द ग्रेट ओल्डमैन ऑफ इंडियन सिनेमा
कैमरे के सामने एक जज्बाती बुजुर्ग इंसान का किरदार अदा करना हो तो फिर हिंदी सिनेमा में इन दिनों अनुपम खेर से बेहतर कलाकार तलाशना मुश्किल है। उन्हें मैं ‘द ग्रेट ओल्डमैन ऑफ इंडियन सिनेमा’ कहकर बुलाता हूं और ये अतिशयोक्ति कतई नहीं है। ‘राम लखन’ का देवधर शास्त्री आपको याद ही होगा और कौन भूल सकता है भला ‘सारांश’ के बी वी प्रधान को। ‘द सिगनेचर’ के अरविंद ने तो अभी बीते महीने ही लोगों के दिल जीते हैं। 69 साल के हो चुके हैं अनुपम खेर और अपनी नई फिल्म ‘विजय 69’ में वह ये फिर से बताने निकले हैं कि उम्र वाकई में सिर्फ एक संख्या से ज्यादा कुछ नहीं है। आप मन से कितने साल का महूसस करते हो, तन भी आपका वैसा ही हो सकता है। कहने वाले कह सकते हैं कि साउथ सिनेमा के अभिनेता विजय जोसफ उर्फ दलपति विजय की आखिरी फिल्म के अस्थायी नाम ‘दलपति 69’ का फायदा लेने के लिए यशराज फिल्म्स ने अपनी इस नई फिल्म का नाम ‘विजय 69’ रखा लेकिन, नाम में क्या रखा है? जो कुछ रखा है, वह रखा है फिल्म की कहानी और इसके कलाकारों के अभिनय में।
विजय मैथ्यू की जिद की कहानी
तो फिल्म ‘विजय 69’ की कहानी ये है कि उम्र के चौथेपन में पहुंच चुके विजय मैथ्यू को एक दिन सुबह घर न लौटने पर उसके दोस्त और घरवाले मरा मान लेते हैं। उनका मर्सिया पढ़ा जा रहा होता है। और, उनका सबसे करीबी दोस्त भी समझ नहीं पा रहा कि आखिर वह उनके बारे में कहे क्या? ये और बात है कि इस बीच विजय लौट आते हैं। जब वह अपने दोस्त की रफ शीट देखते हैं तो उन्हें भी लगता है कि कुछ तो ऐसा करना चाहिए जिसके बारे में लोग उनके जाने के बाद भी चर्चा करें। तय होता है कि वह ट्रायथलॉन में हिस्सा लेंगे। डेढ़ किमी तैरना, चालीस किमी साइकिल चलाना और दस किमी दौड़ना। चार महीने की प्रैक्टिस और फिर उनका आवेदन खारिज हो जाता है। लेकिन, हार नहीं मानूंगा, रार नहीं ठानूंगा की तर्ज पर विजय रुकते नहीं है। पहले एक पुराना दोस्त और फिर उनको लगातार परेशान करने वाली मौजूदा दोस्त इस प्रतियोगिता में हिस्सा लेने में उनकी मदद करती है।
मनीष शर्मा को नजरिया बदलना जरूरी
फिल्म ‘विजय 69’ के निर्माता मनीष शर्मा हैं। उनका हिंदी सिनेमा में बड़ा सम्मान रहा है। यशराज फिल्म्स के मालिक आदित्य चोपड़ा ने उन्हें ये महत्वपूर्ण काम सौंपा है। शाहरुख खान की फिल्म ‘फैन’ फ्लॉप होने के बाद वह बीते साल ‘टाइगर 3’ में बतौर निर्देशक नजर आए। दोनों फिल्मों के बीच में चार और ‘फैन’ से पहले एक, कुल पांच फिल्में बतौर निर्माता यशराज फिल्म्स के लिए वह पहले ही बना चुके हैं। ‘विजय 69’ बतौर निर्माता उनकी छठी फिल्म है। फिल्म ‘जयेशभाई जोरदार’ अब तक के उनके जीवन का सबसे बड़ा सबक रही है। सबक उनके लिए नए निर्देशक अभय रॉय की फिल्म ‘विजय 69’ भी लेकर आई है। सोचिए कि फिल्म के मुख्य किरदार का नाम अगर विजय मैथ्यू की बजाय विजय सक्सेना या विजय पांडे होता, फिल्म भोपाल, लखनऊ, इटारसी या नासिक जैसे शहर की कहानी कहती और विजय के दोस्त वैसे होते जैसे आमतौर पर बुजुर्गों के होते हैं तो फिल्म का असर क्या ही होता?
ईसाई और पारसी की दोस्ती बड़ी कमजोरी
मनीष शर्मा को अपने आसपास एक नई मंडली जमाने की जरूरत है। ऐसी मंडली जिसमें एक दो युवा तो ऐसे होने ही चाहिए, जो उनकी हर बात पर ‘यस सर’ का नारा न लगाते हों। फिल्म ‘विजय 69’ खराब फिल्म नहीं है। पर, इसकी कहानी में एक बेहतरीन फिल्म बनने के सारे तत्व मौजूद हैं। बस इस फिल्म का नजरिया एक मेट्रो शहर से निकालकर एक कस्बे, गांव, या छोटे शहर का कर देना था। चंकी पांडे को पारसी की बजाय किसी भी दूसरे धर्म का किरदार कर देना था। गुड्डी मारुति को फिल्म की रिलीज से पहले अक्षय कुमार की बजाय अपनी मेहनत पर निशाना साधना था। ओके से गुड के बीच टहलती फिल्म ‘विजय 69’ यशराज फिल्म्स की ‘महाराज’ के बाद दूसरी ‘वाव’ फिल्म हो सकती थी लेकिन सिर्फ अपनी कहानी के कथन से ये फिल्म ऐसा करने से चूक गई। निर्देशक अक्षय रॉय नए हैं। निर्माता मनीष शर्मा पुराने और अनुभवी। जिम्मेदारी सीनियर की ज्यादा बनती है।
कूल डूड बनने के लिए गालियां जरूरी नहीं
रही बात अभिनय की तो फिल्म ‘विजय 69’ पूरी तरह से अनुपम खेर की फिल्म है। उनकी अदाकारी अनुपम है। उनकी संवाद अदायगी अनुपम है और उनके किरदार का नई पीढ़ी से राब्ता जोड़ने के लिए उत्सुक रहने का अंदाज अनुपम है। नेटफ्लिक्स पर फिल्मों में गालियों को ‘बीप’ करने की जरूरत नहीं होती। लेकिन, ओटीटी पर फिल्म आ रही है तो इसमें एक दो गालियां घुसेड़ दी जाएं, ये सोच बहुत घातक है। ऐसी कोशिशें पूरे परिवार के साथ देखी जा रही किसी फिल्म को बीच में ही बंद करने पर भी लोगों को मजबूर कर देती हैं। फिल्म में सहायक कलाकारों के लिए ज्यादा गुंजाइश अनुपम खेर ने छोड़ी नहीं है लेकिन व्रजेश हीरजी, अंद्रिजा सिन्हा और मिहिर आहूजा का काम अच्छा है। चंकी पांडे ने जरूरत से ज्यादा ओवरएक्टिंग है। फिल्म का गीत संगीत पक्ष भी कमजोर रह गया है।
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