जी टीवी पर जल्द ही प्रसारित होने वाले सीरियल 'अपना टाइम भी आएगा' की मुख्य कलाकार अनुष्का सेन ने लाइव कार्यक्रम के दौरान अमर उजाला के साथ ढेर सारी बातें कीं। वहीं प्रदेश के मुख्य शहरों- लखनऊ, वाराणसी, मेरठ व प्रयागराज की अचीवर्स भी लाइव कार्यक्रम में शामिल हुईं।
शो के बारे में बात करते हुए अनुष्का ने बताया, ''इस किरदार के बारे में जब मैंने सुना तो मुझे इससे बहुत प्रेरणा मिली। यह बहुत अलग ही किरदार है। मैं अपने फैंस के लिए कुछ अलग करने की कोशिश करती हूं। जो रानी है वो बलिया के छोटे से गांव की है इसलिए मुझे इससे काफी कुछ सीखने को मिला, कुछ अभी भी सीख रही हूं।''
अपने किरदार के बारे में बात करते हुए अनुष्का कहती हैं, ''रानी का किरदार बहुत खास है। वह दिल से सोचती है। उसका मन साफ है, वह बिंदास जीवन जीती है। उसका सपना है जीवन की ऊंचाइयों को छूना। उसके लिए हैसियत मायने नहीं रखती। वह बड़ी सोच रखती है। मैं अमर उजाला के माध्यम से जीटीवी को धन्यवाद कहना चाहूंगी कि वह ऐसा शो लेकर आए हैं जिसकी कहानी इतनी खास है।''
इस शो की कहानी वास्तविकता और उतार चढ़ाव से इतनी भरपूर है कि आप इसे देखकर हैरान रह जाएंगे। आप देखेंगे कि कैसे एक बेटी आर्थिक और सामाजिक परिस्थितियों से जूझते हुए अपने सपनों की तरफ अग्रसर होती है और समाज उसके रास्ते में रूकावटें तो पैदा करता है, लेकिन वह हिम्मत नहीं हारती। अनुष्का कहती हैं, इस शो से हमारी बहुत सारी आशाएं हैं साथ ही हम चाहते हैं कि लोग इससे काफी कुछ सीखें।
वाराणसी से बरखा सोनकर भी अमर उजाला के साथ जुड़ीं। बरखा बास्केटबॉल खिलाड़ी हैं। बातचीत में उन्होंने बताया, 'मैं 9 साल की उम्र से खेल रही हूं। जब मैं यूपी टीम के लिए सेलेक्ट हो गई तब मैंने इसी में करियर बनाने की ठानी। मेरे परिवार ने हमेशा मेरा समर्थन किया है। मेरा सफर कठिनाइओं से भरा रहा है लेकिन मैंने आगे बढ़ने के बारे में ही सोचा है। मेरी मां की बात हमेशा मुझे याद रहती है। मुझे लड़की होने के ताने दिए गए लेकिन मैंने और मेरे परिवार ने किसी की नहीं सुनी।
मेरठ से महक महाजन भी अमर उजाला के साथ जुड़ीं। अपने सफर पर बात करते हुए उन्होंने कहा- मैं शुरू से ही पढ़ाई में अव्वल रही लेकिन एक वक्त ऐसा आया जब मुझे सबकुछ छोड़कर बिजनेस संभालना पड़ा। महिला होना मेरी लिए सबसे बड़ी चुनौती साबित हुई। संकीर्ण सोच की वजह से मुझे काफी मुसीबतें आईं लेकिन मैंने आत्मविश्वास के साथ काम किया और आगे बढ़ी।
लखनऊ से सुप्रिया सिंह ने अमर उजाला से बातचीत में कहा, आज मैं जो कुछ भी हूं अपने परिवार की वजह से हूं। जो लोग कभी मेरे परिवार को ताने मारते थे आज वो मेरे जैसा बनना चाहते हैं। प्रयागराज से पूनम किशोर ने कहा, बचपन से कला में मेरी रूचि रही, मेरा एक हाथ ठीक नहीं था लेकिन मेरे पिता चाहते थे कि मैं संगीत में करियर बनाऊं। मैं बचपन से ही ड्रॉइंग में अच्छी थी इसलिए आगे चलकर मैंने इसी में करियर बनाया।