हिंदी फिल्में हों या टीवी धारावाहिक ‘मौलिकता’ उनके लिए हमेशा बड़ी चुनौती रही है। 15 दिसंबर से चैनल लाइफ ओके पर सीरियल ‘महाकुंभ’ शुरू हुआ है। सीरियल के ट्रेलर आ चुके हैं और अटकलें लग रही है कि क्या महाकुंभ का आइडिया 2003 में दुनिया में बिक्री के रिकॉर्ड बनाने वाले डैन ब्राउन के उपन्यास द डा विंची कोड से प्रेरित है? द डा विंची कोड पर हॉलीवुड में फिल्म भी बनी और 2006 में रिलीज हुई थी।
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देवों के देव महादेव की जगह आने वाला महाकुंभ एक बड़े रहस्य पर पड़े पर्दे को खोलेगा। यह रहस्य क्या होगा, आने वाले वक्त में 100 से अधिक कड़ियों के प्रसारण पर पता चलेगा।
सीरियल के निर्माता-निर्देशक अरविंद बब्बल कहते हैं कि यह मिथकीय घटनाओं पर आधारित आज के जमाने का थ्रिलर है। जो हर सोमवार से शुक्रवार तक रात आठ बजे प्रसारित होगा। महाकुंभ असाधारण शक्तियों से लैस युवक रूद्र की कहानी है। जो महाकुंभ के मेले में बचपन में अपने पिता से बिछुड़ जाता है। उसे वाराणसी के घाटों पर रहने वाले एक दंपति पालते हैं।
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आ जाती है असाधारण शक्तियां
जलती लाशों के बीच रूद्र का बचपन बीतता है। रूद्र समय से साथ पाता है कि कुछ असाधारण शक्तियां उसमें हैं जिनसे वह हमेशा लोगों की मदद करता है। मगर ये शक्तियां उसके पास क्यों है, कैसे आईं, क्या वह किसी खास उद्देश्य से जन्मा है यह बातें रूद्र नहीं जानता। बड़े होने पर रूद्र को पता चलता है फिर से महाकुंभ लग रहा है।
वह अपनी शक्तियों और महाकुंभ से अपने जीवन के संबंध का राज जानने को बेचैन हो उठता है...! महाकुंभ की कहानी में रूद्र की शक्तियों का रहस्य उसकी पीठ पर बने एक बड़े-से प्रतीक चिह्नों वाले टैटू में छुपा है। यह टैटू रूद्र के चाहने से भी नहीं मिट सकता। इस टैटू के प्रतीक चिह्नों को पढ़-समझ कर ही रूद्र और महाकुंभ के रहस्य खुल सकते हैं। इन रहस्यों को जो लोग जानना चाहते हैं उन्होंने रूद्र के पिता का अपहरण कर लिया है।
उल्लेखनीय है कि द डा विंची कोड भी ईसाई धर्म के पवित्र प्रतीकों की व्याख्या पर आधारित कहानी थी। जिसमें अमेरिकी प्रतीक विज्ञानी रॉबर्ट लेंग्डन तमाम प्रतीकों की व्याख्या करते हुए, उनके रहस्यों का पता लगाते हुए अंततः इस राज का पता लगाते हैं कि ईसा मसीह के वंशज आज भी धरती हैं। एक समूह जिनका गुप्त रूप से संरक्षक है।
हालांकि द डा विंची कोड की कैथोलिक संप्रदाय ने जमकर आलोचना और विरोध किया था। परंतु दुनिया भर में इस उपन्यास और फिल्म को खूब पसंद किया गया। इस कहानी में कई रोमांचक उतार-चढ़ाव थे और धार्मिक प्रतीकों की आधुनिक व्याख्याएं थीं।
क्या यह एक सुपरमैन जैसी कहानी है?
महाकुंभ में रूद्र की भूमिका गौतम रोड़े निभा रहे हैं। रूद्र के बचपन के रोल में सिद्धार्थ निगम होंगे। फिल्म बेंडिट क्वीन के लिए पहचानी जाने वाली सीमा बिस्वास इस सीरियल से छोटे पर्दे पर पारी शुरू कर रही हैं। जबकि पायल राजपूत, मनीष वाधवा, रॉबिन दास और केतकी दवे भी अहम भूमिकाओं में दिखेंगी।
महाकुंभ में भले ही दर्शकों को पौराणिक प्रतीकों की व्याख्याएं नहीं मिलेंगी, मगर इसके खत्म होते-होते अगर आप पाएं कि कहानी के नायक रूद्र का महादेव अथवा उनके किसी अवतार से रक्त संबंध है, वह उनका वंशज है तो आश्चर्य मत कीजिएगा।
अरविंद बब्बल कहते हैं, ‘हो सकता है कि हमारे सीरियल में आपको कुछ चीजें वैसी लगें क्योंकि वह विषय बहुत विस्तृत और विशाल था। कहानी की जिस लाइन पर हम चल रहे हैं संभव है कि उसमें कुछ वैसा अंदाज हो, लेकिन मेरे दिमाग में उस फिल्म को देख कर यह विचार नहीं आया था।’
इलाहाबाद में लगने वाला महाकुंभ हमारी धर्म और संस्कृति से जुड़ा है। बब्बल का कहना है, ‘महाकुंभ एक विचार है। जितने भी लोग इसमें भागीदारी करने आते हैं उनके मन में यह विचार होता है कि गंगा में एक डुबकी उनके पापों का नाश कर देगी। वे अपने पापों को धोने आते हैं।’
धारावाहिक को लेकर किए शोध के बारे में वह कहते हैं, ‘हमने जानना चाहा कि महाकुंभ की जड़ में क्या है? 2013 के महाकुंभ में पूरे समय में वहां था। क्यों सिर्फ कुंभ के दौरान नागा बाबा दिखते हैं, यह बात किसी ने नहीं सोची। मैंने जानने की कोशिश की क्यों ये उसी वक्त वहां आते हैं।
शोध के दौरान मेरी कहानी के कुछ चिह्न वहां दिखे। उन्हें मैंने महाकुंभ में समेटा है।’ वे बताते है इस सीरियल में हम जो भी बातें कर रहे हैं उनमें कहानी, तथ्य, श्रद्धा और भारतीय दर्शन सब कुछ सम्मिलित है।
लेकिन धारावाहिक महाकुंभ है क्या? बब्बल कहते हैं, ‘संक्षेप में आपसे कहूं कि महाकुंभ की जड़ में अमृतमंथन है। मुझे लगता है कि समाज में आज हर व्यक्ति के मन में ऐसे ही मंथन की जरूरत है। आपके अंदर ही अमृत है और आपके ही अंदर विष है। अगर आपको अमृत तक पहुंचना है तो मंथन जरूरी है।’