शुक्रवार को बंगाली फिल्म 'द एकेडमी ऑफ फाइन आर्ट्स' रिलीज होने वाली थी। विवादों में आने के बाद इस फिल्म की रिलीज को रोक दिया गया है। इस फिल्म का निर्देशन एसआरएफटीआई के छात्र जोयाब्रत दास ने अपने स्कूल के दोस्तों के साथ किया। इल्जाम है कि इस फिल्म में टॉलीगंज के पेशेवर तकनीशियनों को शामिल नहीं किया गया।
तय समय पर नहीं रलीज हुई फिल्म
जोयाब्रत दास ने दावा किया कि यह फिल्म एक 'स्टेडेंट प्रोजेक्ट' है। प्रचार के बाद इसे 14 नवंबर को रिलीज किया जाना था। हालांकि आखिरी वक्त इसकी रिलीज को रोक दिया गया।
इस सिलसिले में राज्य मंत्री अरूप बिस्वास की पहल पर एक बैठक बुलाई गई। इसमें फिल्म के निर्देशक, निर्माता, ईस्टर्न इंडिया मोशन पिक्चर्स एसोसिएशन (ईआईएमपीए) की अध्यक्ष पिया सेनगुप्ता और फेडरेशन के अध्यक्ष स्वरूप बिस्वास शामिल हुए। मीटिंग में मुद्दे को सुलझाने की कोशिश की गई हालांकि बात नहीं बन सकी।
निर्देशक का दावा
इस फिल्म को दास और उनके स्कूल के साथियों ने कुछ पैसे मिलाकर बनाया। फिल्म के निर्देशक ने सख्ती से कहा कि यह फिल्म 'स्टेडेंट फिल्म' है। ऐसे में फेडेरेशन के सदस्यों को इसमें शामिल करने की जरूरत नहीं थी।
द एकेडमी ऑफ फाइन आर्ट्स
- फोटो : यूट्यूब
फेडरेशन के अध्यक्ष ने उठाया सवाल
इसका विरोध करते हुए फेडरेशन के अध्यक्ष बिस्वास ने सवाल उठाया कि इतने बड़े बजट से बनी और व्यावसायिक रिलीज के लिए बनाई गई फिल्म में किसी भी पेशेवर तकनीशियन को शामिल क्यों नहीं किया गया। उन्होंने कहा 'ऐसा लगता है कि लोग 'स्टूडेंट फिल्म' और 'इंडिपेंडेंट फिल्म' को एक साथ मिला रहे हैं। अगर कोई प्रोडक्शन कंपनी इसमें शामिल है, तो इसे स्टूडेंट या डिप्लोमा फिल्म कैसे कहा जा सकता है? अगर निर्देशक और निर्माता जवाब दें, तो मुझे कोई आपत्ति नहीं होगी।'
ईआईएमपीए के अध्यक्ष ने मांगी सफाई
इस मामले पर ईआईएमपीए के अध्यक्ष ने कहा 'हमें उम्मीद है कि कोई हल निकलेगा। हम इस फिल्म की रिलीज के खिलाफ नहीं हैं। हम बंगाली सिनेमा के साथ-साथ तकनीशियनों का समर्थन करने के लिए यहां हैं, लेकिन हमें कुछ मुद्दों पर सफाई की जरूरत है।