आपकी ऐसी कौन सी बात थी जो लोगों को नहीं पता थी और अब जाकर शेयर की?
बहुत कम लोगों को पता है कि मेरा पूरा नाम सानिया रईसा मिर्जा है। रईसा मेरी दादी का नाम था, मेरे पापा की मां का। यह मेरे लिए बहुत पर्सनल बात है जो मैंने पहले कभी नहीं बताई। यह नाम मेरे बर्थ सर्टिफिकेट और स्कूल रिकॉर्ड्स में है, बस कभी चर्चा में नहीं आया। और यही इस शो की खूबसूरती है। यहां माहौल इतना सहज होता है कि दिल की बातें खुद-ब-खुद निकल जाती हैं।
पॉडकास्ट करने का आइडिया कहां से आया?
यह आइडिया पूरी तरह मेरी सोच थी। मैंने किसी को देखकर नहीं किया। मैं हमेशा चीजें अपने तरीके से करना पसंद करती हूं। टेनिस, पिकलबॉल या पॉडकास्ट, मेरे लिए ये सब सीखने का नया तरीका है। जब मेहमान आते हैं तो कहते हैं, हमने कभी नहीं खेला। लेकिन जैसे ही खेल शुरू होता है, उन्हें इतना मजा आता है कि रुकना नहीं चाहते। यह शो मेरे लिए भी एक सीखने की प्रक्रिया है। हमारा मकसद हेडलाइन्स बनाना नहीं, बल्कि सच्ची बातचीत करना है।
सोशल मीडिया के साथ आपका रिश्ता कैसा है?
मैं सोशल मीडिया को बहुत हल्के में लेती हूं। सच कहूं तो एक चुटकी नमक के साथ, कभी-कभी पूरी मुट्ठी के साथ। यह आपके दिन को बना या बिगाड़ नहीं सकता। आप तारीफों को सिर पर और आलोचना को दिल पर नहीं ले सकते। जब मैं खेलती थी, तो कई बार बस लॉग आउट कर देती थी ताकि मन शांत रहे। सोशल मीडिया बस एक झलक है, असली जिंदगी नहीं।
आपके बारे में बहुत सी बातें सोशल मीडिया पर आईं। कभी गुस्सा आया या अब बस हंसी आती है?
अब तो बस हंसी आती है। कभी लिखा होता है कि मेरी शादी हो रही है, कभी कोई डेट निकल आती है ... और मैं उस वक्त हैदराबाद में घर पर बैठी होती हूं। एक बार तो मेरे पापा को भी कॉल्स आने लगी थीं, वो उस वक्त हज पर थे और बस हंस रहे थे। कभी फोटो देखकर कहा गया कि मैं मालदीव्स में हूं, जबकि मैंने शहर से बाहर कदम भी नहीं रखा। अब इन सब बातों को मैं मजाक में ही लेती हूं। यही सोशल मीडिया की बात है। कुछ भी कंटेंट बन सकता है, चाहे वो सच हो या नहीं।
अपने फैमिली मेंबर्स में से किसे अपने पॉडकास्ट पर बुलाना चाहेंगी और क्यों?
बिना सोचे मैं कहूंगी अपनी मां को। वो सबसे रियल इंसान हैं जिन्हें मैं जानती हूं। वो जो सोचती हैं, वही बोल देती हैं। कई बार हमें कहना पड़ता है, मां, कैमरा ऑन है, लेकिन वो रुकती नहीं। वो पूरी तरह बिना फिल्टर की हुई हैं और पॉडकास्ट के लिए परफेक्ट गेस्ट होंगी।
आप हमेशा बहुत साफ बोलती हैं। क्या लोगों को कभी आपकी सच्चाई बुरी लगती है?
हां, कई बार। जब आप अपनी शर्तों पर जीते हैं, तो कुछ लोगों को लगता है कि आपको नहीं पता आप क्या कर रहे हैं। कुछ लोग सच्चाई पसंद नहीं करते और यह ठीक है। सबको खुश नहीं किया जा सकता। मैंने यह बहुत पहले सीख लिया है। अगर आप सबको खुश करने लगेंगे, तो खुद थक जाएंगे।
सानिया मिर्जा और उनका बेटा
- फोटो : इंस्टाग्राम-@mirzasaniar
बतौर मां आप खुद को कैसी मानती हैं? अपने बेटे के साथ आपकी बॉन्डिंग कैसी है?
मैं खुद को बहुत प्रैक्टिकल मां मानती हूं। मैं सख्त नहीं हूं, लेकिन हां, मैं बहुत ज्यादा इनवॉल्व्ड रहती हूं। मेरा बेटा बहुत स्पोर्टी और कॉम्पिटिटिव है, शायद उसने यह मुझसे ही लिया है। वो लगभग सात साल का है और उसे हमेशा कुछ न कुछ करना होता है। हम दोनों ज्यादातर आउटडोर चीजें करते हैं - पैडल, बैकयार्ड में क्रिकेट, साइक्लिंग, स्विमिंग ...कुछ भी जो उसे एक्टिव रखे। हम दोनों के बीच बहुत गहरा कनेक्शन है क्योंकि हम साथ में बहुत समय बिताते हैं। लेकिन मैं उसे कभी आसान रास्ता नहीं देती।
अगर हम खेल रहे हैं, तो मैं उसे जीतने नहीं देती सिर्फ इसलिए कि वो बच्चा है। मैं चाहती हूं कि वो जाने कि जीतने के लिए मेहनत करनी पड़ती है। जब मैं उसे हराती हूं, तो वो मुझसे ट्रैश टॉक करता है। मैं हंसते हुए कहती हूं कि तू छह साल का नहीं, सोलह साल का है। वो बहुत स्मार्ट है, बहुत बोल्ड है और कभी-कभी तो मुझसे भी ज्यादा आत्मविश्वासी लगता है। वो मेरी मां और बहन के भी बहुत करीब है। हम सब मिलकर उसके आस-पास एक बहुत पॉजिटिव माहौल बनाते हैं।
सानिया जब कुछ नहीं कर रही होतीं, तब दिन कैसे बिताती हैं?
मुझे सबसे ज्यादा पसंद है कि मैं अपने बिस्तर पर रहूं, पैयजामा पहनूं और टीवी देखूं। सुबह देर तक सोना, चाय पीना, स्किनकेयर करना और दिन को धीरे शुरू करना। यही मेरे लिए सुकून है। फिर नेटफ्लिक्स देखते हुए कुछ जंक फूड खाना, जो आम दिनों में नहीं खाती। यही मेरा परफेक्ट रिलैक्स डे है।
आपने कैमरे के सामने पूरी दुनिया जीत ली। अब कभी कैमरे के पीछे से एक्टिंग करने का मन हुआ?
सच बताऊं तो नहीं। मुझे एक्टिंग में कोई दिलचस्पी नहीं है। एक्टर्स की बहुत इज्जत है, क्योंकि उन्हें स्क्रीन पर खुद को पूरी तरह खोलना पड़ता है। मैं थोड़ी शर्मीली हूं और मुझमें वो हिम्मत नहीं है। लेकिन मुझे फिल्में बहुत पसंद हैं, खासकर बॉलीवुड। मुझे वो फिल्में पसंद हैं जो आपको मुस्कुराकर बाहर भेजें। जिंदगी में दुख काफी हैं, तो मैं फील-गुड सिनेमा देखना पसंद करती हूं। ‘कुछ कुछ होता है’ मेरी फेवरेट फिल्म है, खुशियों भरी और दिल को छू जाने वाली।