यहां गुड़िया जैसी हालत में प्रियमणि हैं। अतीत उनके पिछले पति का नाम है और बिस्वा आज के पति का। एक बिटिया भी है। कहानी का पेंच वैसा ही है जैसा संगम में था, बस यहां निर्देशक तनुज ने इस पर हॉरर थ्रिलर के भ्रमर गुंजा दिए हैं। लेकिन, फिल्म दर्शकों को डराने की कोशिश नहीं करती। न ही इसके मेकर्स के पास इतना बजट दिखा जो डराने वाले स्पेशल इफेक्ट्स बना सकें। फिल्म तकनीकी तौर तो बहुत उम्दा नहीं है और न ही संजय सूरी और राजीव खंडेलवाल की बेहतरीन फिल्मों में ही इसकी गिनती कभी होगी। दोनों ने अपना काम जैसे तैसे निपटा दिया है।
फिल्म अतीत पूरे दो घंटे देखी जा सकती है तो सिर्फ और सिर्फ प्रियमणि के लिए। उनके चेहरे पर लगातार बना रहने वाला तनाव हालांकि कुछ दृश्यों में टाला जा सकता था लेकिन उन्होंने वही किया जो उनसे निर्देशक ने करवाया। फिल्म मे यासिर देसाई का गाया गाना, मोहब्बत कर रहे थे हम, जुदा भी हमको होना था, आपको राहत फतेह अली खान के गाने बिछड़ना भी जरूरी था की याद दिला सकता है। फिल्म की लंबाई काफी ज्यादा है, डिजिटल रिलीज के हिसाब से इसे डेढ़ घंटे का किया जाता तो ये बेहतर फिल्म हो सकती थी।