साल 2002 में साउथ की चर्चित अदाकारा प्रत्युषा ने दुनिया को अलविदा कह दिया था। उनकी मौत ऐसे वक्त हुई, जब वह अपने करियर के शीर्ष पर थीं। उनके निधन की खबर ने इंडस्ट्री में हलचल मचा दी थी। कथित तौर पर प्रत्युषा ने आत्महत्या की थी। वहीं, अभिनेत्री की मां ने अदालत का दरवाजा खटखटाया और आरोप लगाया कि उनकी बेटी की हत्या हुई है। प्रत्युषा की मां सरोजिनी देवी ने बेटी के बॉयफ्रेंड गुडिपल्ली सिद्धार्थ रेड्डी के खिलाफ केस किया। प्रत्युषा की हत्या हुई या उन्होंने आत्महत्या की, इसे लेकर उनके निधन के दो दशक से अधिक वक्त के बाद सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया है।
लोगों की भावना के हिसाब से जांच से इंसाफ में गलती का खतरा
कोर्ट ने प्रत्युषा को आत्महत्या के लिए उकसाने के लिए सिद्धार्थ की दो साल की सजा को बरकरार रखा है। बता दें कि सिद्धार्थ ने अपने खिलाफ सजा को चुनौती देते हुए याचिका दायर की थी, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया। साथ ही कोर्ट ने कहा कि लोगों की भावनाओं के आधार पर जांच तय नहीं होती और ऐसा करने से न्याय में गलती होने का खतरा होता है। न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए अभिनेत्री का पोस्टमॉर्टम करने वाले डॉक्टर को भी फटकार लगाई है।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट ने आज मंगलवार को कहा कि ज्यादातर लोगों की भावनाओं को मानने या जनता के दबाव में आकर न्याय नहीं मिलता। हाई-प्रोफाइल मामलों में गुस्सा होना समझ में आता है, लेकिन इससे कभी भी जांच तय नहीं होनी चाहिए। जस्टिस राजेश बिंदल और मनमोहन की बेंच ने कहा कि जांच के नतीजे को पब्लिक की भावना के हिसाब से तय करने से इंसाफ की गलती का खतरा है। जांच के लिए सबूतों को ध्यान से इकट्ठा करना, बिना भेदभाव के एनालिसिस करना और तथ्यों पर आधारित नतीजों की जरूरत होती है'। बेंच ने कहा, 'निष्पक्षता के लिए प्रतिबद्ध समाज को यह मानना चाहिए कि इन्वेस्टिगेटर और कोर्ट सच्चाई की सेवा करते हैं, लोकप्रियता की नहीं। उनकी आजादी कोई लग्जरी नहीं, बल्कि न्याय की नींव है।
पोस्टमॉर्टम करने वाले डॉ. को क्या कहा?
कोर्ट ने एक्ट्रेस का पोस्टमॉर्टम करने वाले डॉ. मुनि स्वामी की भी आलोचना की और कहा कि 25 फरवरी, 2002 को ड्यूटी पर एक डॉक्टर होने के बावजूद वे खुद ही मॉर्चरी आए और ऑटोप्सी की। बेंच ने कहा कि यह हैरानी की बात है, क्योंकि स्वामी न तो मॉर्चरी में ड्यूटी पर थे और न ही प्रोफेसर के तौर पर ऑन कॉल ड्यूटी पर थे। डॉ. मुनि स्वामी की समय से पहले और गलत राय ने लोगों में विवाद खड़ा कर दिया। कुछ मीडिया रिपोर्टों ने उनके नतीजों को बढ़ा-चढ़ाकर बताया, जिससे जांच करने वालों पर बहुत शक हुआ और कथित अपराधियों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई की मांग की गई। यह दिखाता है कि कैसे एक गलत रिपोर्ट, जब समय से पहले पब्लिसाइज हो जाती है तो लोगों की सोच को बिगाड़ सकती है और न्याय के रास्ते को पटरी से उतार सकती है।
प्रत्युषा ने क्यों दी जान?
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इससे गलत जानकारी फैलती है, जांच एजेंसियों और पुलिस और ज्यूडिशियरी जैसी संस्थाओं पर से भरोसा कम होता है, लोगों की राय पर बुरा असर पड़ता है, पीड़ित के परिवार को सदमा पहुंचता है और कानून के राज को कमजोर करता है। कोर्ट ने कहा, 'यह मेडिकल एथिक्स का भी उल्लंघन है, जिसके लिए काबिलियत, ईमानदारी और मेहनत की जरूरत होती है'। अभिनत्री प्रत्युषा की मौत 24 फरवरी, 2002 को हैदराबाद में हुई थी। रिमांड रिपोर्ट के मुताबिक, गुडिपल्ली सिद्धार्थ रेड्डी के खिलाफ केस का निचोड़ यह है कि प्रत्युषा और वे छह साल से एक-दूसरे से प्यार करते थे। प्रत्युषा की मां को यह रिश्ता मंजूर था, लेकिन रेड्डी की मां इस रिश्ते के लिए तैयार नहीं थीं, जिसकी वजह से दोनों ने सुसाइड करने का फैसला किया। 23 फरवरी, 2002 को वे एक कार में गए। कीटनाशक की एक बोतल खरीदी, उसे कोला में मिलाकर पी लिया। हालांकि, उन्हें समझ आ गया और उन्होंने फैसला किया कि उन्हें मरना नहीं चाहिए। वे अस्पताल पहुंचे। मगर, उपचार के दौरान प्रत्युषा की मौत हो गई।