अंकुश (1986)
शुरुआत उनकी डेब्यू फिल्म से ही करते हैं। ‘अंकुश’ अपने समय की सबसे बेहतरीन फिल्मों में से एक मानी जाती है। फिल्म की कहानी चार युवा लड़को के इर्द-गिर्द घूमती है, जो पढ़-लिखकर नौकरी करना चाहते हैं, लेकिन उनकी एक साथी के साथ गैंगरेप होता है और आरोपी के खिलाफ सबूत ना मिलने की वजह से वह छूट जाता है। इस बात से नाराज वह लड़की आत्महत्या कर लेती है। इसके बाद उसके चारो दोस्त बदला लेने की ठान लेते हैं।
‘अंकुश’ बनाने के लिए गहने और घर तक बिक गए
फिल्म इंडस्ट्री में काम करते हुए चंद्रा ने अच्छी-खासी कमाई कर ली थी। वह मुंबई में एक घर ले चुके थे। अंत में उन्होंने गुलजार की फिल्म 'मेरे अपने' से प्रभावित होकर फिल्म बनाने का फैसला किया। उन्होंने इस फिल्म को खुद प्रोड्यूस किया। इसके दो कारण बताए जाते हैं पहला कि वह नहीं चाहते थे कि उनकी क्रिएटिविटी के साथ कोई समझौता हो और दूसरा कि उन्हें इस फिल्म के लिए कोई प्रोड्यूसर ही नहीं मिल रहा था।
फिल्म बनाने के लिए उन्होंने अपना घर बेच दिया, लेकिन यह पैसे भी काफी नहीं थे। और पैसों की जरूरत पड़ने पर उन्होंने अपनी पत्नी और बहन के गहने बेचकर पैसे फिल्म में लगा दिए। कम बजट की फिल्म होने की वजह से उन्होंने किसी भी एक्टर को 10 हजार रुपये से ज्यादा फीस नहीं देने की सोची, लेकिन इतने कम पैसे में कोई बड़ा स्टार नहीं आता। तब उन्होंने ‘गमन’ से डेब्यू कर चुके नाना पाटेकर को लीड रोल के लिए चुना।
इस फिल्म में नाना पाटेकर ने भी अपने पैसे लगाए थे। उन्होंने अपना घर गिरवी रखकर एन चंद्रा की मदद की थी। फिल्म में काम करने की फीस भी उन्होंने पूरी नहीं ली थी। फिल्म की सफलता के बाद एन चंद्रा ने नाना पाटेकर के पैसे भी लौटाए और उन्हें एक स्कूटर गिफ्ट में दिया। 12 लाख के बजट में बनी यह फिल्म जब रिलीज हुई तो दो-दो हफ्ते हाउसफुल रही। इसने 95 लाख रुपये का कारोबार किया।
फिल्म का गीत बना स्कूलों की प्रार्थना
अंकुश फिल्म का गीत ‘इतनी शक्ति हमें देना दाता’ इतना प्रभावशाली रहा कि यह स्कूलों की प्रार्थना सभा में गाया जाने लगा। यह फिल्म ईश्वर में श्रद्धा और विश्वास को प्रदर्शित करता है। इसके बोल अभिलाष ने लिखे थे।
प्रतिघात (1987)
अंकुश के बाद एन चंद्रा ने ‘प्रतिघात’ बनाई। यह फिल्म राजनीति और क्राइम को बड़े पर्दे पर लेकर आई। इस फिल्म की कहानी में भी रेप का मुद्दा था और जिस अंदाज में उसका बदला लिया गया, वो दर्शकों के लिए कभी ना भूलने वाला बना। इस फिल्म में सुजाता मेहता ने मुख्य भूमिका निभाई। फिल्म में नाना पाटेकर को भी अहम किरदार में रखा गया। उनकी यह फिल्म भी हिट रही।
श्रीदेवी और जया प्रदा को किया रिजेक्ट
