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Bestseller Review Amazon Prime: मिथुन के ओटीटी डेब्यू पर अल्थिया का ग्रहण, श्रुति से ज्यादा दमकीं गौहर खान

सार

वेब सीरीज बेस्टसेलर रिलीज हो गई है। इस सीरीज के जरिए अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती ने ओटीटी की दुनिया में कदम रखा है। उनके साथ अभिनेत्री श्रुति हसन नजर आ रही हैं। आइए आपको सीरीज का रिव्यू देते हैं।
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बेस्टसेलर वेब सीरीज - फोटो : सोशल मीडिया
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Movie Review
बेस्टसेलर
कलाकार
मिथुन चक्रवर्ती , श्रुति हसन , अर्जन बाजवा , गौहर खान , सत्यजीत दुबे और सोनाली कुलकर्णी
लेखक
अल्थिया कौशल और अन्विता दत्त
निर्देशक
मुकुल अभयंकर
निर्माता
एल्केमी प्रोडक्शन , सिद्धार्थ पी मल्होत्रा और सपना मल्होत्रा
ओटीटी
अमेजन प्राइम वीडियो
रेटिंग
1.5/5

विस्तार
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अल्थिया कौशल का नाम सुना है आपने? नहीं! अल्थिया डेल्मास कौशल से कुछ याद आया? अब भी नहीं! चलिए कुछ और क्लू देते हैं। कुछ फिल्मों के नाम आपको बताते हैं, ‘लव गेम’,  ‘गेम’, ‘हैप्पी न्यू ईयर’, ‘नूर’, ‘थ्री स्टोरीज़’..? और शुक्रवार को ही रिलीज हुई वेब सीरीज ‘मिथ्या’! अगर अब भी इस नाम को लेकर कुछ नहीं चमका। तो इन फिल्मों और वेब सीरीज की ओपनिंग क्रेडिट्स फिर से देखिए। इनमें बतौर पटकथा लेखक आपको अल्थिया कौशल का नाम दिखेगा। ‘मिथ्या’ में उनकी जोड़ी दमदार फिल्म ‘बुलबुल’ लिखने और निर्देशित करने वाली अन्विता दत्त के साथ बनी है। इसी जोड़ी ने इसी के साथ रिलीज हुई वेब सीरीज ‘बेस्टसेलर’ की पटकथा भी लिखी है। अन्विता के पहले अल्थिया दूसरों के साथ भी जोड़ी बनाकर ‘सलीम-जावेद’ टाइप कुछ करने की कोशिश कर चुकी हैं। लेकिन, अब तक जिस किसी भी फिल्म या सीरीज में उनका नाम जुड़ा, उसका नाम रोशन न हो सका। ये इंट्रो दरअसल आपके लिए वैधानिक चेतावनी है भविष्य के लिए। ताकि अगली बार जब आप कोई फिल्म या सीरीज देखें तो उसके लेखक का नाम जरूर देखें।

 

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मिथुन चक्रवर्ती - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
‘मिथ्या’ और ‘बेस्टसेलर’ दोनों एक जैसी श्रेणियों की वेबसीरीज हैं। ‘मिथ्या’ से वैसे भी खास उम्मीद नहीं थी लेकिन ‘बेस्टसेलर’ का प्रचार अपने जमाने के मेगास्टार रहे मिथुन चक्रवर्ती के ओटीटी डेब्यू के तौर पर किया गया तो इसकी गहराइयां नापने का मन जरूर किया। उम्मीद ये भी रही कि दीपिका पादुकोण के अभिनय और कहानियों की उनकी नई पसंद की ‘गहराइयां’ दिखाने के बाद प्राइम वीडियो इस बार कुछ ऐसा परोसेगा कि वीकएंड पर इस ओटीटी को दिए समय पर कोफ्त नहीं होगी। लेकिन नतीजा फिर वही ढाक के तीन पात। कसूर यहां भी कहानी का है। सीरीज की कहानी रवि सुब्रमण्यम के उपन्यास ‘द बेस्टसेलर शी रोट’ से ली गई है। उपन्यास जैसा रोमांच लेकिन सीरीज में है नहीं। ये एक सतही सपाट और बेहद खराब तरीके से बनाई गई वेब सीरीज है, जिसमें यूं लगता है कि समीर आर्या ने बस कैमरा ऑन करके छोड़ दिया और जिस कलाकार को जो मन में आया करके चला गया।

