प्रस्ताव तो आपके पास इसके पहले भी आए ही होंगे?
अपने ट्रेड में मेरा दर्जा आइकॉनिक मिस्ट्री राइटर का है, और मेरी ख्याति ब्रांड नेम के तौर पर है इसलिए हिंदी सिनेमा से ऑफर तो आते ही रहते हैं लेकिन तकरीबन हर प्रस्ताव ऐसा होता है जो इस मसल को चरितार्थ करता है कि एक हम जैसे एक, हम से भी बुरे। खुद को निर्माता बताते हैं, मालूम पड़ता है कि ट्रैक रिकार्ड न होने के बराबर है और असल में ‘प्रोपोज़ल सेलर’ हैं। इसके बाद भी मुझ जैसे लेखक से उम्मीद करते हैं कि वह ये सुन कर ही बाग-बाग हो जाए कि मेरे नॉवल पर फिल्म या सीरियल बनाये जाने का प्रस्ताव है। पैसे की बात आती है तो ‘चिकन फीड’ (ऊंट में मुंह में जीरा जैसी कहावत) के बदले में कुल जहां के राइट्स हासिल करना चाहते हैं और वो ‘चिकन फीड’ भी एकमुश्त नहीं, कई किस्तों में देना चाहते हैं।
लेकिन, कोई तो निर्माता आपकी शोहरत सुनकर आया होगा, जिसने आपको नहीं न कर पाने लायक प्रस्ताव दिया होगा?
केवल एक पुख्ता ऑफर मुझे मिली थी और वह बालाजी (टेलीफिल्म्स) से थी और जो मैंने भरपूर एकमुश्त एडवांस के एवज में बाखुशी कुबूल की थी। लेकिन बालाजी के साथ एग्रीमेंट को तीन साल से ऊपर हो चुके हैं और अभी तब स्टेप वन की खबर भी मुझ तक नहीं पहुंची है। बुक ट्रेड में मेरी बहुत तसल्लीबख्श हैसियत है, इसलिए बॉलीवुड का लेखक बनने की अपनी तरफ से मैंने कभी कोई कोशिश नहीं की। मुझे जब भी, जो भी ऑफर मिलती है, घर बैठे मिलती है लेकिन कुबूल करने लायक शायद ही कभी कोई होती है क्योंकि तकरीबन हर ऐसे प्रस्ताव में भेद होते हैं, खोट होती हैं, मिनीमम से मैक्सीमम हासिल करने की नीयत होती है। ऐसी ऑफर कोई बहुत ही जरूरतमंद शख्स कुबूल कर सकता है जोकि मैं नहीं हूं।