संगीत की दुनिया में जब कभी भी गीतकारों की चर्चा होती है तो शंकर लाल केशरी लाल यानी शैलेंद्र का नाम बड़े अदब के साथ लिया जाता है। फुटपाथ पर सोने वाले, बेघर बेसहारा इंसान से लेकर दौलतमंद सब उनके दीवाने थे। शैलेंद्र ने अपने जीवन में ऐसे बेहतरीन गीत लिखे कि आज भी लोगों के जेहन में उनके लिखे गीतों की सुरीली तान सुनाई देती है। हिंदी सिनेमा के बड़े-बड़े दिग्गज गीतकार और गायक भी शैलेंद्र के कायल था, जिनमें से एक हैं जावेद अख्तर। बीते साल दुबई में स्क्रीनराइटर्स एसोसिएशन ने शैलेंद्र की 100वीं जयंती पर खास कार्यक्रम का आयोजन किया था, जहां शैलेंद्र के बारे में जावेद अख्तर कई बेहतरीन बातें बताईं। ऐसे में चलिए जानते हैं शैलेंद्र की 58वीं पुण्यतिथि पर जावेद अख्तर की जुबानी गीतकार की दिलचस्प कहानी...
'क्यों नाचे सपेरा' का नहीं कोई मुकाबला
जावेद अख्तर ने गीतकार शैलेंद्र की रचनाओं के बारे में बात करते हुए कहा था कि हिंदी फिल्मों में अब तक लाखों गीत लिखे जा चुके हैं, लेकिन शैलेंद्र के तीन शब्द 'क्यों नाचे सपेरा' का अभी तक कोई मुकाबला नहीं कर पाया है।
शैलेंद्र जैसे शब्द लिखना चाहते हैं जावेद
जावेद अख्तर ने कहा कि अगर में शैलेंद्र के शब्दों के बराबर कुछ लिख लूं तो मैं समझुंगा कि मेरा निर्वाण हो गया है।
गीतों पर लिखी जा सकती है पूरी किताब
जावेद अख्तर ने कहा कि 'क्यों नाचे सपेरा' इन तीन शब्दों गीतकार क्या पूछ रहा है, इसके बहुत गहरे मायने हैं। उन्होंने कहा कि सपेरा सांपों को नचाता है, और यहां खुद सपेरा नाच रहा है, इस पर कोई लेखक एक पूरी किताब लिख सकता है।
शैलेंद्र ही हैं असली गीतकार
जावेद अख्तर ने कहा कि एक बार मजरूह सुल्तानपुरी साहब ने एक बात कही थी कि हम लोग शायर हैं, फिल्मी गाने लिख लेते हैं, गीतकार तो सिर्फ एक है- शैलेंद्र।
शैलेंद्र ने सरल भाषा में लिखे गीत
जावेद अख्तर ने कहा कि साहित्य अकादमी ने शैलेंद्र पर मोनो ग्राफ प्रकाशित कर बड़ा काम किया है। जावेद अख्तर ने कहा कि शैलेंद्र ने सरल भाषा में गहरे और लोकप्रिय गीत लिखे। 'गाइड' फिल्म में शैलेंद्र का लिखा गीत 'वहां कौन है तेरा मुसाफिर जाएगा कहां' गीत इतिहास का बेमिसाल गीत है।
जनकवि थे शैलेंद्र
लेखक इंद्रजीत सिंह ने कहा कि शैलेंद्र एक जनकवि थे जिनके गीतों को देश की जनता ने अपने होठों पे सजाया और दिल में बसाया। उनकी कविताओं का रूसी भाषा में अनुवाद भी हुआ- 'आवारा हूं' तथा 'मेरा जूता है जापानी' ये गीत आज भी रूस में लोकप्रिय हैं।
शैलेंद्र पर लिखी पुस्तक
लेखक यादवेन्द्र ने कहा कि जिस तरह रामविलास शर्मा ने निराला के ऊपर 'निराला की साहित्य साधना' पुस्तक लिखी, वैसा ही काम इंद्रजीत सिंह ने शैलेंद्र पर किया है।
शैलेंद्र की परंपरा का विस्तार
प्रसिद्ध हास्य कवि और लेखक अशोक चक्रधर ने कहा कि जावेद अख्तर ने शैलेंद्र की परंपरा का विस्तार किया है। नरेश सक्सेना ने शैलेंद्र को लोक कवि बताया।