आपने इस फिल्म में लगभग 10 साल लगाए। बॉक्स ऑफिस को लेकर कितने नर्वस हैं?
अगर कहूं कि बॉक्स ऑफिस की परवाह नहीं है, तो वो झूठ होगा। मेरे लिए सिर्फ एक फिल्म नहीं, एक प्रार्थना है। हां, पैसा जरूरी है, लेकिन इसलिए नहीं कि अमीर बनना है, बल्कि इसलिए कि ऐसी कहानियां कह सकें जो इतिहास और विश्वास से जुड़ी हों। ‘कन्नप्पा’ उन्हीं अनकहे हीरोज की कहानी है, जो हमारे कल्चर का हिस्सा हैं लेकिन पर्दे पर कभी नहीं आए। मैं चाहता हूं कि हमारा इतिहास सिर्फ किताबों में नहीं, सिनेमा में भी जिंदा रह सकता है।
अक्षय, मोहनलाल, प्रभास और काजल जैसी अलग-अलग इंडस्ट्रीज के दिग्गज अहम रोल में नजर आ रहे हैं। क्या ये पैन-इंडिया अप्रोच जानबूझकर थी?
बिलकुल, ये सिर्फ कास्टिंग नहीं थी, ये एक सोच का नतीजा था। जब मैंने फिल्म लिखना शुरू किया, तो सोचा कि अगर भाषा की कोई सीमा न हो, तो मैं किन चेहरों को इन देवताओं के रूप में देखना चाहूंगा। तभी अक्षय, प्रभास, मोहनलाल और काजल जैसे नाम सामने आए और खुशकिस्मती से वो सब इसका हिस्सा बन भी गए। इनका आना सिर्फ स्टार पावर के लिए नहीं था, बल्कि भारत की विविधता और एकता को दिखाने का एक तरीका था। यह सिर्फ एक रीजनल फिल्म नहीं, बल्कि पूरे देश की सांझा विरासत की कहानी है और उसमें हर कोने की झलक जरूरी थी।
विष्णु मांचू, अक्षय कुमार और प्रभास
- फोटो : एक्स@iVishnuManchu
आज के समय में स्टार पावर कितनी अहमियत रखती है? क्या फिल्म का कंटेंट ज्यादा मायने रखता है या बड़े नाम जैसे प्रभास और अक्षय कुमार?
स्टार पावर आपको सिर्फ दरवाजे तक ले जाती है। अंदर कौन टिकेगा, वो तय करता है कंटेंट। प्रभास, अक्षय कुमार जैसे नाम आपकी फिल्म को एक बड़ी ओपनिंग दे सकते हैं, ध्यान खींच सकते हैं, लेकिन अगर कहानी में दम नहीं है, तो दर्शक टिकेंगे नहीं। मैंने हमेशा यही माना है कि स्टार्स शुरुआत में दर्शकों को खींच सकते हैं, लेकिन वही दर्शक तभी लौटते हैं जब कहानी उनके दिल को छूती है। यही मेरी कोशिश रही है कि कंटेंट ही मेरा असली स्टार बने। ऑडियंस आज बहुत स्मार्ट है. उन्हें दिखावा नहीं, सच्चाई चाहिए। तो हां, स्टार पावर एक टॉर्च की तरह है, जो रोशनी देती है, लेकिन रास्ता तो कहानी ही तय करती है।