सुपरस्टार रजनीकांत कई दशकों से बड़े पर्दे पर राज कर रहे हैं। उन्होंने साल 1975 में आई के. बालचंदर की फीचर फिल्म 'अपूर्वा रागंगल' से डेब्यू किया था। हालांकि, उनके चाहने वाले इस बात से वाकिफ होंगे कि अभिनेता फिल्मों में आने से पहले बैंगलोर में बस कंडक्टर के रूप में काम किया करते थे।
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अब हाल ही में 'थलाइवा' ने अपनी आने वाली फिल्म 'जेलर 2' के इवेंट पर इस बारे में बात की और बताया कि वह अभी भी एक्टिंग से ज्यादा उस नौकरी को पसंद करते हैं। सिर्फ इतना ही नहीं, दिग्गज अभिनेता ने यह भी बताया कि क्यों वह 75 साल की उम्र में भी लीड रोल कर रहे हैं।
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रजनीकांत
- फोटो : सोशल मीडिया
बस कंडक्टर की नौकरी को लेकर क्या बोले रजनीकांत?
'जेलर 2 सुपर शो' के दौरान रजनीकांत ने कहा, 'मुझे एक्टिंग पसंद है, बेशक। लेकिन मुझे बस कंडक्टर की नौकरी उससे कहीं ज्यादा पसंद थी। कंडक्टर के तौर पर बिताए गए वे पांच साल वाकई कमाल के थे। मुझे आज भी उन दिनों की याद आती है। इसलिए, दिल से मैं मानता हूं कि मैं एक कंडक्टर हूं और हमेशा रहूंगा।'
अभिनेता ने आगे कहा, 'सच कहूं तो मैं आज भी सुपरस्टारडम और इतनी शोहरत से खुद को जोड़ नहीं पाता। इसलिए मैं कभी-कभी बेंगलुरु जाता हूं। जब मैं वहां बस देखता हूं, तो मुझे खुशी होती है। जब मैं वह खाकी वर्दी देखता हूं, तो पता ही नहीं चलता कि आंखों में आंसू आ जाते हैं। मैं खुद को बस कंडक्टर ही मानता हूं।'
रजनीकांत
- फोटो : एक्स
क्यों रजनीकांत निभा रहे हैं लीड रोल?
रजनीकांत ने कहा, 'मैं अब 75 साल का हूं। कई लोग मुझसे पूछते हैं कि मैं आज भी फिल्मों में हीरो की भूमिका कैसे निभा रहा हूं। यह सब मेरे उन तमिल दर्शकों की वजह से है, जो मेरे लिए भगवान जैसे हैं और मेरी फिल्मों को देखने आते हैं। उनके बिना मैं कुछ भी नहीं हूं। मैं तो बस घास का एक तिनका हूं।'
रजनीकांत ने आगे कहा, 'आपके प्यार और समर्थन की वजह से बड़े प्रोडक्शन हाउस मेरे साथ काम करने के लिए आगे आ रहे हैं और नेल्सन जैसे निर्देशक मेरे साथ फिल्में बना रहे हैं। मुझे नहीं पता कि आपके इस प्यार का कर्ज कैसे चुकाऊं। मैं आपके पैरों में झुक कर प्रणाम करता हूं।'
रजनीकांत
- फोटो : एक्स (ट्विटर)
गुरु ने दी थी रजनीकांत को ये सीख
कार्यक्रम के दौरान रजनीकांत ने अपने गुरु और दिग्गज फिल्मकार के. बालाचंदर से मिली सीख को भी याद किया। उन्होंने बताया कि उनके गुरु ने उन्हें अपने किरदार को गहराई से समझने और उसमें पूरी तरह डूबकर अभिनय करने की सीख दी थी।
अभिनेता ने कहा, 'जब हम किसी फिल्म में काम करने के लिए हां कह देते हैं, तो हमें उसके बारे में सिर्फ शूटिंग के समय ही नहीं सोचना चाहिए, बल्कि हमेशा उसके बारे में सोचते रहना चाहिए। कमल हासन और मैं के. बालाचंदर स्कूल से आए हैं। जब हम अभिनय करते थे, तो वह बीच में कुछ नहीं कहते थे। लेकिन अगर हम कोई गलती करते, तो हमारे पास आकर पूछते थे कि बिना सोचे-समझे ऐसा क्यों किया। फिर वह हमें डांटते थे और समझाते थे कि जिस किरदार को हम निभा रहे हैं, उसके बारे में हमेशा सोचते रहना चाहिए। तभी हम उस किरदार में पूरी तरह ढल सकते हैं।'