चर्चित मलयालम अभिनेत्री रेवती और पद्माप्रिया ने फिल्म एक्टर्स की संस्था AMMA से इस्तीफा दे दिया है। उनका कहना है कि यह संस्था अपने सदस्यों की सुरक्षा, सम्मान, जवाबदेही और उनके साथ समान व्यवहार सुनिश्चित करने में नाकाम रही है।
संस्था के आदर्श कमजोर होने का लगाया आरोप
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, अभिनेत्री का आरोप है कि AMMA पर पितृसत्ता और सत्ता की राजनीति का असर बढ़ता गया है। उन्होंने कहा कि संस्था के वे आदर्शों को कमजोर किए जा रहे हैं, जिन पर इसकी स्थापना हुई थी।
कहा- 'जल्दबाजी में नहीं लिया फैसला'
उन्होंने कहा, 'हमारे लिए अभी पीछे हटना हार नहीं, बल्कि आत्म-सम्मान की बात है। सोमवार को इंस्टाग्राम पर जारी एक संयुक्त बयान में दोनों अभिनेताओं ने कहा कि एसोसिएशन ऑफ मलयालम मूवी आर्टिस्ट्स (AMMA) से इस्तीफा देने का उनका फैसला न तो गुस्से में लिया गया और न ही किसी एक घटना की वजह से। उन्होंने कहा, 'आज हम AMMA की अपनी प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे रहे हैं। न गुस्से में, न जल्दबाजी में। हमने इस इंडस्ट्री को दशकों दिए हैं और हमें इसकी आगे की दिशा की परवाह है'।
'वर्षों से कर रहे थे मांग'
उनके मुताबिक, वे वर्षों से एक सीधी-सी मांग कर रहे थे। मांग थी- सुरक्षा, सम्मान, जवाबदेही और बराबरी के बर्ताव की। उन्होंने कहा, 'इसके बदले हमें सिर्फ खामोशी मिली और धीरे-धीरे यह एहसास हुआ कि यह संस्था, जैसी अभी है, बदलाव के लिए तैयार नहीं है'। अभिनेत्रियों ने कहा कि संगठन की सदस्यता रहे या न रहे, मलयालम सिनेमा हमेशा उनका कार्यस्थल और जुनून बना रहेगा। बयान में कहा गया, "यह AMMA से जुड़े चल रहे विवाद का एक और अध्याय लग सकता है, लेकिन ऐसा नहीं है। हमारा इस्तीफा जल्दबाजी में नहीं दिया गया है और न ही यह किसी एक घटना की वजह से है'।
बोलीं- 'सवाल उठाने की कीमत चुकानी पड़ी'
उन्होंने कहा कि वर्षों से वे एक साधारण सी मांग उठा रहे थे। सवाल उठाने की कीमत खामोशी और दूरी के तौर पर चुकानी पड़ी है। साथियों से, दोस्तों से और उन जगहों से जो कभी घर जैसी लगती थीं। फिर भी, हम डटे रहे, क्योंकि उम्मीद में निराशा के बावजूद बने रहने की अद्भुत क्षमता होती है। मलयालम फिल्म इंडस्ट्री में यौन हिंसा और लैंगिक असमानता की जांच करने वाली हेमा कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद हुई घटनाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, 'हेमा कमेटी रिपोर्ट के बाद इस्तीफे किसी सिद्धांत के तहत नहीं दिए गए थे। वे जवाबदेही से बचने का एक तरीका थे। जब लोगों का ध्यान हट गया, तो वही पुरानी व्यवस्था फिर से लौट आई'।