कृष्णदेव याज्ञनिक की गुजराती फिल्म 'वश लेवल 2' को मिले दो नेशनल अवॉर्ड
- फोटो : अमर उजाला
बॉलीवुड से दूरी की क्या वजह रही है?
कृष्णदेव याग्निक 15 साल से गुजराती फिल्मों में सक्रिय हैं, वह बतौर निर्देशक और स्क्रीनराइटर काम कर रहे हैं। लेकिन बॉलीवुड के प्रोजेक्ट्स की ओर क्यों नहीं बढ़े? इस पर वह कहते हैं, ‘मैंने सुना है कि वहां (बॉलीवुड में) बहुत इंतजार करना पड़ता है। मैं मानता हूं कि स्क्रिप्ट पास होने का इंतजार करना, एक्टर्स की डेट्स का इंतजार करना होता है। लेकिन यह सब मैं ज्यादा देर तक नहीं कर सकता। फिल्म उसी समय बननी चाहिए जब आइडिया ताजा हो और टीम तैयार हो। अगर मैं कई साल तक इंतजार करूं तो कहानी का जोश खत्म हो जाता है। इसलिए मैं ऐसे लोगों के साथ काम करना चाहता हूं जो कमिटेड हों और साथ मिलकर तुरंत आगे बढ़ सकें।'
रीजनल सिनेमा में क्या बात खास लगती है
कृष्णदेव याग्निक को अपनी गुजराती सिनेमा से लगाव है। वह कहते हैं, 'रीजनल फिल्मों में मुझे असली आजादी मिलती है। यहां अप्रूवल का इंतजार नहीं करना पड़ता। अगर कहानी तैयार है तो मैं तुरंत शूटिंग शुरू कर सकता हूं। मुझे अपने टर्म्स पर काम करने का मौका मिलता है और मैं मीनिंगफुल कहानी पर फोकस कर पाता हूं।'
कृष्णदेव याज्ञनिक की गुजराती फिल्म 'वश लेवल 2' को मिले दो नेशनल अवॉर्ड
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स्टार्स से ज्यादा कहानी पर भरोसा करते हैं कृष्णदेव याग्निक
कृष्णदेव याग्निक बतौर निर्देशक कहानी को ज्यादा महत्व देते हैं। वह कहते हैं, 'लोग पूछते हैं कि मैं बड़े स्टार्स के पास क्यों नहीं जाता। आपको बताऊं मैं सिर्फ बड़े नाम के कारण किसी के पीछे नहीं भागता। मेरा मानना है कि अगर कहानी अच्छी है तो दर्शक खुद उससे जुड़ते हैं। मैं किसी के समय का इंतजार कर अपने आइडिया को खराब नहीं करना चाहता। हमें समझना होगा कि सिनेमा असली कहानियों के बारे में है।'
भाषा को भी बाधा की तरह नहीं देखते निर्देशक कृष्णदेव
आखिर में कृष्णदेव याग्निक कहते हैं, ‘लोग सोचते हैं कि रिजनल फिल्में सिर्फ उस भाषा तक सीमित रहती हैं। लेकिन ऐसा नहीं है। अच्छी कहानी, मजबूत इमोशंस और दमदार किरदार, ये हर जगह पसंद किए जाते हैं। उदाहरण के तौर पर फिल्म 'शैतान' ने हिंदी बोलने वाले लोगों के बीच शानदार प्रदर्शन किया। इससे साफ है कि कहानी अगर दिल को छूती है तो दर्शक उससे जुड़ते हैं, चाहे भाषा या जगह कोई भी हो।'
बताते चलें कि साल 2023 में फिल्म 'वश' को सर्वश्रेष्ठ गुजराती फिल्म के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार मिला। इसकी हिंदी रीमेक 'शैतान' को बॉक्स ऑफिस पर अच्छा रिस्पॉन्स मिला।