राज शांडिल्य हिंदी सिनेमा के इकलौते ऐसे निर्देशक होंगे जिन्होंने सिर्फ एक फिल्म निर्देशित करने के बाद बतौर निर्माता फिल्मों और सीरीज की लाइन लगा रखी है। कहते हैं इसका कुछ बालाजी कनेक्शन है। ‘ड्रीमगर्ल’ का सपना पूरा करने के चक्कर में वह किसी करार से बंधे और जब तक इस करार से मुक्त नहीं होते, कुछ और निर्देशित नहीं कर सकते हैं। लिक्खाड़ वह पुराने रहे हैं। कॉमेडी उनका अमोघ अस्त्र रहा है। और, अपनी इसी ब्रांडिंग के चलते राज शांडिल्य की इन दिनों पौ बारह है। फिल्म ‘जनहित में जारी’ के बाद इस बार वह वेब सीरीज लेकर आए हैं, ‘द ग्रेट वेडिंग्स ऑफ मुन्नेस’। किसी भी स्पेलिंग के पीछे ‘एस’ लगा देने का इन दिनों फैशन हैं। तो पेश है नेटफ्लिक्स पर ‘डार्लिंग्स’ की रिलीज से पहले मुन्नेस की वेडिंग्स की कहानियां यानी ‘द ग्रेट वेडिंग्स ऑफ मुन्नेस’।
द ग्रेट वेडिंग्स ऑफ मुन्नेस
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
नौकरी सरकारी और समस्या शादी की!
140 करोड़ की आबादी टच कर रहे देश में कितने युवा आखिरकार शादी को लेकर इतने दीवाने होते होंगे जो ‘द ग्रेट वेडिंग्स ऑफ मुन्नेस’ जैसी कहानियों के ख्याल भी लोगों के मन में आते होंगे। यहां एक लड़का है। सरकारी नौकरी में है। और, आधा दर्जन से भी एक ज्यादा (कुल सात) लेखकों की टीम दर्शकों को इस बात के लिए मानसिक रूप से तैयार करने की कोशिश में पहले एपीसोड से ही लग जाती है कि इसकी शादी नहीं हो रही। इनको कोई देश के गली, मोहल्ले, कस्बों में घुमाओ। पता चलेगा कि असल हूरें इनसे भी बदशक्ल लंगूरों को यहां मिल जाती हैं, अगर लड़के की नौकरी सरकारी है। खैर शुरू के चंद मिनटों में ही भारत सरकार की नौकरी करने वाले एक अच्छे खासे हैंडसम यंगमैन के माथे पर ‘रिजेक्टेड’ का ठप्पा छाप देने वाली सीरीज ‘द ग्रेट वेडिंग्स ऑफ मुन्नेस’ के दर्द और भी हैं। जिस लड़के को राह चलती हर दूसरी लड़की शादी के लिए ‘रिजेक्ट’ कर चुकी है, उसकी ईमानदारी पर दफ्तर में आई एक गोरी चिट्टी छोकरी फिदा है।
द ग्रेट वेडिंग्स ऑफ मुन्नेस
- फोटो : सोशल मीडिया
हैदराबाद से हॉरर तक फैला रायता
‘द ग्रेट वेडिंग्स ऑफ मुन्नेस’ की असल कहानी इसके बाद शुरू होती है। ये कहानी जैसे जैसे खुलती है, मुंबई आ बसे राइटर्स की सोच की पोल भी ये सीरीज खोलती जाती है। राज शांडिल्य इसके रचयिता है तो जाहिर है कि रायता भी फैलेगा तो बिना दही पर लगे जीएसटी से डरे फैलेगा। 10 एपीसोड की ये सीरीज अपने आप में किसी रायते से कम नहीं है। बस हर एपीसोड में राज कभी बूंदी डालते रहते हैं, कभी लौकी के लच्छे और कभी कतरा हुआ प्याज। बेसिक रेसिपी हर एपीसोड की एक जैसी है। मुंबई में बड़े बड़े निर्माता जब किसी नए राइटर से मिलते हैं तो उससे उसके ओरीजनल आइडिया का भी रेफरेंस मांगते हैं। फिर अगर टेलीविजन या वेब सीरीज है तो उसे हर एपीसोड का एक टेम्पलेट बना लेने की सलाह भी देते हैं। टेम्पलेट बनाना सीखते ही राइटर उसी जमात में शामिल हो जाता है, जहां एक वेब सीरीज के 10 एपीसोड लिखने के लिए सात राइटर्स की जरूरत होती है।
