फिल्मों का किया निर्देशन और लेखन
1991 में, राजन ने 'निजालगल रवि' और सरथकुमार की 'नम्मा ऊरु मरियम्मा' के साथ एक निर्देशक के रूप में शुरुआत की। साल 2005 में उन्होंने 'अनारचिगल' का निर्देशन किया। उन्होंने 'थंगमना थंगाची' और 'अनारचिगल' की कहानियां भी लिखीं।
अभिनेता के तौर पर किया काम
फिल्मों का प्रोडक्शन, निर्देशन और लेखन के अलावा उन्होंने अभिनय में भी अपना लोहा मनवाया था। उन्होंने 'माइकल राज', 'सोंथाक्करन', 'वीटोडा मापिल्लई', 'पाम्बु सताई', अजित कुमार की 'थुनिवु' और सेल्वाराघवन की 'बकासुरन' में अभिनय किया है।