टूथ परी व्हेन लव बाइट्स
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
पुराने धारावाहिक के चोले में लेडी ड्रैकुला
नेटफ्लिक्स की वेब सीरीज ‘टूथ परी’ दूरदर्शन के शुरुआती दिनों के किसी धारावाहिक जैसी महसूस होती है। कहानी मूल रूप से तो एक लेडी ड्रैकुला की है। धरती के नीचे रहने वाले 30 लोगों के इस समूह की लगातार काउंसलिंग होती रहती है। भोजन के रूप में खून की कमी न होने पाए इसके लिए खून की यहां नियमित आपूर्ति होती रहती है। बार बार यहां के लोगों को डराया जाता है कि ऊपर जाने पर जान का खतरा है। और, इसी सबके बीच एक बेहद कामुक दिखने वाली महिला रक्तपिपासु ऊपर भ्रमण पर निकल जाती है। अपने रूपजाल में फंसने वालों का वह खून पीती है। बस मामला तब बिगड़ जाता है जब उसके दांत एक ऐसे युवक की गर्दन पर अटक जाते हैं जिसकी खाल असली नहीं है। दांत टूटता है तो कहानी में वह दंत चिकित्सक आता है जो खून देखकर गश खाकर गिर जाता है। भगवान जाने उसने पढ़ाई के दौरान कैसे दंत चिकित्सा सीखी होगी। दोनों में प्रेम होता है। परिवारों के बीच बातचीत होती है। कहानी ऊपर नीचे होते हुए अपनी इति को प्राप्त होती है।
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देखने वालों की संख्या में अटका ओटीटी
वेब सीरीज ‘राणा नायडू’ के बाद नेटफ्लिक्स की वेब सीरीज ‘टूथ परी’ एक और ऐसी कहानी है जिसे देखने के लिए एक अलग स्तर की मानसिक शक्ति चाहिए। पैसा इस ओटीटी के पास अथाह है और इसकी क्रिएटिव टीम इसे दोनों हाथों से लुटा भी रही हैं। हर महीने मोटी रकम ओटीटी को दे रहे दर्शकों का देसी कहानियों चुनने में कोई रोल नहीं है। वे हर हिंदुस्तानी सीरीज देखने के लिए लपकते हैं कि शायद इस बार कुछ अच्छा देखने को मिल जाए। इस चक्कर में सीरीज या फिल्म नेटफ्लिक्स की टॉप 10 सूची में आती है। इसके अफसर व्यूज गिनते हैं। अपनी पीठ ठोंकते हैं और फिर अगली सीरीज की रिलीज की तैयारियों में लग जाते हैं। वेब सीरीज ‘टूथ परी’ एक स्याह कहानी है। डरावने धरातल पर गढ़ी गई एक ऐसी प्रेम कहानी जिसका हीरो दर्शकों से ज्यादा डरा सहमा लगता है। सीरीज कहानी के स्तर पर ही इतनी गई बीती लगती है कि इसे देखते समय बार बार मिथुन चक्रवर्ती की हॉरर फिल्म ‘भयानक’ याद आती रहती है।
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शांतनु और तान्या की बेअसर जोड़ी
‘टूथ परी’ की कहानी में किरदार तमाम हैं लेकिन ये सब मिलकर भी एक समेकित प्रभाव सीरीज का पैदा नहीं कर पाते। फिल्म ‘गंगूबाई काठियावाड़ी’ में आलिया के प्रेमी का किरदार करने वाले शांतनु के व्यक्तित्व में एक आकर्षण है। उन्हें देखने का, उनके अभिनय को समझने का और उनकी सहजता को कुछ और समय देने का मन भी करता है लेकिन उनके किरदार का सीरीज में कोई ग्राफ ही नहीं बनते दिखता। यूं लगता है कि उन्होंने ये सीरीज बस ओटीटी पर अपनी उपस्थिति बनाए रखने के लिए कर ली है। तान्या मनिकताला के किरदार का भी यही हाल है। उसका राज पहले एपिसोड में ही दर्शकों को पता है। उसकी हिम्मत की दाद देने का भी मन करता है। लेकिन ये किरदार अपने समूह से बगावत करके, अपनी जान हथेली पर रखकर ऊपर की दुनिया में भ्रमण कर रहा है, ऐसा उसके हावभाव से एक बार भी नहीं लगता। रेवती काबिल अदाकारा हैं। उनसे कुछ भी कराओ वह पूरे मन से करती हैं। बस, यहां वह जिस किरदार में हैं, वह उनके प्रशंसकों को हो सकता है रास भी आए। शाश्वत चटर्जी ने वेब सीरीज ‘द नाइट मैनेजर’ के बाद एक बार फिर निराश किया है और आदिल हुसैन का शो ऑफ भी बेअसर है।
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बनावटी किरदारों की नकली दुनिया
नेटफ्लिक्स की वेब सीरीज ‘टूथ परी’ एक झलक इस बात की भी है कि मनोरंजन उद्योग की लगातार पतली होती हालत की असली वजह क्या है? सीरीज और फिल्में बनाने वाले देसी कहानियां भी विदेशी शैली की तलाश रहे हैं। जबकि कोलकाता की गलियों में उलझे लोग सिर्फ पड़ोस के कामाख्या देवी मंदिर तक चले जाएं तो तंत्र मंत्र का पूरा मायाजाल वहां बिखरा पड़ा है। बंगाल से लेकर बिहार और अवध तक चर्चित रहीं सबसे प्रभावशाली महिला तांत्रिक लोना की दुहाई तो आज तक गांवों की महिलाएं बच्चो की नजर उतारते समय देती हैं। लेकिन, ऐसा कोई प्रभाव देसीपन का वेब सीरीज ‘टूथ परी’ में नजर नहीं आता। किल्विश के अड्डे से दिखती नीचे की इसकी दुनिया बहुत बनावटी है और ऊपर की दुनिया में ऐसा कुछ रचा नहीं गया है जिसका अपना कोई अलग आकर्षण हो।
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