मेरी बहनें ही मेरी ताकत हैं
सान्विका आगे कहती हैं, “मेरी बहनें मेरी सबसे बड़ी ताकत हैं। वो मेरे लिए मां जैसी हैं। उनमें एक खास तरह की फाइटिंग स्पिरिट है। मानसिक और शारीरिक, दोनों रूप में। लोग अक्सर कहते थे कि बेटियां हैं, भाई नहीं है, तो घर कमजोर होगा। लेकिन मेरी बहन ने हर बार डटकर गलत के खिलाफ खड़ा होकर ये साबित किया कि हम कमजोर नहीं हैं।
मेरी बहनें वो भी समझ जाती हैं जो मैं कहती नहीं हूं। वो महसूस कर लेती हैं कि मैं क्या सोच रही हूं, क्या महसूस कर रही हूं। हमारे बीच कभी-कभी बहस होती है, लेकिन प्यार और भरोसा हमेशा बना रहता है। हर बार ये लगता है कि कोई तो है जो बिना कहे भी मुझे पूरी तरह समझता है।”
खुद से बनाती थी राखियां
अपने बचपन के दिनों को याद करते हुए सान्विका आगे कहती हैं, “मैं बगीचे से पत्ते और फूल लाकर ग्रीटिंग कार्ड्स बनाती थी। कभी-कभी राखियां भी खुद से बनाती थी। स्कूल के एसयूपीडब्ल्यू पीरियड में ये सब सिखाया जाता था। मैं वो राखियां मम्मी, पापा और बहनों को देती थी। सबके चेहरे पर मुस्कान देखकर बहुत अच्छा लगता था।”