नसीरुद्दीन शाह…एक ऐसा नाम जो जब भी सिनेमा के प्रभावशाली किरदारों की बात होती है, हमेशा जेहन में आता है। उनका जन्म 20 जुलाई 1950 को उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में हुआ था। अपने लंबे करियर में उन्होंने जिस भी फिल्म में काम किया, उसमें अपने योगदान को हमेशा के लिए यादगार बना दिया। चलिए सबसे पहले आपको बताते हैं उनके दमदार किरदारों के बारे में जिन्होंने दर्शकों के दिलों में गहरी छाप छोड़ी।
विष्णु
नसीरुद्दीन शाह ने साल 1980 में आई फिल्म 'स्पर्श' में एक दृष्टिहीन स्कूल प्रिंसिपल विष्णु की भूमिका निभाई, जो आत्मसम्मान और प्रेम की कश्मकश में उलझा रहता है। ये फिल्म साई परांजपे ने डायरेक्ट की थी और नेशनल फिल्म डेवलपमेंट कॉरपोरेशन ने प्रोड्यूस की थी।
निशीथ
1983 में आई 'मासूम' में नसीरुद्दीन शाह ने एक आम आदमी की भूमिका निभाई जिसे अचानक पता चलता है कि उसका एक नाजायज बेटा है। इस फिल्म को शेखर कपूर ने निर्देशित किया और देवकी बोस द्वारा प्रोड्यूस किया गया था।
नारायण
1984 में फिल्म ‘पार’ में उन्होंने एक गरीब मजदूर का रोल निभाया जो समाज और सत्ता से टकराता है। यह फिल्म गौतम घोष ने डायरेक्ट की थी और NFDC ने प्रोड्यूस किया था। इस किरदार के लिए शाह को नेशनल अवॉर्ड मिला था।
राजाराम
1987 में आई फिल्म 'मिर्च मसाला' में उन्होंने एक दबे-कुचले चौकीदार की भूमिका निभाई जो जुल्म के खिलाफ खड़ा होता है। इस फिल्म को केतन मेहता ने निर्देशित और NFDC ने प्रोड्यूस किया था।
अमरसिंह
1993 में आई फिल्म 'मांडवी'। राजस्थान के बैकड्रॉप पर आधारित इस फिल्म में नसीरुद्दीन शाह ने एक बूढ़े स्वतंत्रता सेनानी अमरसिंह का किरदार निभाया, जो मॉडर्न राजनीति से जूझता है। इसे प्रकाश झा ने डायरेक्ट किया और खुद ही प्रोड्यूस भी किया।
कैप्टन
साल 1999 में आई फिल्म 'सरफरोश' एक्शन-थ्रिलर थी। इसमें नसीरुद्दीन शाह ने पाकिस्तानी जासूस गुलफाम हसन उर्फ 'कैप्टन' का रोल निभाया, जो अपनी दमदार अदाकारी से दर्शकों के दिलों में उतर जाता है। जॉन मैथ्यू मथान ने फिल्म डायरेक्ट की और टाइगर प्रोडक्शन ने इसे प्रोड्यूस किया।
मोहर अली
1997 की फिल्म ‘गोदाम’ में नसीरुद्दीन शाह ने एक ऐसे मजदूर का किरदार निभाया जो व्यवस्था से लड़ते हुए अपने आत्मसम्मान के लिए खड़ा होता है। यह फिल्म गोविंद निहलानी ने डायरेक्ट और NFDC ने प्रोड्यूस की थी।
गुरुजी
फिल्म 'फिराक' जो 2008 में आई थी, उसमें नसीरुद्दीन ने एक उदार मुस्लिम बुज़ुर्ग 'गुरुजी' का किरदार निभाया, जो सांप्रदायिक दंगों के बाद समाज में मेल-जोल की वकालत करता है। नंदिता दास की इस डायरेक्टोरियल डेब्यू फिल्म को शिल्पा नाम्बियर और नंदिता ने मिलकर प्रोड्यूस किया।
श्रीकांत वर्मा
2008 की फिल्म 'आमिर' में एक रहस्यमयी आतंकवादी कनेक्शन के सूत्रधार के रूप में नसीर का किरदार बहुत प्रभावशाली था। फिल्म को राजकुमार गुप्ता ने डायरेक्ट किया और UTV स्पॉटबॉय ने प्रोड्यूस किया।
अब्बा
साल 2005 में 'इकबाल' फिल्म में भी उनके किरदार को काफी पसंद किया गया। इस मोटिवेशनल ड्रामा में नसीरुद्दीन शाह ने एक शराबी कोच का किरदार निभाया जो एक गूंगे-बहरों लड़के को क्रिकेटर बनाता है। नागेश कुकुनूर द्वारा निर्देशित इस फिल्म को सुभाष घई की मुक्ता आर्ट्स ने प्रोड्यूस किया था।
इन सभी किरदारों ने नसीरुद्दीन को सफलता की बुलंदियों पर पहुंचा दिया। उनके सिनेमा को इसी योगदान के चलते उन्हें कई अवॉर्ड्स से नवाजा गया। उनके पुरस्कारों और सम्मान पर एक नजर डालते हैं।
नसीरुद्दीन शाह और उनके करियर से जुड़ी कुछ अहम बातें भी आपको बताते हैं।
नसीरुद्दीन शाह का शुरुआती करियर
साल 1967 में 'अमन' फिल्म में महज 7.5 रुपये की फीस के साथ उन्होंने अपने करियर की शुरुआत की थी। हालांकि उन्हें असली पहचान 1973 में श्याम बेनेगल की फिल्म 'निशांत' से मिली और फिर जो सिलसिला चला, उसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।
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