बेस्टसेलर वेब सीरीज - फोटो : सोशल मीडिया
कहानी शुरू होती है एक उपन्यास से। नाम है, रांड सांड सीढ़ी संन्यासी। कहानी में काशी तो है पर वाराणसी का नाम राजसी कर दिया गया है। वैसे ही जैसे ‘ये काली काली आंखें’ में यूपी को ओंकारा बना दिया गया। मनोरंजन का ये मिथ्या काल है। कल्पना करने में भी यहां लोगों को डर लगता है और आइडिया मार लेने में यहां किसी को अपराधबोध नहीं होता है। लेखक है। कहानी मिली। लिख दी। बिना ये सोचे कि मामला उल्टा भी पड़ सकता है। ये लेखक है ताहिर वजीर। किसी कोने से इसके लक्षण राइटर जैसे नहीं हैं। घमंडी है। बदतमीज है। खुद में ही खोया हुआ है। पता नहीं एक कामयाब बीवी कैसे झेलती रही इसे। कहानी में ट्विस्ट एक अनजान लड़की के आने से होता है। और, साथ ही कहानी में आता है सोशल मीडिया का एक ट्रोल जिसके निशाने पर ताहिर वजीर है। चौथे एपीसोड तक आते आते जब दर्शक पकने लगता है तो सारा किस्सा ही सामने आ जाता है। उसके ठीक पहले वाले एपीसोड में आए एसीपी प्रामाणिक को भले बार बार इंस्पेक्टर कहकर बुलाया जा रहा हो लेकिन इस किरदार की कोशिशें भी आगे बेकार होती जाती हैं।

श्रुति हसन - फोटो : सोशल मीडिया
वेब सीरीज ‘बेस्टसेलर’ एक ऐसी हिंदी वेब सीरीज है जिसे पूरा देख लेने वालों का अमेजन प्राइम वीडियो को कम से कम साल भर का सब्सक्रिप्शन माफ कर देना चाहिए। और जिन लोगों ने उनकी फिल्म ‘गहराइयां’ पूरी देखने के बाद ये सीरीज पूरी देखी है, उनको तो अलग से कुछ पारितोषिक और भी मिलना चाहिए। हिंदी सिनेमा का गर्त काल पहले से शुरू है। ओटीटी वेब सीरीज में भी ये मिथ्या काल चल पड़ा तो दर्शकों के सामने मार्वल सीरीज देखने का ही रास्ता बचेगा। मुकुल अभयंकर को सोचना भी चाहिए कि आखिर इतनी चलताऊ सीरीज बनाने से बतौर एक क्रिएटिव पेशेवर उन्हें क्या मिला?
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बेस्टसेलर वेब सीरीज - फोटो : सोशल मीडिया
मिथुन चक्रवर्ती ही इस सीरीज को देखने की एक बड़ी वजह थे, लेकिन सीरीज के लेखकों ने उनके किरदार का भी कचमूर निकालकर रख दिया। बाथरूम में लगे कैमरे में देखकर ट्रोल को चुनौती देने वाले सीन में मिथुन का रुआब दिखता है। दिखता है कि उनकी उम्र और शख्सीयत के हिसाब से किरदार लिखें जाएं तो इस पुराने चावल में अब भी बहुत महक बाकी है। श्रुति हसन के बस का नहीं है एक उत्तर भारतीय किरदार करना। वह भी ऐसा जिसके अतीत के पेंच इतने घुमावदार हों। हिंदी वह ठीक से बोल पाती नहीं हैं और चेहरे पर उनके भाव उधार के लगते हैं। अर्जन बाजवा और सत्यजीत दुबे भी खास मदद सीरीज की करते नहीं हैं। सोनाली कुलकर्णी को उनके कमजोर किरदार ने मात दे दी। सीरीज में ढंग का काम गौहर खान के हिस्से आया लेकिन उनके आसपास इतना रायता फैला है कि उनकी अदाकारी भी इसे रोशन नहीं कर सकी।
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