श्रीदेवी और जयाप्रदा जैसी दिग्गज अभिनेत्रियों ने मुख्य भूमिका के लिए एन. चंद्रा को प्रस्ताव भेजा था। वे फिल्म करना चाहती थीं, लेकिन चंद्रा ऐसी अभिनेत्री चाहते थे जिसकी कोई तय छवि न हो।
तेजाब
‘अंकुश’ और ‘प्रतिघात’ के हिट होने के बाद एन चंद्रा ने भारतीय सिनेमा की आइकॉनिक फिल्मों में से एक बनाई। वो फिल्म है ‘तेजाब’, इस फिल्म में उन्होंने माधुरी दीक्षित को कास्ट किया, जो अपना करियर बनाने के लिए जूझ रही थीं। ‘दयावान’ के बाद उनकी कोई फिल्म कुछ खास प्रदर्शन नहीं कर पाई थी। इस फिल्म में माधुरी ने मजबूरी में बनी डांसर का किरदार निभाया, जो एक गैंगस्टर के डर में जीती है। इस फिल्म के गाने 'एक दो तीन' पर माधुरी के प्रदर्शन ने उन्हें हिंदी सिनेमा की सबसे टॉप एक्ट्रेस बना दिया। इस फिल्म के लिए अनिल कपूर को उनका पहला ‘बेस्ट एक्टर’ का फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला।
धर्मेंद्र को किया कॉस्ट तो नाराज हुए अनिल कपूर
कहा जाता है कि ‘तेजाब’ में धर्मेंद्र बीच में ही साइन कर लिया गया था। इससे अनिल कपूर नाराज हो गए और उन्होंने डेट्स देना बंद कर दिया। उन्हें पता था कि एक बार धर्मेंद्र जैसे सीनियर स्टार को साइन कर लिया जाए तो फिल्म का पूरा फोकस उन्हीं पर होगा। चंकी पांडे को भी पता था कि एक बार धर्मेंद्र फिल्म में आ गए तो उनके रोल के लिए कुछ नहीं बचेगा। उन्होंने एन. चंद्रा की नई कास्टिंग पर अपनी नाराजगी जताई। आखिरकार चंद्रा ने इस रोल के लिए सुरेश ओबेरॉय को साइन किया। उन्होंने धर्मेंद्र को समझाया कि उनका स्टार स्टेटस रोल के लिए ठीक नहीं है।
माधुरी की जगह ये हीरोइन हुई थी कास्ट
मुख्य भूमिका के लिए माधुरी दीक्षित से पहले मीनाक्षी शेषाद्रि को लीड रोल के लिए चुना गया था, लेकिन पेमेंट और तारीख संबंधी समस्याओं के कारण उनकी जगह माधुरी दीक्षित को लिया गया। यह फिल्म रिलीज के बाद 50 हफ्तों तक सिनेमाघरों में लगी रही।
स्टाइल (2001)
एन चंद्रा ने गंभीर विषयों को छोड़कर कॉमेडी और कॉलेज लाइफ को दिखाने की शुरुआत स्टाइल फिल्म से की। यह फिल्म पूरी तरह से युवाओं के लिए बनी थी। इससे पहले हिंदी सिनेमा में गंभीर विषयों पर ही फिल्में बनती आई थीं। खुद एन चंद्रा सामाजिक मुद्दों पर फिल्में बनाते आए थे, लेकिन ‘स्टाइल’ के बाद से कॉलेज लाइफ और युवाओं की पसंद को ध्यान में रखते हुए फिल्मों का बनाना शुरू हुआ। स्टाइल के बाद उन्होंने इसका सीक्वल ‘एक्सक्यूज मी’ बनाई। हालांकि, यह फिल्म उतना अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाई।
शरमन जोशी और साहिल बने स्टार
शरमन जोशी और साहिल खान की यह पहली फिल्म थी। इस फिल्म ने दोनों को स्टार बना दिया। फिल्म रिलीज के बाद शरमन जोशी और साहिल खान माटुंगा के सिटीलाइट सिनेमा गए जहां उन्हें देखने के लिए भारी भीड़ उमड़ी जिसकी उन्हें उम्मीद नहीं थी।