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Vivek Agnihotri: ‘मेरी फिल्में सवाल उठाती हैं, विरोध जताती हैं’, पहलगाम हमले के बाद बोले विवेक अग्निहोत्री

Thu, 24 Apr 2025 12:01 PM IST
आराध्य त्रिपाठी एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला

सार

Vivek Agnihotri On Pahalgam Terror Attack: पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद विवेक अग्निहोत्री ने सांप्रदायिक हिंसा को लेकर नाराजगी जताई है। उन्होंने अपनी फिल्मों को कहानियों से बढ़कर बताया है। जानिए निर्देशक ने क्या कुछ कहा है।
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विवेक अग्निहोत्री - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद से पूरे देश में आक्रोश है और घटना पर दुख जताया जा रहा है। बॉलीवुड ने भी इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए इस पर शोक व्यक्त किया है। अब फिल्म निर्माता-निर्देशक विवेक अग्निहोत्री ने इस आतंकी हमले के बाद सांप्रदायिक हिंसा की मानवीय कीमत पर एक लंबा नोट सोशल मीडिया पर साझा किया है। साथ ही उन्होंने कहा कि उनकी फिल्में सिर्फ मनोरंजन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उससे काफी बढ़कर हैं।

सांप्रदायिक हिंसा लाशों से काफी कुछ ज्यादा छोड़ जाती है

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फिल्ममेकर विवेक अग्निहोत्री ने अपने इंस्टाग्राम पर एक स्टोरी साझा की है। इस स्टोरी में उन्होंने इस हादसे के बाद सांप्रदायिक हिंसा को लेकर हुए खालीपन पर लिखा, “सांप्रदायिक हिंसा सिर्फ लाशों से ज्यादा कुछ छोड़ जाती है। यह एक खालीपन छोड़ जाती है। घर राख में बदल गए, जिंदगियां बिखर गईं, परिवार फिर कभी एक नहीं हो पाए। दर्द सिर्फ शारीरिक नहीं है, यह एक धीमा, दर्दनाक दुख है। एक मां अपने बेटे की तलाश कर रही है। एक आदमी जिसके हाथ कभी प्रार्थना करते थे, अब गुस्से से कांप रहा है। यह धार्मिक कट्टरवाद की मानवीय कीमत है, जहां विश्वास और आस्था हथियार बन जाती है और मतभेद मौत की सजा बन जाते हैं।”

‘मेरी फिल्में मनोरंजन से कहीं बढ़कर हैं’

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फिल्म निर्माता ने आगे लिखा, “मैं अपनी कला का इस्तेमाल जागरुकता फैलाने के लिए करता हूं। क्योंकि कला सत्य से परेशान नहीं होती। मेरी फिल्में मनोरंजन से कहीं बढ़कर हैं। वे असहज सच्चाइयों का सामना करने, महत्वपूर्ण सवाल उठाने और दर्शकों को करुणा और मानवता की कमी की याद दिलाने का एक तरीका हैं। मेरी फिल्में सिर्फ कहानियां नहीं हैं, वे ऐसी जगहें हैं जहां अनुपस्थिति उपस्थिति से ज्यादा जोर से बोलती है।
दया, तर्क और साधारण मानवता की गैरमौजूदगी है। मैं उस अनुपस्थिति से फिल्में बनाता हूं। चौंकाने के लिए नहीं, बल्कि याद दिलाने के लिए। हमने जो खोया है, उसे आईना दिखाने के लिए। ये आरामदायक फिल्में नहीं हैं। ये ऐसी नहीं हैं। वे ऐसे सवाल उठाती हैं जिन्हें हम टालना चाहते हैं। हम क्या बन रहे हैं? पैटर्न देखने से पहले और कितने जीवन जीने हैं?”

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‘मेरा सिनेमा विरोध है, शोक है’
अपनी फिल्मों को एक विरोध बताते हुए विवेक अग्निहोत्री ने आगे लिखा, “मेरा सिनेमा विरोध है। यह शोक है। यह स्मृति है। क्योंकि जब हम अंधेरे का सामना करते हैं, तभी हम इसके खिलाफ आवाज उठा सकते हैं।” विवेक अग्निहोत्री इससे पहले पहलगाम में हुए हमले की निंदा करते हुए इस पर दुख भी जता चुके हैं।

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‘द दिल्ली फाइल्स’ पर काम कर रहे विवेक अग्निहोत्री
वर्कफ्रंट की बात करें तो विवेक अग्निहोत्री इन दिनों अपनी आगामी फिल्म ‘द दिल्ली फाइल्स’ में व्यस्त हैं। ये उनकी फाइल्स फिल्मों की सीरीज की तीसरी फिल्म है। इससे पहले वो ‘द ताशकंद फाइल्स’ और ‘द कश्मीर फाइल्स’ का निर्माण कर चुके हैं।

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