हिंदी सिनेमा में कई ऐसे कलाकार रहे हैं, जिन्होंने अपने अभिनय से दर्शकों का दिल जीता। वहीं, कुछ सितारे ऐसे भी रहे, जिन्होंने पर्दे पर आने के अंदाज को ही बदल दिया। शम्मी कपूर ऐसे ही अभिनेता थे। उनका डांस, उनका हेयरस्टाइल, उनका शरारती अंदाज और गानों पर खुलकर झूमने का तरीका उन्हें बाकी अभिनेताओं से अलग बनाता था।
1960 के दशक में उनकी लोकप्रियता का आलम यह था कि उनके गाने और डायलॉग लोगों की जुबान पर चढ़ जाते थे। उनकी फिल्म 'जंगली' का मशहूर अंदाज 'याहू!' आज भी हिंदी सिनेमा के यादगार पलों में गिना जाता है। 21 अक्टूबर को शम्मी कपूर की जयंती है। इस मौके पर आइए जानते हैं उनकी जिंदगी, फिल्मी सफर, प्यार, संघर्ष और उन दिलचस्प बातों के बारे में, जिन्होंने उन्हें हिंदी सिनेमा का एक खास सितारा बनाया।
शम्मी कपूर
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क्या था शम्मी कपूर का असली नाम?
शम्मी कपूर का जन्म 21 अक्टूबर, 1931 को मुंबई में हुआ था। उनका असली नाम शमशेर राज कपूर था। वह हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता पृथ्वीराज कपूर के बेटे और अभिनेता राज कपूर तथा शशि कपूर के भाई थे। इस तरह उनका परिवार पहले से ही अभिनय की दुनिया में अपनी मजबूत पहचान बना चुका था।
जूनियर कलाकार के तौर पर किया काम
हालांकि, फिल्मी परिवार से ताल्लुक रखने के बावजूद शम्मी कपूर के लिए सफलता का रास्ता आसान नहीं था। उन्होंने शुरुआत से ही अपनी अलग पहचान बनाने की कोशिश की। उनके पिता पृथ्वीराज कपूर रंगमंच के बड़े कलाकार थे।
शम्मी ने भी अपने करियर की शुरुआत फिल्मों से पहले थिएटर से की थी। वह अपने पिता की नाट्य संस्था पृथ्वी थिएटर से जुड़े और वहां जूनियर कलाकार के तौर पर काम किया। उस समय उन्हें हर महीने 50 रुपये वेतन मिलता था।
शम्मी कपूर
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18 फिल्मों के बाद बदली किस्मत
शम्मी कपूर ने साल 1953 में फिल्म 'जीवन ज्योति' से हिंदी सिनेमा में कदम रखा। उनकी शुरुआती फिल्मों को बॉक्स ऑफिस पर खास सफलता नहीं मिली। 'रेल का डिब्बा', 'लैला मजनू', 'ठोकर' और 'शमा परवाना' जैसी फिल्मों में काम करने के बावजूद वह उस मुकाम तक नहीं पहुंच पाए, जिसकी उम्मीद एक बड़े फिल्मी परिवार के सदस्य से की जा सकती थी।
शुरुआती असफलताओं ने उन्हें अपनी अभिनय शैली पर दोबारा विचार करने के लिए मजबूर किया। उस दौर में हिंदी फिल्मों के नायक अक्सर गंभीर, शांत और पारंपरिक अंदाज में नजर आते थे। शम्मी कपूर ने इस छवि से अलग रास्ता चुना। उन्होंने अपने किरदारों में मस्ती, शरारत, बेफिक्री और ऊर्जा को जगह दी।
फिर 1957 में उन्होंने फिल्म 'तुमसा नहीं देखा' में काम किया। इस फिल्म के बाद उन्हें कामयाबी मिलनी शुरू हो गई। उन्होंने लगभग 100 फिल्मों में काम किया। उनकी मशहूर फिल्मों में 'जंगली', 'प्रोफेसर', 'चाइना टाउन', 'दिल देके देखो', 'कश्मीर की कली', 'प्यार किया तो डरना क्या', 'तीसरी मंजिल', 'जानवर' और 'सिंगापुर', 'ब्रह्मचारी' शामिल हैं।
शम्मी कपूर
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आखिर क्यों कहा जाता था 'भारत का एल्विस प्रेस्ली'?
