खन्ना ने मंत्रालय पर आरोप लगाते हुए कहा है कि जब से वह सीएफएसआई से जुड़े तब से अधिकतर फिल्में ऐसी हैं जिन्हें उनमें काम करने वाले बच्चों ने ही नहीं देखा है। ये फिल्में सिर्फ फेस्टिवलों में दिखाई जाती हैं। उन्होंने आगे कहा कि इस डिविजन का मतलब ही क्या रह जाता है? आज बच्चे सिर्फ टीवी पर आने वाले दूसरे सीरियल देखते हैं। हम उन्हें अच्छा कंटेंट क्यों नहीं दे सकते? मुकेश खन्ना ने आगे कहा, 'बच्चों के लिए अच्छी फिल्में बनाना मेरा लक्ष्य था लेकिन फंड की कमी और मंत्रालय की रुचि के न चलते ऐसा नहीं हो सका। मैं बच्चों को अच्छा कंटेंट मुहैया कराने में नाकाम रहा।'