'अरशद सर की कहानी मुझे हमेशा याद रही'
अरशद वारसी के साथ काम करने को लेकर जितेंद्र के मन में खास जुड़ाव पहले से था। उन्होंने बातचीत के दौरान कहा, 'शुरुआती दिनों में मैं बहुत सीरियस रहता था। मेरा एक दोस्त मुझे समझाता था कि अगर तू हर चीज में इतना सीरियस रहेगा तो मुश्किल होगी। उसने मुझे अरशद सर की एक कहानी सुनाई थी कि वो सेट पर बहुत मजाकिया रहते हैं, लेकिन जैसे ही इमोशनल सीन आता है, वो तुरंत स्विच कर जाते हैं। ये किस्सा उनकी फिल्म ‘इश्किया’ के वक्त का था। यह कहानी मेरे लिए बहुत प्रेरणादायक थी। मैंने इसे हमेशा याद रखा और अब उन्हीं के साथ काम करना मेरे लिए सौभाग्य की बात है।'
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'डिस्टर्बिंग सीन के बाद खुद को हल्का रखता हूं'
फिल्म के इमोशनल हिस्सों को लेकर जितेंद्र बताते हैं, ‘घर जाकर मैं सिर्फ स्क्रिप्ट पढ़ता था और कोशिश करता था कि जो डिस्टर्बिंग सीन किए हैं, उनके बारे में ज्यादा न सोचूं। वरना वो दिमाग पर भारी पड़ते हैं। मैं खुद को हल्का रखने की कोशिश करता हूं ताकि अगले दिन फिर फ्रेश होकर सेट पर जा सकूं। अभिनय करते हुए खुद को संभालना भी उतना ही जरूरी होता है जितना किरदार में उतरना।'
'मैं विराट कोहली की बायोपिक करना चाहूंगा'
बायोपिक के सवाल पर जितेंद्र मुस्कराते हुए कहते हैं, ‘मुझे क्रिकेट बहुत पसंद है। विराट कोहली की कहानी मुझे बेहद प्रेरणादायक लगती है। अगर कभी मौका मिला तो मैं जरूर उनका बायोपिक करना चाहूंगा। उनके जैसे खिलाड़ी का जीवन हर कलाकार के लिए प्रेरणा है।’
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'हर कहानी कुछ नया सिखाती है'
फिल्म ‘भागवत: चैप्टर वन : राक्षस’ उनके लिए एक नया अनुभव रही। जितेंद्र बताते हैं, ‘जब मुझे कहानी सुनाई गई, तो लगा कि इसमें कुछ अलग करने का मौका है। मैंने पूरी स्क्रिप्ट पढ़ी ताकि समझ सकूं कि मेरा किरदार दूसरों के साथ कैसे जुड़ता है। इस फिल्म ने मुझे बतौर कलाकार एक नई समझ दी है। हर कहानी कुछ नया सिखाती है और यही इस पेशे की खूबसूरती है।’
ओटीटी पर रिलीज हुई फिल्म
बता दें साइकोलॉजिकल क्राइम-थ्रिलर फिल्म 17 अक्तूबर को जी 5 पर रिलीज हुई है। इसकी कहानी कुछ इस तरह से है- छोटे कस्बे में लापता लड़कियों की गुत्थी सुलझाने आए इंस्पेक्टर विश्वास भागवत को तनातनी रेखा पर दोनों-परिस्तितियों का सामना करना पड़ता है; एक शांत दिखने वाला प्रोफेसर सामने आता है, लेकिन सब कुछ वैसा नहीं होता जैसा दिखता है।