फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Vijay 69 Review: बुजुर्ग होते दर्शकों को वाईआरएफ का सिनेमाई सलाम, द ग्रेट ओल्डमैन ऑफ इंडियन सिनेमा रिटर्न्स

विज्ञापन
Vijay 69 Review - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
Movie Review
विजय 69
कलाकार
अनुपम खेर , चंकी पांडे , गुड्डी मारुति , अद्रिजा सिन्हा , परितोष संड , व्रजेश हीरजी और मिहिर आहूजा आदि
लेखक
अक्षय रॉय, अब्बास टायरवाला
निर्देशक
अक्षय रॉय
निर्माता
मनीष शर्मा
ओटीटी:
नेटफ्लिक्स
रिलीज:
8 नवंबर 2024
रेटिंग
3/5

कम लोगों को ही पता होगा कि हमारे देश की आबादी की माध्यिका जो आजादी के समय करीब 19 वर्ष हुआ करती थी वह अगले 25 साल में 38 के करीब होने जा रही है। मतलब ये कि लोगों की औसत आयु बढ़ रही है और देश में उम्रदराज लोगों की संख्या भी धीरे धीरे बढ़ रही है। जानकर आप चौंक सकते हैं कि देश में बुजुर्गों की जो तादाद आज के समय है, उसमें बहुत तेजी से बढ़ोत्तरी हो रही है और आने वाले 25 साल में 65 साल या उससे ऊपर की आबादी की हिस्सेदारी कुल जनसंख्या में करीब 20 फीसदी होने का अनुमान है। लोगों की औसत आयु बढ़ने के साथ साथ बुजुर्गों की संख्या दूसरे देशों में भी बढ़ रही है। और, माना जा रहा है कि इस दर्शक वर्ग को लक्ष्य करके जो सिनेमा अभी से बनना शुरू हो चुका है, उसमें अभी और इजाफा होना है। डिज्नी स्टूडियोज में इस दिशा में काम फिल्म ‘अप’ के समय से चल रहा है और इस एनीमेशन फिल्म के हिंदी संस्करण में बुजुर्ग किरदार को आवाज देने वाले अभिनेता अनुपम खेर ने अपने ‘सारांश’ के दिनों के अनुभवों की इन दिनों री पैकेजिंग शुरू कर दी है।

विज्ञापन

Vijay 69 Review - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
द ग्रेट ओल्डमैन ऑफ इंडियन सिनेमा
कैमरे के सामने एक जज्बाती बुजुर्ग इंसान का किरदार अदा करना हो तो फिर हिंदी सिनेमा में इन दिनों अनुपम खेर से बेहतर कलाकार तलाशना मुश्किल है। उन्हें मैं ‘द ग्रेट ओल्डमैन ऑफ इंडियन सिनेमा’ कहकर बुलाता हूं और ये अतिशयोक्ति कतई नहीं है। ‘राम लखन’ का देवधर शास्त्री आपको याद ही होगा और कौन भूल सकता है भला ‘सारांश’ के बी वी प्रधान को। ‘द सिगनेचर’ के अरविंद ने तो अभी बीते महीने ही लोगों के दिल जीते हैं। 69 साल के हो चुके हैं अनुपम खेर और अपनी नई फिल्म ‘विजय 69’ में वह ये फिर से बताने निकले हैं कि उम्र वाकई में सिर्फ एक संख्या से ज्यादा कुछ नहीं है। आप मन से कितने साल का महूसस करते हो, तन भी आपका वैसा ही हो सकता है। कहने वाले कह सकते हैं कि साउथ सिनेमा के अभिनेता विजय जोसफ उर्फ दलपति विजय की आखिरी फिल्म के अस्थायी नाम ‘दलपति 69’ का फायदा लेने के लिए यशराज फिल्म्स ने अपनी इस नई फिल्म का नाम ‘विजय 69’ रखा लेकिन, नाम में क्या रखा है? जो कुछ रखा है, वह रखा है फिल्म की कहानी और इसके कलाकारों के अभिनय में।

Vijay 69 Review - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
विजय मैथ्यू की जिद की कहानी 
तो फिल्म ‘विजय 69’ की कहानी ये है कि उम्र के चौथेपन में पहुंच चुके विजय मैथ्यू को एक दिन सुबह घर न लौटने पर उसके दोस्त और घरवाले मरा मान लेते हैं। उनका मर्सिया पढ़ा जा रहा होता है। और, उनका सबसे करीबी दोस्त भी समझ नहीं पा रहा कि आखिर वह उनके बारे में कहे क्या? ये और बात है कि इस बीच विजय लौट आते हैं। जब वह अपने दोस्त की रफ शीट देखते हैं तो उन्हें भी लगता है कि कुछ तो ऐसा करना चाहिए जिसके बारे में लोग उनके जाने के बाद भी चर्चा करें। तय होता है कि वह ट्रायथलॉन में हिस्सा लेंगे। डेढ़ किमी तैरना, चालीस किमी साइकिल चलाना और दस किमी दौड़ना। चार महीने की प्रैक्टिस और फिर उनका आवेदन खारिज हो जाता है। लेकिन, हार नहीं मानूंगा, रार नहीं ठानूंगा की तर्ज पर विजय रुकते नहीं है। पहले एक पुराना दोस्त और फिर उनको लगातार परेशान करने वाली मौजूदा दोस्त इस प्रतियोगिता में हिस्सा लेने में उनकी मदद करती है।

