राज खोसला किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं। उन्होंने अपनी फिल्मों के जरिए हिंदी फिल्म जगत को एक अलग पहचान दिलाई। राज खोसला को महिलाओं का निर्देशक भी कहा जाता है, क्योंकि उन्होंने अभिनेत्रियों को अपनी फिल्मों के जरिए हिंदी फिल्म जगत में अलग पहचान दिलाई या यूं कह सकते हैं कि उन्होंने उस दौर में अभिनेत्रियों को उनके सर्वश्रेष्ठ रूप में दिखाया। राज खोसला ने 1950 से लेकर 1980 तक के दशक तक हिंदी फिल्म उद्योग में निर्देशक, निर्माता और पटकथा लेखक के रूप में राज किया। जानिए उनसे जुड़ी कुछ दिलचस्प बातें...
नियो-नोयर की शुरुआत की
उन्हें भारतीय सिनेमा में 'नियो-नोयर' और भारतीय सिनेमा में स्टाइल लाने के लिए जाना जाता है। उन्होंने देव आनंद के साथ कई सफल फिल्में दी हैं। उन्होंने 'सीआईडी', 'वो कौन थी', 'मेरा साया', 'मेरा गांव मेरा देश', 'दोस्ताना' और 'मैं तुलसी तेरे आंगन की' जैसी हिट फिल्में बनाईं। इनमें से ज्यादातर फिल्मों के लिए राज खोसला को सर्वश्रेष्ठ फिल्म का फिल्मफेयर पुरस्कार भी मिला था।
राज खोसला ने की थी सस्पेंस फिल्मों की शुरुआत
निर्देशक राज खोसला को अपने दौर से अलग तरह की फिल्में बनाने के लिए जाना जाता है। साल 1964 में रिलीज हुई उनकी फिल्म 'वो कौन थी' ने उन्हें एक अलग पहचान दिलाई। इस फिल्म के बाद से ही उन्हें सस्पेंस फिल्म निर्देशक का टैग दिया गया। कहा जाता है कि इसी फिल्म से बॉलीवुड में सस्पेंस फिल्मों की शुरुआत हुई थी। राज खोसला ने फिल्मों में अभिनेत्रियों को दमदार रोल दिए। साथ ही उन्होंने हिंदी सिनेमा में सस्पेंस थ्रिलर फिल्मों की शुरुआत की थी। फिल्म 'वो कौन थी' में अभिनेत्री साधना ने अभिनय किया था। राज खोसला अपनी फिल्मों में हीरोइनों के साथ आइकॉनिक सीन के लिए भी जाने जाते हैं।
राज खोसला का जन्म पंजाब में 31 मई 1925 में हुआ था। वह हमेशा से ही एक शास्त्रीय गायक बनना चाहते थे, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। वह भारतीय सिनेमा के एक ऐसे निर्देशक बन गए, जिन्होंने इंडस्ट्री को कई सुपरहिट अभिनेत्रियां दीं। संघर्ष के दिनों में राज की दोस्ती अभिनेता देव आनंद से हुई थी। देव आनंद ही उनके लिए फिल्म इंडस्ट्री में आने का कारण बने। फिर राज और देव आनंद ने साथ में कई सुपहिट फिल्में दीं।