ताद अल्ला रक्खा कुरैशी के साथ उस्ताद जाकिर हुसैन। - फोटो : instagram: hcmaeofficial

अब्बा ने नहीं खेलने दिया क्रिकेट 
जाकिर हुसैन को बचपन में क्रिकेट खेलने का बहुत शौका था। एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि वो बचपन में क्रिकेटर बनना चाहते थे। वहीं उनके अब्बा उस्ताद अल्ला रक्खा कुरैशी साहब हमेशा से चाहते थे कि वो तबला वादक बनें पर वो बेटे काे क्रिकेट खेलने से मना नहीं करते थे। हालांकि, एक बार क्रिकेट खेलते हुए जाकिर की उंगली टूट गई। इसके बाद अब्बा ने उन्हें क्रिकेट खेलने से सख्त मना कर दिया।

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उस्ताद अल्ला रक्खा कुरैशी साहब और डायरेक्टर के. आसिफ - फोटो : instagram: hcmaeofficial

मुगल-ए-आजम में यंग सलीम का रोल ऑफर हुआ 
जाकिर हुसैन ने एक इंटरव्यू में फिल्म ‘मुगल-ए-आजम’ से जुड़ा किस्सा सुनाया था। उन्होंने कहा था, ‘मेरे पिता और मशहूर फिल्म निर्देश्क के.आसिफ बहुत अच्छे दोस्त थे। बचपन में पिता के मित्र शौकत मुझे फिल्म ‘मुगल-ए-आजम’ के सेट पर ले गए थे।

मोहन स्टूडियो में शीश महल लगा हुआ था और ‘प्यार किया तो डरना क्या..’ गाने कि शूटिंग चल रही थी। सेट पर शौकत जी ने मेरी मुलाकात एक्टर दिलीप कुमार साहब से करवाई। उन्होंने मेरे सिर पर हाथ रखा और फिर डायरेक्टर के.आसिफ को देखकर बोले ठीक है। मतलब यह था कि उन्होंने मुझे फिल्म में युवा सलीम के रोल के लिए फाइनल कर लिया था। 

हालांकि, बाद में आसिफ साहब ने जब मेरे पिता से बात कि तो अब्बा नाराज हा गए। वो अपने दोस्त से लड़ पड़े। उन्होंने कहा कि जाकिर को तबला बजाना है। हमें इसे एक्टर वगैराह नहीं बनाना है। तो वहीं से मेरी फिल्म बनने से पहले ही एडिट हो गई।‘

हालांकि, आगे जाकर हुसैन साहब ने 'हीट एंड डस्ट', 'द परफेक्ट मर्डर', 'साज', 'मंटो' और 'मंकी मैन' समेत कई फिल्मों में काम किया। वहीं 'साज', 'इन कस्टडी', 'लिटिल बुद्धा' और 'मिस्टर एंड मिसेज अय्यर' जैसी कई फिल्मों में संगीत भी दिया।

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पिता और गुरू के साथ परफॉर्म करते उस्ताद जाकिर हुसैन। - फोटो : instagram: hcmaeofficial
पहली बार स्टेज पर 20 मिनट तबला बजाया, 100 रुपए मिले 
अपनी पहली परफॉर्मेंस का किस्सा शेयर जाकिर हुसैन साहब ने एक इंटरव्यू में सुनाया था। उन्होंने कहा था, ‘मैं बचपन में पिता जी के साथ मशहूर सरोद वादक उस्ताद अली अकबर खान साहब के कार्यक्रम में गया था। हम वो कार्यक्रम देखने गए थे पर पिता जी ने मुझे स्टेज पर बिठा दिया। तब मैं मात्र 12 साल का था और मैंने उस्ताद के साथ 20 मिनट तबला बजाया। तब उन्होंने मुझे जो 100 रुपए दिए थे उन्हें मैंने अब तक संभाल कर रखा है। यह मेरे लिए करोड़ों रुपए बराबर था। खास बात यह थी कि 7 साल की उम्र में मेरी पहली संगत भी उस्ताद अली अकबर खान साहब के साथ ही हुई थी।
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पत्नी एंटोनियो मिन्नेकोला के साथ उस्ताद जाकिर हुसैन - फोटो : Instagram: zakirhq9
पत्नी बोलीं- गूगल कर लीजिए, यही हैं 
म्यूजिशियन नंबर 1 और नंबर 2 की होड़ से हमेशा बचने वाले जाकिर हुसैन ने एक कार्यक्रम में खुद से जुड़ा मजेदार किस्सा सुनाया था। उन्होंने कहा, ‘एक बार मैं सैन फ्रांसिस्को में था। इमिग्रेशन के लिए गया था। वहां पर मेरा नाम सुनकर और मेरा लुक देखकर मुझे साइड कर दिया गया। ऑफिसर्स ने मुझसे कई सवाल पूछे.. फिर बोले आप पंडित रवि शंकर को जानते हैं? मैंने कहा हां..। तो बोले- बताइये, उनके बाद वर्ल्ड में इंडिया के दूसरे टॉप म्यूजिशियन कौन से हैं? उनका सवाल सुनते ही मेरी पत्नी बोलीं- वो यहीं हैं आप चाहें तो गूगल कर लें।’
जाकिर हुसैन साहब ने आगे कहा, ‘आप नंबर 1 और नंबर 2 में अटके हैं पर मुझे पता है कि ऐसे कई बेहतरीन कलाकार हैं जो मेरे जैसा और मुझसे बेहतर तबला बजाते हैं।’
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तबला वादक उस्ताद जाकिर हुसैन - फोटो : Instagram: hcmaeofficial
पसंद नहीं करते थे कोई उस्ताद बोले 
जाकिर हुसैन साहब को कभी पसंद नहीं आता था कि उन्हें कोई उस्ताद बोले। वो अक्सर कहते थे कि मैं उस्ताद नहीं हूं, सिर्फ जाकिर हूं। एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि कुछ ऑर्गनाइजर्स ने अपने शोज की टिकट बेचने के लिए मेरे नाम के आगे उस्ताद लगाना शुरू कर दिया। मुझे खुद को उस्ताद बुलाना पसंद नहीं। 
जाकिर ने यह भी बताया था कि वो हमेशा स्टेज पर पहुंचने के बाद तय करते हैं कि उन्हें क्या बजाना है। वो कुछ भी प्लान नहीं करते। सबकुछ मूड और पब्लिक के रिस्पॉन्स पर तय होता है।
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