स्थानीय फिल्मों की मांग बढ़ी
पैन इंडिया फिल्मों की सफलता को लेकर अभिनेता ऋषभ शेट्टी का कहना है कि आज भाषा मायने नहीं रखती। आज के दौर की फिल्मों ने भाषा की सीमा को पार कर दिया है। अब दर्शक फिल्म में दिखाए जाने वाले विषय से जुड़ रहे हैं। शायद इसलिए पैन इंडिया फिल्म का कॉन्सेप्ट चल पा रहा है। ऋषभ शेट्टी ने कहा, 'मैं इस मंत्र में विश्वास रखता हूं कि यदि कोई फिल्म स्थानीय है और जड़ों से जुड़ी हुई है तो विश्व भर में उसकी मांग होगी। वह एक पैन इंडिया फिल्म होगी।'
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'कांतारा' पर क्या बोले ऋषभ शेट्टी
साथ ही ऋषभ शेट्टी ने कहा, '90 के दशक तक क्षेत्रीय सिनेमा पर पश्चिमी फिल्मों का प्रभाव था। हालांकि वे आज स्थानीय संस्कृति को भी शामिल कर रहे हैं। इन विविधताओं ने सिनेमा को नया रूप दिया है, जिसे दर्शकों द्वारा पसंद किया जा रहा है। अब इसकी मांग भी बहुत है। 'कांतारा' इस बात का उदाहरण है। अलग भाषा होने के बावजूद भारत भर में 'कांतारा' को दर्शकों द्वारा खूब पसंद किया गया। क्योंकि लोग इस फिल्म के विषय से खुद को जोड़ पाए।'
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