नकली प्रदर्शन करने के लिए दिए जा रहे पैसे?
दरअसल यूट्यूब पर एक चैनल 'द बार्बर शॉप विद शांतनु' में दावा किया गया कि सिनेमाघरों में भावनात्मक चीजें नकली और बनावटी होते हैं। वक्ता ने आरोप लगाया कि फिल्म देख कर सिनेमाघरों में लोग जो प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं वह झूठी हैं। उन्होंने कहा 'इस बेतुकी 'सैयारा' फिल्म के साथ क्या हो रहा है? मेरे विचार से, इस फिल्म के निर्माता ने कई युवाओं को सिनेमाघरों में जाकर रोने का भावनात्मक प्रदर्शन करने के लिए 500 रुपये दिए हैं। इस तरह फिल्म का प्रचार हो रहा है।'
तनीषा मुखर्जी का फूटा गुस्सा
तनीषा मुखर्जी ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे नकारात्मक बताया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा 'पूरी तरह से असहमत। समय बदल रहा है और ये लोग अतीत में ही उलझे हुए हैं। नए लोगों को प्यार दें और उनकी तारीफ करें। यह आदमी बकवास कर रहा है। क्या उसे फिल्म के बारे में कुछ भी पता है? वह 'सैयारा' के बहाने नकारात्मक बातें करके व्यूज बटोर रहे हैं। अगर लोग किसी फिल्म को पसंद कर रहे हैं तो इसमें गलत क्या है? सिर्फ इसलिए कि वह खुद को उससे जोड़ नहीं पा रहे हैं, इसका मतलब यह नहीं कि युवा पीढ़ी भी उससे जुड़ाव महसूस नहीं करती। हर पीढ़ी अलग होती है। हम कह रहे हैं जाकर फिल्म देखिए और देखिए दर्शक कैसे प्रभावित होते हैं, फिर बात कीजिए। यह तो सिर्फ बॉलीवुड की आलोचना है!'