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रामानंद सागर के बेटे आनंद सागर चोपड़ा का निधन, परिजनों ने दी जानकारी; मुंबई में हुआ अंतिम संस्कार

Fri, 13 Feb 2026 07:19 PM IST
आराध्य त्रिपाठी एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला

सार

Anand Ramanand Sagar Chopra Death: टीवी की दुनिया के दिग्गज निर्माता-निर्देशक रामानंद सागर के परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। निर्माता-निर्देशक के बेटे आनंद  रामानंद सागर चोपड़ा अब इस दुनिया में नहीं रहे।
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आनंद सागर चोपड़ा - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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टीवी पर ‘रामायण’ जैसा लोकप्रिय शो बनाने वाले निर्माता-निर्देशक रामानंद सागर के बेटे आनंद रामानंद सागर चोपड़ा का आज निधन हो गया। उनका अंतिम संस्कार आज शाम 4:30 बजे मुंबई के पवन हंस श्मशान घाट में संपन्न हुआ। आनंद रामानंद सागर भारतीय टेलीविजन के सबसे प्रभावशाली परिवारों में से एक के सदस्य थे। इसकी जानकारी परिजनों की ओर से ही दी गई।

परिजनों ने साझा की दुखद खबर

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परिवार के सदस्यों ने हाल ही में इंस्टाग्राम और सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से इस दुखद समाचार की घोषणा की। यह दुखद घोषणा करते हुए परिजनों की ओर से लिखा गया, ‘अत्यंत दुख के साथ हम अपने प्रिय पिता आनंद रामानंद सागर चोपड़ा के निधन की सूचना साझा कर रहे हैं। पोस्ट में उनके अंतिम संस्कार की रस्मों का विवरण भी दिया गया, जो आज संपन्न हुईं।




पिता की विरासत को आगे बढ़ाया
आनंद सागर ने अपने पिता रामानंद सागर की विरासत को बचाए रखने और आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अपने पिता द्वारा स्थापित प्रोडक्शन हाउस सागर आर्ट्स के हिस्से के रूप में, उन्होंने पौराणिक और भक्तिपूर्ण प्रोजेक्ट्स के निर्माण, क्रिएटिव देखरेख और मैनेजमेंट में अहम योगदान दिया। वर्षों से वे उन परियोजनाओं में सक्रिय रूप से शामिल रहे, जिन्होंने नई पीढ़ियों को महाकाव्य कथाओं से मिलवाया। यह सुनिश्चित करते हुए कि सागर ब्रांड आस्था-आधारित टेलीविजन कार्यक्रमों का पर्याय बना रहे।
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लॉकडाउन में फिर से ‘रामायण’ का किया टेलीकास्ट
2005 में रामानंद सागर के निधन के बाद आनंद सागर ने सागर परिवार के अन्य सदस्यों के साथ मिलकर ‘रामायण’ और अन्य क्लासिक प्रोजेक्ट्स के नए तरीके से फिर से टेलीकास्ट करने का काम जारी रखा। 2020 में राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन के दौरान जब ‘रामायण’ फिर से टीवी पर प्रसारित हुई, तो इसने एक बार फिर रिकॉर्डतोड़ दर्शक संख्या हासिल की। जिससे सागर परिवार की लोक कथाओं को दिखाने और बनाने शैली को इस नई पीढ़ी ने भी पहचाना। आनंद सागर इन प्रोजेक्ट्स की प्रामाणिकता और पवित्रता को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते थे।
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