Jana Nayagan: सीएम विजय की फिल्म 'जन नायकन' काफी समय तक सेंसर विवादों में फंसी रही। फिल्म के निर्माता ने बताया है कि सेंसर बोर्ड ने उनसे फिल्म में कौन से बदलाव करने को कहा था।
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय और अभिनेता अपनी आखिरी फिल्म 'जन नायकन' को लेकर चर्चा में हैं। काफी विवाद के बाद आखिरकार यह फिल्म सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है। फिल्म के निर्माता के. वेंकट नारायण ने उन बदलावों पर बात की है, जो केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड ने उनसे सर्टिफिकेट देने से पहले करने को कहा था।
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फिल्म में था आपत्तिजनक डायलॉग
एच विनोथ के निर्देशन में बनी इस फिल्म में किए गए अहम बदलावों में से एक डायलॉग था, जिसमें डॉ. बी.आर. अंबेडकर के संविधान और विजय की पार्टी 'तमिलगा वेट्री कझगम' (टीवीके) के संविधान के बीच संबंध दिखाया गया था। निर्माता के मुताबिक, ओरिजिनल डायलॉग यह था 'अगर अंबेडकर के संविधान का पालन नहीं किया गया, तो टीवीके का संविधान लागू होगा।'
फिल्म 'जन नायकन' में विजय थलापति
- फोटो : सोशल मीडिया
ज्यादा आसान था उसे समझना
नारायण ने आगे बताया कि इस डायलॉग का मतलब उससे कहीं ज्यादा आसान था जितना समझा गया। उन्होंने एनडीटीवी से बातचीत में कहा 'अगर आप संविधान का पालन नहीं करते हैं, तो उसका नतीजा क्या होगा? इसे ज्यादा आसानी से समझ में आने वाले तरीके से पेश किया गया है। यह आम बोलचाल की भाषा है। घर पर भी आप बच्चे से कहते हैं कि अगर बनाए गए नियम का पालन नहीं करोगे, तो तुम्हें नतीजे भुगतने होंगे।'
सीबीएफसी ने इसलिए दिए सुधार के निर्देश
उन्होंने आगे कहा 'चूंकि इसमें कुछ राजनीतिक भाषा का जिक्र था, इसलिए हमसे उसमें सुधार करने के लिए कहा गया। हम देश के कानून का सम्मान करते हैं। जहां भी उन्होंने हमसे सुधार करने के लिए कहा, हमने वे बदलाव किए।'
फिल्म 'जन नायकन' में विजय थलापति
- फोटो : सोशल मीडिया
सीबीएफसी ने दिए ये निर्देश
कुल मिलाकर सीबीएफसी ने लगभग 20 सेकंड के हिस्से को हटाने और लगभग 10 सेकंड के फुटेज को बदलने का आदेश दिया।
अंबेडकर-टीवीके डायलॉग के अलावा, सेंसर बोर्ड ने मेकर्स को एक किताब के कवर को बदलने का भी निर्देश दिया, जिस पर डॉ. अंबेडकर की तस्वीर थी। कई धार्मिक संदर्भों को या तो म्यूट कर दिया गया या हटा दिया गया। साउंडट्रैक से 'भागवथन', 'रंगनाथर' और 'ओम' शब्दों को म्यूट कर दिया गया, जबकि फिल्म में 'ऑपरेशन मेलुहा' नाम की चीज को समझाने वाले डायलॉग से खास तौर पर 'ओम' शब्द को हटा दिया गया।
फिल्म को कौन सा सर्टिफिकेट मिला?
सेंसरशिप पर प्रतिक्रिया देते हुए नारायण ने कहा कि फिल्म इंडस्ट्री सेंसर बोर्ड के सर्टिफिकेशन पर चलती है, इसलिए उनके पास इसे मानने के अलावा कोई चारा नहीं था। फिल्म बनाने वालों ने दिसंबर 2025 में 'जन नायकन' को जमा किया था और पांच सदस्यों वाली जांच समिति ने शुरू में कुछ कट-छांट के साथ U/A 16+ सर्टिफिकेट देने की सिफारिश की थी।
रिविजनिंग कमेंटी के पास भेजी गई फिल्म
बदलाव करने के बाद फिल्म को फिर से जमा किया गया, लेकिन सीबीएफसी के चेयरमैन ने इसे रिविजनिंग कमेटी के पास भेज दिया, जिससे पूरी प्रक्रिया रुक गई।
इसके बाद मद्रास हाई कोर्ट में कानूनी लड़ाई हुई, जिसके बाद फिल्म बनाने वालों ने अपनी याचिका वापस ले ली और फिल्म को फिर से जमा किया, आखिरकार इसे 'A' सर्टिफिकेट के साथ मंजूरी मिल गई। अब यह 23 जुलाई को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है।