द ग्रेट वेडिंग्स ऑफ मुन्नेस
- फोटो : सोशल मीडिया
अभिषेक बनर्जी की मेहनत पर पानी
राज शांडिल्य ने ‘द ग्रेट वेडिंग्स ऑफ मुन्नेस’ का आइडिया सही सोचा है, लेकिन बेसिक दिक्कत उनकी ये है कि सरकारी नौकरी वाले लड़के की असल शादी से पहले की फर्जी शादियों का मामला आगे जम नहीं पाता है। फिर इसमें चाहे मसाला हैदराबाद का डाला जाए या हॉरर का। अभिषेक बनर्जी जैसे बेहतरीन कलाकार को मुन्नेस बनाकर ऐसी सीरीज में उन्हें खर्च भी नहीं करना चाहिए था। ‘पाताल लोक’ से लेकर ‘रश्मि रॉकेट’ तक अभिषेक ने अपनी एक अलग पहचान गढ़ी है। बेहद चलताऊ तरीके से लिखे गए मुन्नेस के किरदार में भी वह चमकते तो हैं लेकिन ऐसी कमजोर कहानी में काम करके अगर वह खुद को आयुष्मान खुराना बनाना चाहते हैं तो ये उनकी सोच की कमजोरी है। वह अभिषेक बनर्जी ही कमाल के हैं।
द ग्रेट वेडिंग्स ऑफ मुन्नेस
- फोटो : सोशल मीडिया
लचर निर्देशन, औसत कलाकारी
फिल्म ‘जनहित में जारी’ में राज शांडिल्य ने जय बसंतू सिंह को बतौर निर्देशक लॉन्च किया, इस बार नंबर सुनील सुब्रमणि का लगा है। निर्देशन की पहली बानगी वह सीरीज के पहले एपीसोड के पहले सीन में ही दे देते हैं। मुन्नेस अपनी हथेलियों को रश्मि रॉकेट सा बनाए भाग रहा है। स्लो मोशन में। लेकिन पीछे दिख रहे खंभे और मुन्नेस की दूरी लगातार समान बनी हुई है, यूं लगता है कि जैसे न्यूटन के नियम पढ़ाने की फिजिक्स की क्लास चल रही हो। न एडीटर प्रकाश चंद्र साहू को इस पर एतराज है और न ही डीओपी चिन्मय रतन सालस्कर को। सबने मिलकर 10 एपीसोड छाप दिए हैं, बिल जियो स्टूडियोज ने पहले से भर ही दिया होगा। सब तेजकरण सिंह बजाज की बलिहारी है।
द ग्रेट वेडिंग्स ऑफ मुन्नेस
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देखें कि न देखें
कलाकारों में बरखा सिंह खूबसूरत दिखती हैं। संवाद अदायगी भी बढ़िया कर ले जाती हैं। बाकी कलाकारों में सब टेम्पलेट वाले कलाकार हैं। चेहरा देखकर ही आप बता सकते हैं कि फलां कलाकार फलां तरह की एक्टिंग करेगा। भला हो थोक में बन रही वेब सीरीज का कि पंकज बेरी और पंकज धीर के मीटर भी फिर से डाउन हो गए हैं। आपका मीटर भी अगर वूट सेलेक्ट के सब्सक्रिप्शन पर डाउन है, खर्च करने को सस्ता वाला इंटरनेट प्लान है और कोई पांच घंटे का फालतू वक्त है, तो कर डालिए सर्फिंग। बस, आखिर में हाथ मलते न रह जाइएगा कि पहले क्यों अलर्ट नहीं किया!