जूही बब्बर से पूछा गया, 'आप जिस पैशन को जीती हैं, थिएटर को वह चैलेंजिंग हो रहा है। जो लोग इस तरफ आना चाहते हैं, आप क्या कहेंगी'?
इस पर जूही बब्बर ने कहा, 'लखनऊ मेरा ननिहाल है। यह शहर मुझे बेहद पसंद है। यहां के दर्शकों का शुक्रिया। जहां तक बात थिएटर के चैलेंजिंग होने की है तो बिल्कुल चैलेंजिंग है। लेकिन, जो लोग थिएटर कर रहे हैं, यह उन्हीं का फर्ज बनता है कि कुछ करें। आप अपनी कला के लिए क्या कर सकते हैं कि उसकी वैल्यू बढ़े। चाहें वह लोगों की नजर में आर्ट के रूप में हो या कमर्शियल, मैं दोनों तरह से बात करूंगी। आज नापने का तरीका कमर्शियल ज्यादा हो गया है कि क्या ये चीज हिट है? तभी लोग उसके पीछे जाते हैं। एक बात और है कि जैसे ही आप रंगमंच की बात करते हैं तो आप झोला पकड़े एक ऐसे इंसान की छवि बनाते हैं। वह भी थिएटर है, लेकिन वही थिएटर नहीं है। मेरी मां ने थिएटर कंपनी शुरू की थी तो लोग उम्मीद करते थे कि पूरी कंपनी ट्रेन से यात्रा करे। मां से कह देते थे कि आपको फ्लाइट टिकट दे देंगे। बेटे के जन्म के बाद मैंने ब्रेक लिया था, लेकिन जब कमबैक किया तो तीस-चालीस साल बाद भी मुझसे वही उम्मीद की गई कि जूही जी आप एयर टिकट से आ जाइए, बाकी ट्रेन से आ जाएंगे। मैंने मना कर दिया'।
अजहर इकबाल
- फोटो : अमर उजाला
शायर अजहर इकबाल ने भी संवाद में शिरकत की है। उन्होंने शुरुआत इस शेर से की,
'जिंदगी के कथानक बदल जाएंगे, रोम के सारे मानक बदल जाएंगे, दर्द के गीत बजते रहेंगे यूं ही, गाने वाले अचानक बदल जाएंगे'
उन्होंने अपने नाम में बदलाव का जिक्र भी किया। उनका नाम अजहरुद्दीन था। मगर अब यह अजहर इकबाल कैसे हुआ?
जूही बब्बर से पूछा गया, 'आपके पिता भी एक्टर, भाई भी एक्टर, मां भी एक्टर और पति भी एक्टर, क्या कोई ऐसा बोलता है कि सबसे अच्छा एक्टर कौन'?
इस पर जूही ने कहा, 'ऐसा कोई नहीं बोलता। लेकिन मेरे पूरे परिवार में अगर मेरा कोई क्रिटिक है, तो वो मेरे पापा हैं। अगर वो उस समय शहर में हैं, तो वह मेरे दर्शकों में बैठे होंगे। और कहते हैं कि आज आपने यह ठीक नहीं किया। आज तुम फिर रोने लगीं।
जूही से जब पूछा गया कि क्या आप अपने पिता को बताती हैं कि आपने इस फिल्म में अच्छा नहीं किया?
इस पर उन्होंने कहा, 'कभी नहीं, मेरे पेरेंट्स मेरे गुरू हैं'।
मम्मी और पापा में बेस्ट एक्टर कौन है?
इस पर जूही ने कहा, 'अगर गुरू की बात करूं तो मेरी गुरू मम्मी हैं। मैंने थिएटर उनसे सीखा है। नादिरा जी का जो योगदान है वो ये है कि उन्होंने आने वाली कितनी पीढ़ियों में रंगमंच को जिंदा रखा है'।
अजहर इकबाल
- फोटो : अमर उजाला
संवाद में अजहर इकबाल से फरमाइश की गई कि एक शेर सुना दीजिए, और उन्होंने सुनाया
‘मरुस्थल से यकायक जैसे जंगल हो गए हैं, तेरा सानिद्धय पाकर हम मुकम्मल हो गए हैं,
बदन के नक्शे पर हर तिल को सौ-सौ बार देखा, उसे इतना पढ़ा हमने कि पागल हो गए हैं’
एक बहुत अच्छी बात आपने लिखी है कि जिन्होंने आपको नाम दिया और जिस नाम को आपने बदला, उन्हें आपने नहीं बताया कि आपने जिंदगी को किस तरह बदल डाला?