शम्मी कपूर को अक्सर 'भारत का एल्विस प्रेस्ली' कहा जाता था। इसकी वजह अमेरिकी गायक और अभिनेता एल्विस प्रेस्ली से प्रभावित उनकी ऊर्जा से भरपूर नृत्य शैली और रॉक-एंड-रोल जैसा अंदाज था।
शम्मी कपूर के अभिनय की खासियत यह थी कि वह गानों में केवल होंठ नहीं हिलाते थे, बल्कि पूरे शरीर और चेहरे के भावों से संगीत को महसूस कराते थे। वह कभी उछलते, कभी झूमते और कभी अपने बालों को खास अंदाज में पीछे करते नजर आते थे। उनकी हरकतें किरदार की भावनाओं का हिस्सा बन जाती थीं।
संगीत ने भी दिया अहम योगदान
शम्मी कपूर की शैली को और खास बनाने में संगीत का भी बड़ा योगदान था। मोहम्मद रफी ने उनकी फिल्मों के लिए कई यादगार गाने गाए। 'बदन पे सितारे', 'आजा आजा मैं हूं प्यार तेरा', 'आसमान से आया फरिश्ता' और 'चाहे कोई मुझे जंगली कहे' जैसे गीत शम्मी कपूर की पर्दे वाली छवि के साथ गहराई से जुड़ गए।
शम्मी कपूर को संगीत की अच्छी समझ थी। उनकी जीवनी में बताया गया है कि वह अपनी फिल्मों के संगीत में दिलचस्पी लेते थे और गानों की रिकॉर्डिंग पर भी ध्यान देते थे। इसीलिए उनकी अदाकारी और गीतों के बीच एक खास तालमेल दिखाई देता था।
शम्मी कपूर
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'याहू' कंपनी के असली मालिक?
शम्मी कपूर की फिल्म 'जंगली' के गाने की लाइन 'याहू... चाहे कोई मुझे जंगली कहे' इतनी फेमस हुई कि वह उनकी पहचान बन गई। वर्षों बाद जब 1990 के दशक में मशहूर इंटरनेट सर्च इंजन 'याहू' आया, तो भारत में कई लोग इसे शम्मी कपूर की कंपनी समझने लगे। एक बार उनके भतीजे रणधीर कपूर ने भी उनसे मजाक में पूछ लिया था, 'चाचा, आपने इतनी बड़ी इंटरनेट कंपनी खोल ली और हमें बताया तक नहीं?'
भारत में आने से पहले चलाया इंटरनेट
शम्मी कपूर के बारे में एक दिलचस्प बात यह है कि उन्हें कंप्यूटर और इंटरनेट में भी गहरी दिलचस्पी थी। वह उस दौर में इंटरनेट का इस्तेमाल करने लगे थे, जब भारत में यह आम लोगों के बीच बहुत ज्यादा लोकप्रिय नहीं हुआ था। शम्मी कपूर ने कपूर परिवार के लिए एक वेबसाइट भी बनाई थी। इस पर कपूर परिवार के बारे में जानकारी थी और यह वेबसाइट आज भी मौजूद है।
गीता बाली, शम्मी कपूर
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गीता बाली से प्यार और शादी
शम्मी कपूर की निजी जिंदगी भी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं थी। अभिनेत्री गीता बाली से उनकी मुलाकात फिल्मी दुनिया में काम करते हुए हुई। दोनों के बीच प्यार हुआ और 1955 में उन्होंने शादी कर ली। उस समय शम्मी कपूर का करियर अभी पूरी तरह स्थापित नहीं हुआ था, लेकिन दोनों ने साथ जिंदगी शुरू करने का फैसला किया।
गीता बाली अपने समय की जानी-मानी अभिनेत्री थीं। कपल के दो बच्चे हुए- बेटे आदित्य राज कपूर और बेटी कंचन कपूर। फिर 1965 में गीता बाली का निधन हो गया। यह शम्मी कपूर के जीवन का बेहद दुखद दौर था। इसके बाद उन्होंने 1969 में नीला देवी गोहिल से शादी की थी।
21 दिन नहीं पीते थे शराब
शम्मी कपूर के बारे में एक किस्सा बहुत मशहूर है, वह यह है कि उन्होंने अपनी पत्नी के निधन के बाद हर साल 1 जनवरी से लेकर 21 जनवरी तक कभी शराब नहीं पी। दरअसल, गीता 1 जनवरी को बीमार हुईं थीं और 21 जनवरी को उनका निधन हुआ था ऐसे में शम्मी ने अपनी जिंदगी में 1 जनवरी से लेकर 21 जनवरी के दरमियान कभी शराब नहीं पी।
शम्मी कपूर
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एक दिन में पी जाते थे 100-100 सिगरेट
शम्मी कपूर की दूसरी पत्नी नीला ने एक इंटरव्यू में बताया था कि जब शम्मी कपूर सिगरेट पीने पर आते थे तो वह किसी की नहीं सुनते थे। वह एक दिन में 100-100 सिगरेट पी जाते थे। सिगरेट पीने की वजह से साल 2003 में उनके फेफड़े खराब हुए। बता दें कि नीला के मुताबिक, फेफड़ों को ठीक करने के लिए उन्हें जो दवाएं दी गईं इससे उनके गुर्दे खराब हो गए। इसी के चलते अभिनेता का निधन हो गया।
'रॉकस्टार' बनी आखिरी फिल्म
साल 2011 में आई फिल्म ‘रॉकस्टार’ में शम्मी अपने भतीजे के बेटे रणबीर कपूर के साथ नजर आए। यह उनकी आखिरी फिल्म साबित हुई। फिल्म में उनकी मौजूदगी ने कपूर परिवार की अलग-अलग पीढ़ियों को एक साथ पर्दे पर देखने का मौका दिया।