अभिनेत्री स्मिता पाटिल अगर आज हमारे बीच होतीं तो अपना 71वां जन्मदिन मना रही होतीं। मगर, उनकी उम्र की संख्या 31 पर ठहर गई। फिल्म 'आनंद' का एक डायलॉग है- 'जिंदगी बड़ी होनी चाहिए, लंबी नहीं'। स्मिता पाटिल का जीवन कुछ ऐसा ही रहा। जिस उम्र में लोग ठीक से जीने की शुरुआत करते हैं, उस उम्र में स्मिता पाटिल अभिनय की दुनिया में एक बड़ी तस्वीर खींचकर रुखसत हो गईं। बेहद प्रखर और बहुमुखी प्रतिभा की धनी इस अदाकार की फिल्में धरोहर हैं। स्मिता से जुड़ी कई यादें और किस्से हैं। जानिए...
स्मिता पाटिल
- फोटो : सोशल मीडिया
मुस्कान देखकर हुआ नामकरण
स्मिता का जन्म 17 अक्तूबर 1956 को पुणे में एक राजनीतिक रसूखदार परिवार में हुआ था। असल में जन्म के समय उनके चेहरे पर मुस्कराहट देख कर उनकी मां विद्या ताई पाटिल ने उनका नाम स्मिता रख दिया। यह मुस्कान आगे चलकर भी उनके व्यक्तित्व का सबसे आकर्षक पहलू बनी। स्मिता पाटिल अपने गंभीर अभिनय के लिए जानी जाती थीं, लेकिन बहुत कम लोग जानते है कि फिल्मी परदे पर सहज और गंभीर दिखने वाली स्मिता पाटिल असल जिंदगी में बहुत शरारती थीं।
स्मिता पाटिल
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फिल्मों से पहले न्यूज एंकर थीं स्मिता
स्मिता पाटिल ने भारत के मशहूर संस्थान फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया से पढ़ाई पूरी की। यहां से उन्होंने अभिनय की बारीकियां सीखीं। इसके बाद उन्होंने फिल्मों का रुख किया। मगर, इससे पहले उन्होंने बतौर न्यूज एंकर कुछ वक्त काम किया था। स्मिता पाटिल बॉम्बे दूरदर्शन में मराठी में समाचार पढ़ा करती थीं। इसकी कहानी भी दिलचस्प है। दरअसल, स्मिता की सड़क पर गिरी एक तस्वीर ने उनकी तकदीर बदल दी। उनकी तस्वीर दूरर्दशन के निदेशक को पसंद आ गई थी। फिर क्या था इसी के बाद उन्हें टीवी पर काम करने का मौका मिला और इसके बाद उन्होंने बड़े पर्दे का रुख कर लाखों लोगों को दीवाना बना दिया।
स्मिता पाटिल
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स्मिता पाटिल का फिल्मी करियर
स्मिता पाटिल के फिल्मी करियर की शुरुआत अरुण खोपकर की 'डिप्लोमा' फिल्म से हुई, लेकिन मुख्यधारा के सिनेमा में स्मिता ने 'चरणदास चोर' से अपनी मौजूदगी दर्ज की। इसके निर्देशक थे श्याम बेनेगल। स्मिता पाटिल ने अपने छोटे फिल्मी सफर में ऐसी फिल्में की जो भारतीय फिल्मों के इतिहास में मील का पत्थर बन गईं। उनकी छाप छोड़ने वाली फिल्मों में जहां भूमिका, मंथन, आक्रोश, चक्र, मिर्च मसाला, अर्थ, मंडी और निशांत जैसी कलात्मक फिल्में शामिल हैं, तो दूसरी तरफ 'नमक हलाल' और 'शक्ति' जैसी व्यावसायिक फिल्में भी कतार में है।
स्मिता पाटिल
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10 साल के करियर में मिले बड़े अवॉर्ड
स्मिता पाटिल का करियर सिर्फ 10 वर्षों का रहा। उन्होंने अपने शानदार अभिनय के बूते कई प्रतिष्ठित अवॉर्ड जीते। साल 1977 स्मिता पाटिल के लिए एक अहम पड़ाव साबित हुआ इसी साल उनकी फिल्म 'भूमिका' आई, जिसके लिए उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
स्मिता पाटिल
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कम उम्र में छिपकर सीखी थी ड्राइविंग
स्मिता पाटिल की जीवनी लिखने वाली मैथिलि राव के मुताबिक, 'स्मिता निजी जिंदगी में बहुत साधारण थीं। उनके अंदर ऐसी कोई चाहत नही थीं कि वह कोई बहुत बड़ी स्टार बनें। जिंदगी के प्रति गंभीर होने के साथ साथ वे बहुत शरारती थीं। बहुत मस्ती करती थीं। उन्हें गाड़ी चलाने का बहुत शौक था। यही कारण है कि 14 -15 साल की उम्र में ही उन्होंने चुपके से ड्राइविंग सीख ली'।
स्मिता पाटिल-राज बब्बर
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'आज रपट जाए' की शूटिंग पर क्यों रोई थीं स्मिता?
