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बदल रही हैं छोटे पर्दे की 'सासू मां'

Sat, 11 May 2013 07:00 AM IST
नई दिल्ली/आईएएनएस
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फिल्मों और टीवी धारावाहिकों में क्रूर और बहुओं को सताने वाली सास की छवि धीरे-धीरे खत्म हो रही है। फिल्मों ने क्रूर सास का किरदार लगभग खत्म ही कर दिया है, अब छोटा पर्दा भी समय के साथ ताल-मेल बिठाते हुए ऐसा ही करने लगा है।
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छोटे पर्दे के धारावाहिक निर्माता और कलाकारों का कहना है कि अब धारावाहिकों में क्रूर और सताने वाली सास की जगह बहू से सहानुभूति रखने वाली समझदार सास ले रही हैं। आजकल बहू-प्रेम का मंत्र टीवी धारावाहिकों का नया चलन बन चुका है।

धारावाहिक निर्देशक रविंद्र गौतम कहते हैं कि यह बदलाव इसलिए आया है क्योंकि दर्शकों की पसंद बदली है। रविंद्र ने 'कसौटी जिंदगी की' 'उतरन' और 'बड़े अच्छे लगते हैं' जैसे धारावाहिकों का निर्देशन किया है।
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गौतम ने बताया, "दर्शक अब समझदार हो गए हैं। वे नए विचारों और नई कहानियों को पसंद करने लगे हैं। दूसरा कारण यह भी है कि दर्शक वही पुरानी बुरी और क्रूर सास वाली कहानियों से ऊब चुके हैं।"

अच्छी सास वाले धारावाहिक की शुरुआत 'कलर्स' चैनल के धारावाहिक 'बालिका वधू' से हुई थी, जिसमें किशोर उम्र की बहू आनंदी ने ससुराल में कठोर स्वभाव वाली दादी-सास का दिल जीता।

'स्टार प्लस' के धारावाहिक 'ससुराल गेंदा फूल' की सास के रूप में सुप्रिया पिलगांवकर को एक समझदार और बहुओं से दोस्ताना व्यवहार रखने वाली सास के रूप में दिखाया गया।

गौतम कहते हैं कि नई कहानियों की सास अपनी बहुओं से दोस्त जैसा व्यवहार रखती हैं। वह कहते हैं जिन घरों में ऐसा नहीं है उन्हें टीवी के ये धारावाहिक जरूर देखने चाहिए।

'कलर्स' साप्ताहिक कार्यक्रम प्रमुख प्रशांत भट्ट कहते हैं कि आजकल परिवारों में रिश्तों में आ रहे बदलावों का परिणाम है कि टीवी धारावाहिकों में भी सास-बहू के रिश्तों में बदलाव आया है।
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धीरे-धीरे ही सही, लेकिन अब छोटे पर्दे की कठोर, तंज कसने वाली और बहुओं को सताने वाली सास की छवि बदल रही है।
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