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दार्जिलिंग पहुंचा प्रशांत तमांग का शव, सम्मान से होगा अंतिम संस्कार; 2007 की जीत ने दिया था राजनीति को आकार

Mon, 12 Jan 2026 05:20 PM IST
सिराजुद्दीन एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला

सार

Prashant Tamang: सिंगर-एक्टर प्रशांत तमांग का रविवार को दिल्ली में निधन हो गया। उनकी पत्नी मार्था एले ने कहा कि यह एक स्वाभाविक मौत थी। उन्होंने किसी भी अफवाह को साफ करते हुए कहा कि कोई संदिग्ध बात नहीं है।
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प्रशांत तमांग, शव के पास परिजन - फोटो : सोशल मीडिया, एएनआई
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विस्तार
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सिंगर-एक्टर प्रशांत तमांग के पार्थिव शरीर को सोमवार को दार्जिलिंग उनके घर लाया गया। रविवार को उनका दिल्ली में कार्डियक अरेस्ट से निधन हो गया था। वह 43 साल के थे। अधिकारियों ने बताया कि गोरखालैंड टेरिटोरियल एडमिनिस्ट्रेशन (जीटीए) के निर्देश के मुताबिक उनका अंतिम संस्कार दार्जिलिंग में पूरे सम्मान के साथ किया जाएगा।
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निकाली जाएगी यात्रा
आज दार्जिलिंग में प्रशांत तमांग के पार्थिव शरीर की यात्रा निकाली जाएगी। इसके साथ एक शोक सभा और सर्व धर्म पूजा का आयोजन किया जाएगा। यहां पहाड़ों के कलाकार, राजनीतिक नेता और आम लोग उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि देने आएंगे।

प्रशांत तमांग के निधन पर शोक
जीटीए के ऑफिसर बी के घिसिंग ने कहा 'प्रशांत तमांग की मौत पहाड़ों के लिए एक ऐसा नुकसान है, जिसकी भरपाई नहीं हो सकती। वह सिर्फ एक गायक नहीं थे। वह दार्जिलिंग की आवाज और पहचान बन गए।' तमांग की म्यूजिकल सफलता ने पूरे देश का ध्यान खींचा था। 2007 में 'इंडियन आइडल' में उनकी जीत ने पहाड़ों के सामाजिक-राजनीतिक इतिहास पर एक गहरी छाप छोड़ी।

प्रशांत तमांग - फोटो : इंस्टाग्राम-@prashanttamangofficial
दार्जिलिंग के अलावा बाहर से भी मिला सपोर्ट
प्रशांत तमांग ने 'इंडियन आइडल' का खिताब दार्जिलिंग की पहाड़ियों और उसके बाहर के लाखों वोटों से जीता था। तमांग उस समय गोरखा गौरव और आकांक्षा का एक प्रतीक बनकर उभरे। जो चीज एक लोकल लड़के को नेशनल स्टेज पर सपोर्ट करने के लिए एक कैंपेन के तौर पर शुरू हुई थी, वह जल्द ही राजनीतिक दायरे तक फैल गई।

सिलीगुड़ी लाया गया सिंगर प्रशांत तमांग का पार्थिव शरीर, दार्जिलिंग में होगा अंतिम संस्कार
 

फैन क्लब राजनीतिक यूनिट्स में बदल गए
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि तमांग के 'इंडियन आइडल' में हिस्सा लेने के दौरान जो माहौल बना, वह पहाड़ी राजनीति में एक टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। इस कैंपेन के दौरान जो नेटवर्क और फैन क्लब बने, वे धीरे-धीरे संगठित राजनीतिक यूनिट्स में बदल गए।
 

अलग गोरखालैंड राज्य की मांग उठी
बिमल गुरुंग, जो तमांग के लिए लोगों का समर्थन जुटाने में सबसे आगे थे, उन्होंने लोगों की भावनाओं के इस उभार को एक राजनीतिक ताकत में बदल दिया। इसी गति ने आखिरकार अनुभवी नेता और जीएनएलएफ सुप्रीमो सुभाष घिसिंग को सत्ता के केंद्र से हटा दिया और दार्जिलिंग की पहाड़ियों में एक नई राजनीतिक व्यवस्था की शुरुआत की। उस वक्त दार्जिलिंग और सिलीगुड़ी में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए। इसी दौरान अलग गोरखालैंड राज्य की पुरानी मांग उठी।
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बीजेपी के सांसद ने तारीफ की 
बीजेपी के दार्जिलिंग सांसद राजू बिस्टा ने तमांग की मौत को पूरे देश के लिए एक झटका बताया। उन्होंने कहा 'पुलिस कांस्टेबल के तौर पर काम करने और लोकल ऑर्केस्ट्रा में गाने से लेकर इंडियन आइडल जीतने तक, प्रशांत तमांग ने दिखाया कि हिम्मत और खुद पर भरोसा कैसे किस्मत बदल सकते हैं। उन्होंने कई पीढ़ियों को प्रेरित किया और गोरखा पहचान को राष्ट्रीय चेतना में लाए।'

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