'एआई रियल नहीं है'
अभिजीत भट्टाचार्य से जब आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) के म्यूजिक में इस्तेमाल को लेकर बात की गई तो उन्होंने कहा, 'मुझे नहीं पता यह क्या है? बस इतना पता है कि यह रियल नहीं है'। सिंगर ने आगे कहा,'एआई आपका म्यूजिक में करियर नहीं बनाएगा। इसके इस्तेमाल को बढ़ावा मिलने के बाद आपको गिटारिस्ट और सितार वाला मार्केट में मिलेगा नहीं। सब लैपटॉप पर काम कर रहे हैं, वैसे ही करेंगे। वह रियल नहीं है। अब सबकुच मोबाइल में आ गया है। लेकिन, मेरे जब स्टेज शो होते हैं तो 20 म्यूजिशियन आज भी होते हैं हमेशा और आगे भी होंगे'।
एआर रहमान पर कसा तंज
अभिजीत भट्टाचार्य ने एआई के इस्तेमाल पर बात करते हुए एआर रहमान पर तंज कसते हुए कहा, 'इसके लिए एआर रहमान का शुक्रिया। उन्होंने बताया कि म्यूजिशियन की जरूरत नहीं, सबकुछ इधर मिलेगा लैपटॉप पर। उनकी वजह से बेचारे म्यूजिशियन घर पर बैठे हैं। रहमान साहब ने बोल दिया कि जितना कमाएंगे, मैं कमाऊंगा। म्यूजिशियन की जरूरत नहीं है। मैं पूछता हूं कि आप लोगों को क्या सुना रहे हो? अब बच्चा-बच्चा इस पर म्यूजिक निकाल रहा है'।
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'रहमान के यहां नीचे बैठते हैं बड़े-बड़े लोग'
सिंगर से जब पूछा गया कि क्या आपने कभी एआर रहमान के लिए गाया है? इस पर उन्होंने 'ए नाजनी सुनो ना' गाने का जिक्र किया। साथ ही एक दिलचस्प किस्सा सुनाया जब वे रहमान की अनुपस्थिति में ही गाना रिकॉर्ड करके चले आए। गाना गाया। यह सुपरहिट था। पिक्चर किसी ने देखी नहीं। पर गाना सबको पता है। लेकिन जब मैंने यह गाना गाया तो रहमान स्टेज पर नहीं थे। अभिजीत ने कहा, 'रहमान साहब के यहां मैंने ऐसे-ऐसे पद्म भूषण और पद्मश्री वालों को नीचे बैंच पर बैठे देखा है। साउथ के राइटर, फिल्म मेकर। रहमान साहब उतर ही नहीं रहे नीचे। दो घंटा-तीन घंटा। सब बैठे हैं। एक-दूसरे से गप्पे मार रहे हैं। मैं देख रहा हूं कि ये पद्मश्री, ये पद्मभूषण, बड़े-बड़े लोग। मैंने अपनी घड़ी देखी कि जल्दी करो। जब रहमान साहब नहीं उतरे तो मैं गाना गाकर निकल गया। उनके असिस्टेंट ने ले लिया। जिस काम के लिए आया था वो करके निकल गया'।
कब लगा कि सिंगिंग को प्रोफेशन बनाना है?
अभिजीत से आगे पूछा गया कि आपको कब लगा कि सिंगिंग आपका प्रोफेशन बन सकता है, क्योंकि बंगाली परिवारों में तो देखा जाता है अक्सर सभी गाते हैं? इस पर अभिजीत ने कहा, 'हम पैदा होते हैं बतौर गायक। हमें यहां बनाया नहीं जाता। हमें भगवान वैसे ही बनाकर कोख में डालता है। सिंगर पैदाइशी ऐसे होते हैं। जब आपको समझ आता है कि हम सिंगर हैं तो कुछ करना है, यह भाव आ जाता है। आपको एक बात बता दूं कि सिंगर बड़े घरों में पैदा नहीं होते हैं। संगीत ऐसी चीज है कि आदमी करियर के लिए सोचेगा तो उसके पास पैसे नहीं होंगे। वह गरीबी से निकलेगा। चाहें फिर लता जी हों, किशोर कुमार जी, रफी जी या हम।
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