एम एम कीरावणी संगीत जगत का चमता सितारा हैं। उनके गाने साउथ ही नहीं, बल्कि उत्तर भारत में भी काफी पसंद किए जाते हैं। हालांकि, हिंदी पट्टी में ज्यादातर लोग उन्हें एम एस क्रीम के नाम से जानते हैं। आज उनके जन्मदिन पर आइए जानते हैं उनसे जुड़ीं खास बातें...
इस फिल्म में मिला पहला मौका
कीरावणी का जन्म आंध्र प्रदेश के पश्चिमी गोदावरी जिले के कोव्वुर में हुआ था। उनके पिता कोडुरी शिव शक्ति दत्ता एक गीतकार और पटकथा लेखक थे। उन्होंने अपने संगीत करियर की शुरुआत साल 1987 में तेलुगु संगीतकार के चक्रवर्ती और मलयालम संगीतकार सी राजमणि के साथ सहायक संगीत निर्देशक के रूप में किया था। स्वतंत्र संगीतकार के रूप में कीरावनी को पहला बड़ा ब्रेक 1990 में फिल्म कल्कि से मिला , लेकिन यह फिल्म कभी रिलीज नहीं हुई और उनके गाने पर लोगों का खास ध्यान नहीं जा सका।
रामू की फिल्म से चमकी किस्मत
साल 1991 में राम गोपाल वर्मा की फिल्म क्षणम-क्षणम से वह संगीतकार के रूप में खास पहचान मिली। इस फिल्म के सभी गाने टॉप चार्टबस्टर बन गए और कीरावणी को पूरे दक्षिण भारतीय फिल्म इंडस्ट्री से जमकर प्रस्ताव मिलने लगे। उनकी पहली प्रमुख हिंदी फिल्म क्रिमिनल थी, जो साल 1994 में रिलीज हुई थी। इसके अलावा वह हिंदी फिल्म सुर और जख्म के सुपरहिट संगीत के लिए भी जाने जाते हैं।
नाटू-नाटू ने दुनियाभर में दिलाई पहचान
अपने संगीत की वजह से कीराणवी अपने कई प्रतिष्ठित अवॉर्ड अपने नाम कर चुके हैं। साल 2023 में उनके गाने नाटू-नाटू ने ऑस्कर अवॉर्ड जीतकर इतिहास रच दिया था। इस गाने ने उन्होंने दुनियाभर में खास पहचान दिलाई है। इससे पहले उनका कंपोज किया गया यह गाना ग्लोडन ग्लोब अवॉर्ड भी अपने नाम कर चुका था।
कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से हो चुके हैं सम्मानित
अपने करियर में उन्होंने एक अकादमी पुरस्कार , एक गोल्डन ग्लोब पुरस्कार , एक LAFCA पुरस्कार , ग्यारह नंदी पुरस्कार , आठ फिल्मफेयर पुरस्कार , दो राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और एक क्रिटिक्स चॉइस मूवी अवॉर्ड जीते हैं। साल 2023 में भारत सरकार ने उन्हें भारतीय सिनेमा में उनके योगदान के लिए पद्म श्री से सम्मानित किया था।
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