इस पर अजहर इकबाल ने कहा, 'जो चीजें हम हासिल करते हैं और उनके एवज में जो चीजें हम खो देते हैं। आपने जो सवाल किया वह बहुत ही भावुक करने वाला है। जिंदगी की शुरुआत बहुत संघर्ष से हुई थी। वालिद की छोटी सी दुकान थी। तब हालात वैसे नहीं थे कि हम उन्हें अच्छी जिंदगी दे पाएं। कभी-कभी चीजों को समझने में हम देर कर देते हैं।
'कठिन थे रिश्ते, किसी से फरियाद कर न पाए
खुशी को आनंद और दुख को साद कर ना पाए
उनकी आवाज गूंजती है हर तरफ
पिता जीवित थे तो उनसे संवाद कर न पाए'
जूही बब्बर सोनी
- फोटो : अमर उजाला
कभी ऐसा हुआ है कि इंस्टाग्राम चला रही हों और क्राइम पेट्रोल की कोई रील सामने आ गई हो। पति देव (अनूप सोनी) सामने आ गए हों।
जूही बब्बर ने हंसते हुए कहा, 'जी, बिल्कुल। अनूप सोनी जी दिखाई देते हैं तो बहुत अच्छा लगता है। लेकिन एक चीज बताऊं 10 साल उन्होंने क्राइम पेट्रोल किया और बंदे ने मुस्कुराना बंद कर दिया। मैं बता दूं कि पांच साल अनूप जी ने क्राइम पेट्रोल नहीं किया, क्योंकि वह कुछ और कर रहे थे। लेकिन अब वे वापस क्राइम पेट्रोल की एंकरिंग करने वाले हैं'।
अजहर इकबाल ने मजाकिया अंदाज में किस्सा साझा किया
सारी जिंदगी डरते हुए गुजरी। थोड़े बड़े हुए तो टीचर से डरे, फिर बॉस से डरे। अब बीमारियों से डर लगता है और अब मौत से डर लगता है। फिर किसी ने सवाल किया कि सर आपने बीवी का जिक्र नहीं किया। उन्होंने जवाब दिया, 'डर के मारे'
'बात बनाओ, बात बनाती अच्छी लगती हो
बनाओ झूठी बातें अच्छी लगती हैं
सिगरेट बस यूं पीता हूं कि तुम मना करोगी
तुम समझाओ, तुम समझाती अच्छी लगती हो'
उन्होंने जूही बब्बर के लिए यह शेर साझा किया।
अजहर इकबाल ने फैंस के नाम एक शेर सुनाया
अबके फिर ईद कार्ड पर उसने लफ्ज एक बेध्यान रखा है
फिर मेरी ईद किरकिरी कर दी, फिर मुझे भाईजान कहा है
जूही बब्बर सोनी
- फोटो : अमर उजाला
150 रुपये का ओटीटी का सब्सक्रिप्शन उपलब्ध है। जितनी गालियां आ जाएं और जितने कपड़े कम हो जाएं, हिट होने की उतनी गारंटी मानी जाती है। अपना सिद्धांत बनाए रखना अच्छी बात है। लेकिन, ऐसे में वो लड़की जो सच में चप्पल पहने है, वह कैसे हौसला बनाए रखे? क्योंकि सस्ती लोकप्रियता तो दिख ही रही है...
जूही बब्बर ने कहा, 'सस्ती लोकप्रियता अपनी एक समय अवधि लेकर आती है। कितनी गालियां दे लोगे? एक वक्त बाद दर्शकों को वह नहीं देखना है। आखिर में वही चलेगा, जो लोगों के दिल को छुएगा। जिसमें कुछ बात थी। एक पतली लकीर है ये कि ओटीटी पर जहां ऐसा कंटेंट चल रहा है, वहां फैमिली वाले कंटेंट की भी डिमांड है। यह बैलेंस हमेशा रहेगा। यह सदियों से चला आ रहा है। आपको चुनना पड़ेगा। आपको क्या पसंद है। हमेशा ए ग्रेड, ब्री ग्रेड मिलेगा। आपको क्या पसंद है'?
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जूही बब्बर सोनी
- फोटो : अमर उजाला
थिएटर के दौरान दर्शकों का फोन बज जाए तो आप थिएटर छोड़ने की धमकी दे देती हैं?
