‘मुझे भी कभी बेचारा समझना चाहिए था’
अमर उजाला डिजिटल से बातचीत के दौरान, सैफ ने हंसते हुए कहा, ‘नहीं-नहीं। मेरी लाइफ में किसी ने मुझे बेचारे की नजर से नहीं देखा, जो शायद देखना चाहिए था। आई विश वो देखते। लेकिन लोगों की सोच ये है कि अगर ऐसे बैकग्राउंड का आदमी हो तो कभी बेचारा हो ही नहीं सकता। जो एक तरफ से सही है, तो हमें वो सिम्पैथी मिले ऐसी उम्मीद नहीं करनी चाहिए और हम करें भी नहीं।’
‘अमीर लोगों की भी स्ट्रगल होती है यार’
सैफ ने अपनी बात को मजाकिया अंदाज में आगे बढ़ाते हुए कहा, ‘सच्चाई ये है कि मुश्किलें हर किसी की लाइफ में आती हैं। कैसे उनका सामना करना है, कैसे स्ट्रगल करना है। अमीर लोगों की भी स्ट्रगल होती है यार, लेकिन उनको वो इतनी इंटरेस्टिंग नहीं होती या उन्हें शिकायत नहीं करनी चाहिए कि ओ हो, मैं कौन-सी गाड़ी में बैठा हूं...’ (हंसते हुए)
स्ट्रगल की कहानियां सैफ को भी करती हैं इंस्पायर
सैफ मानते हैं कि संघर्ष की कहानियां सुनना उन्हें भी अच्छा लगता है और ऐसी कहानियां उन्हें प्रेरित करती हैं। उन्होंने कहा, ‘दरअसल, हमारा साइकोलॉजी भी ऐसा होता है। स्ट्रगल की बातें सुनना अच्छा लगता है, चाहे वो कितना रिलेट कर पाए या न कर पाए। मुझे भी अच्छा लगता है।’
अपनी जिंदगी को लेकर सैफ कहते हैं कि उन्हें काफी कुछ मिला है और लोगों से प्यार और सम्मान भी मिलता है। ‘मुझे लगता है कि मुझे काफी कुछ मिला है और प्यार भी मिलता है और इज्जत भी मिलती है, तो मुझे नहीं लगता कि किसी चीज की ऐसी कमी है।’