फिल्मों के सीक्वल कोई अनोखी बात नहीं रह गए हैं, लेकिन एकता कपूर अब सीरियलों के सीक्वल बनाने का आइडिया लाई हैं। खबर है कि वह टीवी इतिहास के सबसे चर्चित धारावाहिकों में से एक ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ का पार्ट-2 लाना चाहती हैं।
इसके लिए एकता सीरियल की केंद्रीय पात्र तुलसी विरानी यानी स्मृति ईरानी को वापस लाना चाहती हैं। लेकिन स्मृति फिलहाल राजनीति में इतनी रमी हैं कि उनका छोटे पर्दे से नाता ही खत्म हो गया है। वह आखिरी बार पांच साल पहले ‘मनीबेन डॉट कॉम’ में दिखी थीं।
अमेठी में ही हैं व्यस्त
टीवी की सबसे संस्कारी और चर्चित बहू रही तुलसी के नजदीकी सूत्रों के अनुसार, ‘वह राजनीतिक कैरियर में बहुत व्यस्त हैं और निकट भविष्य में उनके टीवी पर लौटने की कोई संभावना नहीं है।’
उल्लेखनीय है कि इस समय स्मृति अमेठी से राहुल गांधी के खिलाफ चुनाव लड़ रही हैं। भाजपा में भी उनका कद काफी ऊंचा हो चुका है। लेकिन एकता कपूर ने भी हथियार नहीं डाले हैं। उनके करीबी बताते हैं, ‘एकता क्योंकि सास... के पहले पार्ट के ज्यादा से ज्यादा कलाकारों को फिर इकट्ठा करने में जुटी हैं।
उनका मानना है कि ज्यादातर ऐक्टरों की पहचान घर-घर में बन चुकी थी, ऐसे में उनकी जगह दूसरे ऐक्टरों को लेना ठीक नहीं होगा। हां यह जरूर है कि नए किरदारों की भी सीरियल में जगह होगी और ऐसे में नए चेहरे भी लिए जाएंगे।’
सितंबर में आ जाएगा यह धारावाहिक
बताया जा रहा है कि इस साल अगस्त-सितंबर तक ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ पार्ट-2 प्रसारण शुरू हो सकता है।वैसे इंडस्ट्री के जानकार बताते हैं कि एकता और स्मृति के बीच रिश्ते हमेशा अच्छे नहीं रहे हैं। एक वक्त ऐसा था कि दोनों के झगड़े के बीच स्मृति ने सीरियल छोड़ दिया था।
उनकी जगह गौतमी कपूर को तुलसी बना कर लाया गया था। बाद में दोनों का विवाद सुलझ गया और मई 2008 में स्मृति फिर तुलसी बन कर लौटी थीं। यद्यपि उसके बाद उनके रिश्ते सामान्य नहीं रहे।
अगर नहीं तैयार होती हैं तो?
अगर स्मृति ईरानी सीरियल में आने के लिए तैयार नहीं होतीं तो एकता कपूर देश भर में तुलसी की की खोज करेंगी। सूत्रों का कहना है कि इस रोल के लिए घरेलू, आकर्षक और नई तुलसी को तलाश करने के लिए एकता शहर-शहर जाकर ऑडिशन लेंगी।
यह पहला मौका नहीं है जब एकता अपने सीरियल की हीरोइन के लिए इस तरह से ऑडिशन करेंगी। दो साल पहले उन्होंने सीरियल ‘जोधा-अकबर’ की जोधा के लिए आठ महीने तक यहां-वहां खाक छानी थी। तब जाकर इंदौर में उन्हें परिधि शर्मा मिलीं, जिन्हें जोधा बनाया गया।