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Navjot Singh Sidhu: 'मेरे बाबा की आंखों में आंसू आ गए थे', अपने शुरुआती संघर्ष को लेकर बोले नवजोत सिंह सिद्धू

सार

Navjot Singh Sidhu Exclusive: पूर्व क्रिकेटर, राजनेता, कमेंटेटर और कई रियालिटी शोज में जज की भूमिका में नजर आ चुके नवजोत सिंह सिद्धू अब 'इंडियाज गॉट टैलेंट' के मंच पर लौट रहे हैं। वो इस रियलिटी शो में मलाइका अरोड़ा और शान के साथ जज की कुर्सी पर बैठे नजर अएंगे। पढ़िए अमर उजाला से हुई उनकी खास बातचीत के प्रमुख अंश…
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नवजोत सिंह - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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इंडियाज गॉट टैलेंट (आईजीटी) शो के बारे में बात करते हुए नवजोत सिंह सिद्धू ने अमर उजाला से बात करते हुए कहा- ‘यह शो लोगों के टैलेंट को गुमनामी से तराशकर दुनिया के सामने लाता है। यह प्रोत्साहन, हौसला और अवसर देता है, जिससे कलाकार अपने हुनर को पहचान और सम्मान के साथ दिखा पाते हैं। इस शो में टैलेंट का खजाना है। कई परफॉर्मेंस जादू जैसे हैं। कल ही 'हनुमान चालीसा' पर एक परफॉर्मेंस दिल में उतर गई। असम का ग्रुप भूपेन हजारिका की याद दिलाता है। राजस्थान का एक मदारी पारंपरिक कला लेकर हमारे मंच पर आया। एक युवा बच्ची ने योग का असली अर्थ समझाया। इस शो के जरिए छोटे बच्चे भी कमाल के टैलेंट के साथ मंच पर चमक रहे हैं। यही इसका मकसद भी है।’

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अपने संघर्ष और ठोकरों से सीख
इस मौके पर सिद्धू ने अपने जीवन संघर्ष की कहानी भी साझा की। उन्होंने बताया, 'मुझे ‘स्ट्रोकलेस वंडर’ कहकर दफना दिया गया था। मेरे बाबा की आंखों में आंसू आ गए थे। उनका बस एक सपना था कि उनका बेटा इंडिया के लिए क्रिकेट खेले। मैं फौज में जाना चाहता था, लेकिन मुझे नहीं जाने दिया गया क्योंकि घर में वो अकेले थे।’
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4 साल तक रंगीन कपड़े नहीं पहने
सिद्धू ने आगे कहा, ‘एक दिन अखबार में आर्टिकल छपा- ‘स्ट्रोकलेस वंडर’, जिसने इंडिया के लिए सिर्फ एक मैच खेला। मुझे टीम से निकाल दिया गया। अगले 4 साल तक मैंने रंगीन कपड़े नहीं पहने। उस आर्टिकल को अपने बिस्तर के पास चिपका कर सोता था। रोज सुबह 3 बजे उठकर पिच पर रोलर चलाता। हर दिन सवा सौ छक्के मारता जब तक हाथों से खून न निकले। रात को 12-1 बजे तक घर के पीछे बनाई गई पिच पर बच्चों को चॉकलेट देकर गेंदबाजी करवाता था।’

सिद्धू ने आगे कहा, ‘चार साल की मेहनत के बाद वर्ल्ड कप टीम के लिए मेरा चयन हुआ और पहले दो मैचों मेें मैंने खूब छक्के लगाए। जब हम शारजाह जा रहे थे, तो रवि शास्त्री ने अखबार फेंक कर मुझसे कहा - ‘यही वो अखबार है जिसने चार साल पहले लिखा था कि सिद्धू खत्म हो चुका है।’ उस समय उस अखबार के फ्रंट पेज पर छपा था - ‘नवजोत सिंह सिद्धू : स्ट्रोकलेस वंडर से स्ट्रोक्स थंडर तक’..। मेरी इस कहानी से यही सबक है कि इंसान अपना मुकद्दर खुद बनाता है।’



मलाइका शो की सूत्रधार हैं
आगे शो के बारे में बात करते हुए सिद्धू ने अपने साथी जजों के साथ का अनुभव साझा किया। उन्होंने कहा, ‘हर जज से मैंने कुछ न कुछ सीखा है। मलाइका शो की सूत्रधार हैं - असल में शो की जान हैं। उनका अनुशासन, उनका गरिमा से भरा अंदाज - ये सब देखने लायक है। वहीं, शान से मैंने सीखा कि जिंदगी में गुस्सा अनिवार्य नहीं है। उसका हमेशा हंसता हुआ चेहरा और खुशमिजाज स्वभाव बड़ा सुकून देता है।’

आईजीटी वर्सेस कपिल शर्मा शो
इस मुलाकात में सिद्धू ने आईजीटी और अपनी पिछली टेलीविजन के सफर का अंतर स्पष्ट किया। उन्होंने कहा, ‘आईजीटी में मुझे मेरी असली पर्सनालिटी दिखाने का मौका मिलता है। यह शो सिर्फ हंसी-मजाक नहीं, बल्कि सीरियस नोट्स और इनोवेशन भी लेकर आता है। इसके मंच पर अनिश्चितता है - आप नहीं जानते कि कौन सा टैलेंट आपको चौंका देगा। यही इसकी खूबसूरती है।

वहीं जब मैं अपने पुराने अनुभवों की बात करता हूं, तो याद आता है कि मैंने कपिल शर्मा को उनके शुरुआती सीजन में डिस्कवर किया था। तब से उनकी जर्नी संघर्ष और बेहतर करने का प्रतीक रही है। कपिल के शो में एडिटिंग के कारण केवल हंसी का हिस्सा दिखाई देता था, लेकिन आईजीटी में मुझे हर पहलू दिखाने का अवसर मिलता है - हंसी, गंभीरता और रियल इंस्पिरेशन। यही फर्क है और यही कारण है कि इस मंच पर कलाकारों का टैलेंट और व्यक्तित्व दोनों निखरकर सामने आता है।  

यहां देखें पूरा वीडियो

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