इस पर जूही बब्बर ने कहा, 'मेरा फोकस प्रभावित करेंगे तो असर होता है। थिएटर एक्टर को नजर आता है कि मेरे दर्शक क्या कर रहे हैं। थिएटर और फिल्मों में अंतर है। आप बाहर के देशों में देखिए लोग सज-धज कर थिएटर देखने जाते हैं, क्योंकि वो लोग सम्मान करते हैं जावेद कला का। थिएटर का। मुझे नफरत है जब मैं देखती हूं कि लोग शॉर्टस पहनकर आ गए। मेरा बस चले तो उन्हें बैठने ही न दूं कि जाइए पहले आप ढंग के कपड़े पहनकर आइए। आर्मी के कुछ रूल होते हैं। इसी तरह आप अगर रंगमंच देखने जा रहे हैं, किसी संगीतकार को सुनने जा रहे हैं तो सलीके से जाइए'।
क्या कभी ऐसा हुआ है कि आपको परफॉर्मेंस के बाद पेमेंट नहीं हुई?
इस पर अजहर इकबाल ने कहा, 'दमान फारिशा का शेर है-
'कहानी खत्म हुई और ऐसे खत्म हुई कि लोग रोने लगे तालियां बजाते हुए'
कई बार रोना भी पड़ जाता है कहानी के बाद जब पेमेंट नहीं मिलता है तो। कई बार ऐसा हो जाता है।
जूही बब्बर से पूछा गया कि क्या आपके साथ भी ऐसा हुआ है कि परफॉर्मेंस के बाद भुगतान न हुआ हो?
जूही बब्बर ने कहा, 'खुदा का शुक्रिया अभी तक तो ऐसा नहीं हुआ। हम एडवांस पेमेंट ले लेते हैं'।
अजहर से पूछा गया, 'कुछ ऐसी लाइन सुनाइए जहां पहली लाइन उर्दू रही। दूसरी लाइन बहुत हिंदी रही है'।
इस पर अजहर इकबाल ने कहा, 'मैंने हिंदी और उर्दू को कभी दो जुबान नहीं समझा। मैंने दोनों को एक ही जुबान समझा है। चंद शेर सुनाता हूं'।
किसी के होने का एहसास होने लगता है
ये दर्द अब तो अनायास होने लगता है
कुछ एक दिन को बुरी लगती है ये तन्हाई
फिर उसके बाद तो अभ्यास होने लगता है
छोटे शहरों में आपने थिएटर पहुंचाया है। जहां थिएटर होते रहते हैं और जहां थिएटर आपने पहुंचाया, उसमें फर्क क्या है?
इस पर जूही ने कहा, 'मेरी गुरु और मेरी मम्मी नादिरा बब्बर जी की यह कोशिश रहती है कि हम देश में जहां-जहां जा सकें वहां जाएं। मेरे लिए वह काम किया है अमर उजाला ने। यह वह शहर हैं, जो कहीं महरूम रह जाते हैं। बड़े शो, बड़े ऑडिटोरियम आपको मिलेंगे मुंबई, दिल्ली और बंगलूरू में। मुरादाबाद, बरेली, मेरठ में नहीं मिलेंगे। कानपुर और लखनऊ में भी सुविधाएं कम हैं। लेकिन, मेरी बड़ी इच्छा थी कि मैं इन शहरों में जाऊं। यह काम मेरे लिए अमर उजाला ने किया है। हमने 'विद लव, आप की सैयारा' के साथ हिंदी थिएटर के रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। हम इस नाटक के 116 शो कर चुके हैं। यह इकलौता नाटक है जो बरेली मुरादाबाद में भी हुआ है और लंदन में भी हुआ है। बरेली में क्योंकि यह अमर उजाला का ही शो था, इतने प्यारे दर्शक थे। एक साहब थे, उनके पास एक लाइट थी, वह उन्होंने पिछले 60 साल से संभाल के रखी है। ये है हमारा भारत। हमारा देश'।
अजहर इकबाल ने एक और शेर सुनाया
कितना संगीन पाप कौन करे?
मेरे दुख पर विलाप कौन करे
चेतना मर चुकी है लोगों की
पाप पर पश्चाताप कौन करे?
और आखिर में जूही बब्बर ने अपने प्ले का एक डायलॉग सुनाया
'शायर भी क्या कमाल होते हैं, दूसरों के दिल की बात लिख देते हैं'।
जूही बब्बर ने कहा कि अगला मैं जो प्ले लेकर आना चाहूंगी वह लखनऊ की ही कहानी है। वह मेरे नाना-नानी की मोहब्बत की दास्तान है। आपके शहर की दास्तान है।