फिल्म 'नमक हलाल' का गाना 'आज रपट जाए' तो खूब हिट हुआ। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस गाने को करने के बाद स्मिता रात भर रोती रही थीं। तब अमिताभ बच्चन ने उन्हें समझाया। इस गाने में स्मिता पाटिल और अमिताभ बच्चन ने काफी रोमांटिक सीन दिए थे। गाने की शूटिंग के दौरान स्मिता पाटिल अचानक से फूट-फूटकर रोने लगीं। दरअसल, यह गाना फिल्माते हुए एक्ट्रेस काफी असहज थीं। ऐसे में अमिताभ बच्चन ने किसी तरह उन्हें संभाला और समझाया कि फिल्म की स्क्रिप्ट की मांग थी और इसी वजह से यह गाना शूट करना पड़ा। अमिताभ बच्चन के समझाने पर स्मिता पाटिल समझ गईं और फिर उन्होंने फिल्म की शूटिंग पूरी की। एक्ट्रेस को यह विश्वास हो गया कि उन्होंने कुछ भी गलत नहीं किया है।
स्मिता पाटिल-राज बब्बर
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स्मिता पाटिल की निजी जिंदगी
स्मिता अपनी निजी जिंदगी को लेकर भी काफी सुर्खियों में रही थीं। स्मिता पाटिल से शादी करने के बारे में जैसे ही राज बब्बर ने अपने घर में चर्चा की उसके तुरंत बाद ही उनके माता-पिता ने इसका विरोध किया। साथ ही कह दिया कि वे परिवार और स्मिता पाटिल दोनों में से एक को चुन लें। राज बब्बर ने स्मिता पाटिल को चुनते हुए अपना घर छोड़ दिया था। स्मिता के लिए घर छोड़ने के वक्त राज बब्बर की शादी फिल्म निर्देशक और थिएटर आर्टिस्ट नादिरा बब्बर से हो चुकी थी। उनके दो बच्चे भी थे। घर छोड़ने के कुछ महीने बाद ही राज बब्बर ने साल 1986 में स्मिता पाटिल से शादी की थी।
बता दें कि राज बब्बर और स्मिता पाटिल की प्रेम कहानी फिल्म 'भीगी पलकें' की शूटिंग के दौरान शुरू हुई थी। स्मिता की मां ने भी राज बब्बर के साथ स्मिता की शादी का विरोध किया था। मगर, रिश्ते को लेकर स्मिता पाटिल ने मां की भी नहीं सुनी थी।
स्मिता पाटिल
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इस जिद पर अड़ गई थीं अभिनेत्री
स्मिता पाटिल का निधन बेटे प्रतीक बब्बर के जन्म के दो सप्ताह बाद ही 13 दिसंबर 1986 को हो गया था। चाइल्डबर्थ कॉम्प्लिकेशन के चलते अभिनेत्री की मौत हो गई थी। स्मिता से जुड़ा एक एक किस्सा है, जब वे लेटकर मेकअप कराने की जिद पकड़ बैठी थीं। वे 'गलियों का बादशाह' की शूटिंग कर रहीं थीं। इस दौरान वे जब मेकअप रूम में पहुंची तो उन्होंने देखा कि अभिनेता राजकुमार लेटकर अपना मेकअप करा रहे थे। स्मिता ने इससे पहले कभी किसी को ऐसे लेटकर मेकअप कराते हुए नहीं देखा था। उन्होंने अपने मेकअपमैन दीपक सावंत से कहा कि उन्हें भी लेटकर मेकअप कराना है। इस पर दीपक सावंत ने मना कर दिया। मगर, स्मिता जिद पर अड़ गईं। तब, दीपक ने स्मिता से गुजारिश की कि लेटकर मेकअप कराने से खराब हो जाएगा और मुझे परेशान होगी। दीपक के काफी मनाने पर स्मिता बैठकर मेकअप कराने के लिए राजी हुईं।
स्मिता पाटिल
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दुल्हन की तरह सजाकर दी गई आखिरी विदाई
फिल्म 'गलियों के बादशाह' की शूटिंग में तो स्मिता पाटिल की लेटकर मेकअप कराने की ख्वाहिश पूरी नहीं हुई। लेकिन, एक्ट्रेस को उनकी अंतिम विदाई के दौरान दुल्हन की तरह सजाया गया था। मरने से पहले स्मिता ने कहा था कि 'जब मैं मर जाऊंगी तो मुझे सुहागन की तरह तैयार करना।' निधन के बाद उनकी आखिरी इच्छा पूरी की गई। उन्हें दुल्हन की तरह सजाया गया। संयोग ही है कि स्मिता का मेकअप करने आर्टिस्ट दीपक सावंत ही पहुंचे थे, जिनसे स्मिता ये जिद किया करती थीं।