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सुपर स्टार बनना चाहता हूं: कार्तिकेय

Wed, 22 May 2013 06:54 AM IST
फीचर डेस्क
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लाइफ ओके चैनल पर 'देवों के देव महादेव' में कार्तिकेय की भूमिका निभा रहे रुचि राज पवार अपने आपको बहुत भाग्यशाली मानते हैं।
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रुचि का मानना है कि 'चंद्रगुप्त' की सफलता के बाद 'देवों के देव महादेव' में कार्तिकेय का प्रभावी रोल उनके पास आया है। बच्चे अब उन्हें कार्तिकेय के रूप में ही जान रहे है।

हाल ही में रुचि राज पवार ने अमर उजाला से खास बात की। आइए जानें कार्तिकेय बने रुचि क्या कहते हैं अपने अनुभवों के बारे में।

'चंद्रगुप्त' के बाद अब हर हर महादेव में आप नजर आ रहे हैं। किस तरह ले रहे हैं कार्तिकेय के अभिनय को?
'चंद्रगुप्त' करने के बाद अब पूरी तरह से मेरा कमबैक हुआ है। देवों के देव महादेव' में कार्तिकेय के रोल को महत्व मिला है। कार्तिकेय दक्षिण भारत में कुमार, स्कंध सुब्रह्मण्यम कई नामों से जाने जाते हैं।
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वह मसीहा की तरह माने जाते हैं। ऐसा नहीं हो सकता है कि कार्तिकेय महादेव के पुत्र हों और उनको लेकर पौराणिक गाथा न हो। लेकिन अभी तक उनके इस किरदार को बहुत पहचान नहीं मिली थी।

टीवी सीरियलों या फिल्मों में सब कुछ शिव, पार्वती और फिर गणेश भगवान तक सिमट जाता था। मुझे अच्छा लगा कि कार्तिकेय के अभिनय के लिए मुझे अवसर मिला।

इसके लिए आपकी कुछ खास तैयारी?
वो तो करनी ही पड़ती है। चंद्रगुप्त के लिए मैंने एक्शन श़ॉट सीखे थे। लड़ने की विधाएं सीखी। यहां मैंने कार्तिकेय के बारे में जितना संभव था उतना जाना।

मैंने महसूस किया कि कार्तिकेय मेरे टाइप्ट का रोल है। चंद्रगुप्त अपनी मां का प्यारा बेटा था, कार्तिकेय से उसका बचपन छीना गया। इन दो भावनाओं के बीच मुझे अपना अभिनय साकार करना था।

'देवों के देव महादेव' सीरियल आपकी निगाह में क्या है?
यह सीरियल धर्म और कला का मिला जुला रूप है। इसमें इमोशंस भी है और तर्क भी है। शिव जनमानस के मन में हैं। शिव के प्रति लोगों के मन में जो आदर का भाव है, उसी अभिव्यक्ति है यह सीरियल।

पहले ऐतिहासिक और अब धार्मिक, आप इसी तरह अपने को ऐसे सीरियलों से जोड़े रखेंगे या कुछ और तमन्ना आपके मन में है?
मैं स्टार नहीं, सुपर स्टार बनना चाहता हूं और मैं जानता हूं कि यह आसान नहीं। मैं वही रोल स्वीकार कर रहा हूं जो मुझ पर सूट करते हों।
मुझे एक अच्छी हिंदी फिल्म मिली है। बहुत कुछ करना है। और साथ में दसवीं की परीक्षा भी देनी है।

आप किताबें भी पढ़ते हैं, किस तरह की किताबें पढ़ते हैं?
मुझे आटोबॉयग्राफी पढ़ना अच्छा लगता है। गांधीजी की जीवनी पढ़ी। एनी फ्रेंक को पढ़ा। धीरे-धीरे पढ़ता भी रहता हूं। पढ़ने से बहुत कुछ पता चलता है।

आजकल कलाकारों का फिटनेस पर बड़ा ध्यान रहता है। फिटनेस के लिए आप भी क्रेजी हैं?
नहीं। थोड़ा बहुत ध्यान रखता हूं। वैसे सूर्य नमस्कार करता हूं। लेकिन खाने-पीने पर कंट्रोल नहीं है। जो पसंद आए खाता हूं।

आपकी अपनी पहचान हो गई हैं। बच्चे आपसे आटोग्राफ लेने लगे हैं। आप सेलिब्रिटी की तरह महोत्सवों में बुलाए जा रहे हैं। कैसा लगता है ये सब?
मुझे हमेशा लगता है कि मेरे कैरियर के लिए पिताजी ने अपनी नौकरी छोड़ी है। उनकी और तमाम परिवार के लोग, मित्रों और मेरे प्रशंसकों की मुझसे बड़ी अपेक्षाएं हैं।
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मुझे तीन अवार्ड मिले हैं आईटीए (इंडियन टेलीविजन एकेडमी), न्यू टेलेंट अवार्ड और विग टेलीविजन अवार्ड। लेकिन अभी बहुत आगे जाना है। अपने आप को बहुत निखारना है। अवार्ड मेरा मनोबल बढ़ाते हैं। पर मैं जानता हूं कि ये शुरुआती सफलताएं हैं। मुझमें दम है। जरूर अच्छा ही करूंगा।
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