टेक्निकल सुविधा का रहा अभाव
काजोल कहती हैं, 'आज तो सिनेमा टेक्निकली बहुत एडवांस हो गया है। लेकिन मैंने जब फिल्मी करियर शुरू किया, तब ऐसा नहीं था। उस समय शूटिंग करना काफी मुश्किल होता था। खासकर अगर डबल रोल कर रहे हैं तो समस्या और भी बढ़ जाती थी। ऐसे में कलाकार को बहुत सोच-समझकर अभिनय करना होता था। एक सीमित समय में ही अपना शॉट देना होता था।' दरअसल, काजोल नब्बे और उससे पहले के दशक की बात कर रही हैं, जब चार मिनट का कैमरा रोल होता था, उसमें ही कलाकार को अपना सीन ओके करना होता। दोबारा अपना सीन करने की गुंजाइश बिल्कुल नहीं बचती थी।
काजोल की फिल्में दुश्मन और कुछ खट्टी कुछ मीठी
- फोटो : सोशल मीडिया
दो फिल्मों में किया डबल रोल
काजोल ने 'दुश्मन (1998)' और 'कुछ खट्टी कुछ मीठी (2001)' में डबल रोल किया। 'दुश्मन' एक मनोवैज्ञानिक थ्रिलर फिल्म थीं, इस फिल्म को दर्शकों ने काफी सराहा। इस फिल्म में काजोल का रोल काफी चैलेंजिंग था। उन्होंने फिल्म में दो बहनों का किरदार किया, जिसमें एक बहन का रेप और मर्डर हो जाने पर दूसरी बहन, कातिल से बदला लेती है। वहीं अगर 'कुछ खट्टी कुछ मीठी' की बात की जाए तो इसमें भी काजोल ने दो बहनों की भूमिका निभाई, लेकिन इसमें काजोल को कॉमेडी करने का अवसर मिला। फिल्म में काजोल की कॉमेडी टाइम काफी अच्छी रही। दर्शकों ने भी उन्हें कॉमिक रोल में काफी पसंद किया।
सिर्फ फिल्म को देती हैं अहमियत
काजोल एक मेहनती कलाकार हैं। वह जब सेट पर होती हैं तो सिर्फ फिल्म को अहमियत देती हैं। उन्हें फर्क नहीं पड़ता कि किसी फिल्म का निर्देशक नया है या नामी। यह नजरिया काजोल का अपने करियर की शुरुआत से रहा है। वह कहती हैं, 'मैंने तो सबसे ज्यादा नए निर्देशकों के साथ काम किया है। मैं हर निर्देशक को कहती हूं कि सबसे ज्यादा अहम हमारी फिल्म है। हमें सेट पर बस फिल्म को ही अहमियत देनी चाहिए।'