जब आपने पहली बार फिल्म का टाइटल ‘एक चतुर नार’ सुना, आपका सबसे पहला रिएक्शन क्या था?
सच कहूं तो जैसे ही टाइटल सुना, मेरा आधा दिमाग वहीं अटक गया था। सबसे पहले मैं यही सोच रहा था कि ये टाइटल तो बड़ा अनोखा है। मैं सोचने लगा कि यह किस तरह की फिल्म होगी, कहानी क्या होगी। मुझे लगा कि टाइटल सुनते ही फिल्म का मूड समझ आ जाता है और मेरे मन में तुरंत एक छवि बन गई थी। सच कहूं तो मेरे लिए यह टाइटल इतना पसंद आया कि आधा फिल्म मैं उसी में जीने लगा था। मुझे लगा कि एक अच्छा टाइटल ऑडियंस को फिल्म के बारे में बहुत कुछ बता देता है और इसे सुनते ही लोग रिलेट कर सकते हैं।
टाइटल सुनते ही क्लासिक ‘पड़ोसन’ की यादें ताजा हो गईं। क्या इसके कारण टाइटल रिस्की लग रहा था, या आपको पूरा भरोसा था?
डर नहीं हुआ। बल्कि मुझे लगा कि इसमें बहुत अच्छी रिकॉल वैल्यू है। हमारी इंडियन ऑडियंस आज भी पुरानी फिल्मों से जुड़ी रहती है। चाहे जितनी भी Gen Z की बात करें, लोग पुरानी कहानियाँ, गीत और किरदार याद रखते हैं। 'पड़ोसन' जैसी फिल्म आज भी लोगों के जेहन में है और उसमें 'एक चतुर नार' गीत तो क्लासिक है। इसलिए नया रूप देने में डर नहीं था। ट्रेलर देखने के बाद लोग तुरंत रिलेट कर सकते हैं। हां, कभी-कभी हम टाइटल सिर्फ उत्सुकता बनाने के लिए रखते हैं, लेकिन यहां कहानी से जुड़ाव भी है। इसलिए मुझे लगा कि यह टाइटल फिल्म के लिए परफेक्ट है।
आपके लिए यह पहला कॉमिक रोल था। शूटिंग के दौरान क्या यह अनुभव आपको अलग और रोमांचक लगा?
बिल्कुल चुनौती भी थी, लेकिन मजेदार भी। पहली बार मुझे कॉमिक रोल निभाने का मौका मिला। इसमें थ्रिल का तड़का भी है। हर दिन शूट पर नया अनुभव होता था। मेरा किरदार अभिषेक और ममता के साथ बहुत ह्यूमरस बॉडिंग करता है। हम अपने हिसाब से भी कर सकते थे। उमेश सर (निर्देशक) ने बहुत शानदार माहौल दिया। मैं कहना चाहूंगा कि अगर कोई मुझसे पूछे कि कौन सी फिल्म दोबारा जीना चाहूंगा, तो मैं कहूंगा - ‘एक चतुर नार’। इसमें एक साथ पुरानी यादें और नया मजा है। मेरे लिए यह रोल एक अलग ही एक्सपीरियंस था।
कॉमिक सिचुएशंस को थ्रिल के साथ जोड़ना आसान नहीं होता। आपको और दिव्या को इस रोल में सबसे मजेदार और चुनौतीपूर्ण क्या लगा?
कॉमेडी सच में बहुत मुश्किल है। मैंने पहले 'गोलमाल' जैसी फिल्म में काम किया था, लेकिन उसमें मुझे विलेन का रोल मिला, इसलिए कॉमिक सिचुएशन एक्सप्लोर करने का मौका नहीं मिला। यहां मुझे पूरी तरह से कॉमिक सिचुएशंस में काम करने का मौका मिला। इसमें सिचुएशन को थ्रिल के साथ जोड़ते हुए हास्य पैदा करना होता है। इसमें हुनर और मेहनत दोनों लगते हैं। मुझे और दिव्या दोनों को बहुत मजा आया। साथ ही, इम्प्रूवाइज करने की पूरी आजादी मिली, जिससे शूटिंग का अनुभव और भी मजेदार हो गया।
आजकल सोशल मीडिया पर हर कोई जल्दी रिएक्ट करता है। कभी ऐसा लगा कि ट्रोलिंग या नेगेटिव कॉमेंट्स से आत्म-विश्वास डगमगा गया?
लोगों का काम ही है कहना। पहले मुझे लगता था कि मुझे हर कमेंट का जवाब देना चाहिए। ट्विटर के दिनों में एक आदमी रोज मुझे गालियां देता था। मैं नाराज हो जाता था। एक दिन मैंने जवाब दिया, 'आप गालियां क्यों देते हैं? अगर पसंद नहीं तो मत देखिए।' फिर जवाब आया - ‘सर मैं अटेंशन के लिए करता हूं, मैं आपका बड़ा फैन हूं।’ तब मुझे एहसास हुआ कि मैं खुद परेशान हो रहा था।
एक व्यक्ति की वजह से मेरी आत्म-विश्वास डगमगा रही थी। फिर मैंने तय किया कि मैं इसे गंभीरता से नहीं लूंगा। अब मैं सोशल मीडिया पर कम एक्टिव रहता हूँ। जो जरूरी हो वही साझा करता हूं, जैसे परिवार या काम। ट्रेंड्स का हिस्सा रहना है, लेकिन उसमें खोना नहीं है।
आगे क्या प्रोजेक्ट कर रहे हैं?
फिलहाल मैं एक पैन इंडिया एक्शन फिल्म में काम कर रहा हूं। अभी इसके बारे में ज्यादा नहीं बोल सकता। साउथ में भी बहुत काम कर रहा हूं। इसमें तीन भाषाएं बोलनी पड़ती हैं ... तेलुगु, तमिल, कन्नड़, हिंदी। थोड़ा मुश्किल है, लेकिन मजा आ रहा है। यह चुनौती भी है और सीखने का अवसर भी।
‘जुनून’ वेब सीरीज को लोगों ने काफी सराहा। क्या आप वेब में फिर लौटेंगे और किस तरह के प्रोजेक्ट्स में?
मैं इंतजार कर रहा हूं कि कोई अच्छा विषय लेकर आए। बहुत ऑफर आते हैं, मैं पढ़ता रहता हूं। 'जुनून' मुझे बहुत पसंद आई थी। उम्मीद है उसका पार्ट 2 भी बने। जैसे ही कोई अच्छा प्रोजेक्ट मिलेगा, आप मुझे वेब में भी देखेंगे। मुझे लगता है कि अच्छे कंटेंट के साथ काम करना चाहिए और अगर कहानी दमदार होगी, तो मैं जरूर जुड़ूंगा।