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'पहरेदार पिया की' से रूठे फैंस क्या मानेंगे 90's की इस लव स्टोरी से?

Sun, 10 Sep 2017 03:48 PM IST
संध्या द्विवेदी
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ये उन दिनों की बात है जब इश्क की शुरुआत किसी सिनेमा हॉल या मॉल से नहीं होती थी। ये उन दिनों की बात है जब इंडिया डिजिटल नहीं हुआ था। लव एसएमएस नहीं लव लेटर लिखे जाते थे। ये उन दिनों की बात है जब लव मैरिज करना किसी 'श्वेत क्रांति' या 'हरित क्रांति' से कम नहीं समझा जाता था। 
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ये उन दिनों की बात है
चैनल सोनी पर हाल ही में शुरू हुआ सीरियल 'ये उन दिनों की बात है' धीरे-धीरे दर्शकों के दिल में जगह बना रहा है। अभी इसके तीन एपिसोड रिलीज हुए हैं। सास-बहू-साजिश से अलग ये सीरियल 90's के दौर का बेहद रोमांटिक किस्सा है। 


 

ये उन दिनों की बात है
जाहिर सी बात है उस दौर में इश्क एक गुनाह और इश्क करना कैरेक्टर की एक गंभीर बीमारी माना जाता था। ये सीरियल इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि हाल ही में बंद हुआ  ' पहरेदार पिया की' के मेकर्स और इस सीरियल के मेकर्स एक ही हैं। पहरेदार पिया की सीरियल विवादों की वजह से बंद हो गया था। इस सीरियल में 9 साल के लड़के और 18 साल की लड़की की शादी दिखाई गई थी।  

ये उन दिनों की बात है
सीरियल के प्रोड्यूशर ने 'पहरेदार पिया की' शो के बंद होने पर कहा था ये एक तरह से 'मिसकैरेज' होने जैसा है। विवादित थीम की वजह से बंद हुए अपने पहले शो से हुए नुकसान की भरपाई के लिए शायद इस बार मेकर्स ऐसा विषय लेकर हैं जिससे कोई विवाद न उठे और रूठे फैंस भी उन्हें माफ कर दें। खैर बात करें 'ये उन दिनों की बात है' के सीरियल की तो  ये कहानी हैदराबाद की नैना और नैनीताल के समीर की है। 

ये उन दिनों की बात है
अब सोच रहे होंगे कि आखिर इनमें लव कनेक्शन हुआ कैसे तो भाई समीर नैनीताल छोड़कर अहमबाद अपने नानू के घर आते हैं। रास्ते में वो ऑटो से उतरते हैं तो वो एक पत्थर की ठोकर खाकर गिर जाते हैं। उनके मुंह का बबलगम निकलकर चिपक जाता है गोलगप्पे खा रही नैना के बालों में। समीर उन्हें सॉरी कहता है लेकिन उन दिनों के खास अंदाज में।

वो एक कागज के टुकड़े पर दो चोटी वाली लड़की की तस्वीर बनाकर उसके बालों में बबलगम चिपकाकर एक बच्चे के हाथों भिजवाता है। अभी तक समीर और नैना की मुलाकात नहीं हुई है। अब आजकल के टीनेजर्स कहेंगे कि भला बबलगम चिपकने से भी प्यार की शुरुआत हो सकती है? खैर उन दिनों तो ऐसा ही होता था।

 

ये उन दिनों की बात है
दूसरे एपिसोड में लव स्टोरी आगे बढ़ती है...न..न कोई मुलाकात नहीं होती। दरअसल हुआ कुछ यूं कि नैना अपनी बहन के साथ चक्की में गेहूं पिसवाने जाती है। गेहूं चक्की में डालकर वो मस्त हो जाती है सड़क में चल रहे सर्कस को देखने में। उसका दुपट्टा एक लकड़ी के दरवाजे में फंस जाता है।

तभी वहां समीर आ जाता है। कोला का ढक्कन खोलते खोलते उसके हाथ में खून आ जाता है। उसे दिखता नैना का दुपट्टा, मगर नैना नहीं। वो उसे फाड़कर अपने हाथों में बांध  लेता है। नैना एक बार फिर समीर की अनजाने में की इस हरकत की वजह से घर वालों की डांट का शिकार हो जाती है। 

 

ये उन दिनों की बात है
आज के टीनेजर्स को तो एहसास भी नहीं होगा कि उन दिनों दुपट्टे फटने पर भी घर में पंचायत लग जाती थी। नैना के साथ भी यही हुआ। घर में बाकायदा पंचायत लगी। ताई-चाची के जासूसी दिमाग ने इस फटे दुपट्टे का अपने अपने ढंग से विश्लेषण किया। इस ट्रायल में नैना को दोषी करार दिया गया। और ताई ने साफ कह दिया लड़की के लक्षण ठीक नहीं हैं।

 
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ये उन दिनों की बात है
आखिरी एपिसोड में नैना के दिल में प्यार की दस्तक समीर उसके आलू के पराठे खाकर देता है। नहीं..नहीं, अभी भी दोनों की मुलाकात नहीं हुई। अब आप कहेंगे कि ये कैसी दस्तक है। भाई ये जानने के लिए तो 90's के दौर की किसी लव स्टोरी या लव बर्डस की कहानी सुननी पड़ेगी। खैर...आज के टीनेजर्स तो ये सुनकर और देखकर कह उठेंगे...कैसा ये प्यार है? तो डियर टीनेजर्स शायद यही बताने के लिए तो मेकर्स ने शुरू किया है ये सीरियल।

 
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