आखिर आजादी की असली परीक्षा कब होती है? जब कोई हमें रोक रहा हो या तब, जब कोई रोकने वाला ही न हो?
पर अभिनेता पंकज त्रिपाठी के पास इसका अपना जवाब है। बिहार के एक छोटे से गांव से निकलकर देश के अलग-अलग हिस्सों में काम करने और लोगों से मिलने वाले पंकज ने भारत को कई रंगों में देखा है। मगर उनके लिए इन सारे रंगों के पीछे एक चीज हमेशा एक जैसी रही- अपनापन।
अमर उजाला से एक्सक्लूसिव बातचीत में उन्होंने आजादी, बदलते भारत, गांवों से निकलते युवाओं और उस जिम्मेदारी की बात की, जो आजादी के साथ आती है।
पंकज त्रिपाठी
- फोटो : सोशल मीडिया
'एक चीज जो हम सबको जोड़ती है'
पंकज कहते हैं, 'मेरे हिसाब से पिछले 80 वर्षों में हमने सबसे अच्छी चीज अपनी विविधता और साथ रहने की भावना को बचाया है। भारत में इतनी भाषाएं हैं, इतनी संस्कृतियां हैं, इतने अलग-अलग तरह के लोग हैं, फिर भी एक भारतीय होने की भावना हम सबको जोड़ती है।
मैं बिहार के एक छोटे से गांव से आता हूं, वहां से निकलकर देश के अलग-अलग हिस्सों में काम करने और लोगों से मिलने का मौका मिला। हर जगह मुझे भारत का एक अलग रंग दिखाई दिया, लेकिन उस रंग के पीछे एक अपनापन हमेशा एक जैसा लगा।'
पंकज त्रिपाठी
- फोटो : इंस्टाग्राम
'कहीं हम समझना और सुनना कम न कर दें'
पंकज आगे कहते हैं, 'आज हम तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। तकनीक हमारे जीवन का बड़ा हिस्सा बन गई है। मगर इसी भागदौड़ में कहीं ऐसा न हो कि हम एक-दूसरे को समझना और सुनना कम कर दें। अब मुझे लगता है कि हमें अपनी संवेदनशीलता और इंसानियत को बचाना बहुत जरूरी है।
विकास बहुत जरूरी है, लेकिन विकास के साथ अगर संवेदना बची रहे, तो वही असली तरक्की है। मुझे लगता है कि आने वाली पीढ़ी के लिए हमें सिर्फ बेहतर सड़कें और बेहतर इमारतें नहीं, बल्कि एक बेहतर समाज भी छोड़कर जाना है।'
पंकज त्रिपाठी
- फोटो : इंस्टाग्राम@pankajtripathi
'जानता हूं अवसर मिलने का क्या मतलब होता है'
'मुझे आज के भारत की ऊर्जा और आत्मविश्वास पर बहुत गर्व होता है। खासकर हमारे युवाओं को देखकर। आज का युवा छोटे शहर या गांव से निकलकर दुनिया में अपनी पहचान बना रहा है। वह बड़े सपने देखने से डरता नहीं। मुझे यह बदलाव बहुत अच्छा लगता है, क्योंकि मैं खुद एक छोटे से गांव से आया हूं और जानता हूं कि अवसर मिलने का क्या मतलब होता है।'
पंकज त्रिपाठी
- फोटो : अमर उजाला
बच्चे के सपनों की सीमा तय ना करें
बातों ही बातों में पंकज ने कई मुद्दों पर बात की। उन्होंने कहा,
- ऐसा लगता है कि हमें अभी समान अवसर और शिक्षा के मामले में बहुत आगे जाना है। मेरे लिए तरक्की का मतलब तभी पूरा होगा जब एक छोटे से गांव में रहने वाले बच्चे को भी यह महसूस हो कि उसके सपनों की कोई सीमा नहीं है।
- अगर प्रतिभा सिर्फ इसलिए पीछे रह जाए क्योंकि उसके पास संसाधन नहीं हैं, तो यह हमारे लिए सोचने की बात है।
- मैं चाहता हूं कि आने वाले वर्षों में हमारा भारत ऐसा हो, जहां किसी बच्चे का भविष्य इस बात से तय न हो कि वह किस घर में, किस शहर में या किस गांव में पैदा हुआ है। उसे मेहनत करने का मौका मिले और अपनी जिंदगी चुनने की आजादी मिले। यह बदलाव मेरे लिए बहुत मायने रखता है।
पंकज त्रिपाठी
- फोटो : सोशल मीडिया
क्या है आजादी का मतलब?
'मेरे लिए आजादी का असली टेस्ट तब होता है जब आपको पूरी आजादी दी गई हो। जब कोई रोक रहा होता है, तब तो हमें पता होता है कि हमारे सामने एक दीवार है और हमें उससे लड़ना है। लेकिन जब कोई दीवार नहीं होती, कोई आपको नहीं रोक रहा होता, तब आप क्या चुनते हैं, वहीं आपकी असली आजादी और आपकी असली जिम्मेदारी सामने आती है।'
पंकज त्रिपाठी
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
‘आजादी सिर्फ यह नहीं कि जो चाहूं कर सकूं'
- मेरे लिए आजादी यह भी है कि मैं जो सही समझता हूं, उसकी जिम्मेदारी लेने की हिम्मत रखूं।
- मुझे अपने जीवन में भी यह महसूस हुआ है कि आजादी के साथ अनुशासन और जिम्मेदारी बहुत जरूरी हैं।
- हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने जिस आजादी के लिए संघर्ष किया, वह सिर्फ अपने लिए जीने की आजादी नहीं थी।
- वह आने वाली पीढ़ियों को बेहतर जीवन देने का सपना भी था।
- आज जब हमें इतनी आजादी मिली हुई है, तो हमें खुद से यह सवाल पूछना चाहिए कि हम इस आजादी का इस्तेमाल सिर्फ अपने लिए कर रहे हैं या अपने आसपास की दुनिया को थोड़ा बेहतर बनाने के लिए भी।