Vijay 69 Review - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
मनीष शर्मा को नजरिया बदलना जरूरी
फिल्म ‘विजय 69’ के निर्माता मनीष शर्मा हैं। उनका हिंदी सिनेमा में बड़ा सम्मान रहा है। यशराज फिल्म्स के मालिक आदित्य चोपड़ा ने उन्हें ये महत्वपूर्ण काम सौंपा है। शाहरुख खान की फिल्म ‘फैन’ फ्लॉप होने के बाद वह बीते साल ‘टाइगर 3’ में बतौर निर्देशक नजर आए। दोनों फिल्मों के बीच में चार और ‘फैन’ से पहले एक, कुल पांच फिल्में बतौर निर्माता यशराज फिल्म्स के लिए वह पहले ही बना चुके हैं। ‘विजय 69’ बतौर निर्माता उनकी छठी फिल्म है। फिल्म ‘जयेशभाई जोरदार’ अब तक के उनके जीवन का सबसे बड़ा सबक रही है। सबक उनके लिए नए निर्देशक अभय रॉय की फिल्म ‘विजय 69’ भी लेकर आई है। सोचिए कि फिल्म के मुख्य किरदार का नाम अगर विजय मैथ्यू की बजाय विजय सक्सेना या विजय पांडे होता, फिल्म भोपाल, लखनऊ, इटारसी या नासिक जैसे शहर की कहानी कहती और विजय के दोस्त वैसे होते जैसे आमतौर पर बुजुर्गों के होते हैं तो फिल्म का असर क्या ही होता?

Vijay 69 Review - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
ईसाई और पारसी की दोस्ती बड़ी कमजोरी
मनीष शर्मा को अपने आसपास एक नई मंडली जमाने की जरूरत है। ऐसी मंडली जिसमें एक दो युवा तो ऐसे होने ही चाहिए, जो उनकी हर बात पर ‘यस सर’ का नारा न लगाते हों। फिल्म ‘विजय 69’ खराब फिल्म नहीं है। पर, इसकी कहानी में एक बेहतरीन फिल्म बनने के सारे तत्व मौजूद हैं। बस इस फिल्म का नजरिया एक मेट्रो शहर से निकालकर एक कस्बे, गांव, या छोटे शहर का कर देना था। चंकी पांडे को पारसी की बजाय किसी भी दूसरे धर्म का किरदार कर देना था। गुड्डी मारुति को फिल्म की रिलीज से पहले अक्षय कुमार की बजाय अपनी मेहनत पर निशाना साधना था। ओके से गुड के बीच टहलती फिल्म ‘विजय 69’ यशराज फिल्म्स की ‘महाराज’ के बाद दूसरी ‘वाव’ फिल्म हो सकती थी लेकिन सिर्फ अपनी कहानी के कथन से ये फिल्म ऐसा करने से चूक गई। निर्देशक अक्षय रॉय नए हैं। निर्माता मनीष शर्मा पुराने और अनुभवी। जिम्मेदारी सीनियर की ज्यादा बनती है।
विज्ञापन

Vijay 69 Review - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
कूल डूड बनने के लिए गालियां जरूरी नहीं
रही बात अभिनय की तो फिल्म ‘विजय 69’ पूरी तरह से अनुपम खेर की फिल्म है। उनकी अदाकारी अनुपम है। उनकी संवाद अदायगी अनुपम है और उनके किरदार का नई पीढ़ी से राब्ता जोड़ने के लिए उत्सुक रहने का अंदाज अनुपम है। नेटफ्लिक्स पर फिल्मों में गालियों को ‘बीप’ करने की जरूरत नहीं होती। लेकिन, ओटीटी पर फिल्म आ रही है तो इसमें एक दो गालियां घुसेड़ दी जाएं, ये सोच बहुत घातक है। ऐसी कोशिशें पूरे परिवार के साथ देखी जा रही किसी फिल्म को बीच में ही बंद करने पर भी लोगों को मजबूर कर देती हैं। फिल्म में सहायक कलाकारों के लिए ज्यादा गुंजाइश अनुपम खेर ने छोड़ी नहीं है लेकिन व्रजेश हीरजी, अंद्रिजा सिन्हा और मिहिर आहूजा का काम अच्छा है। चंकी पांडे ने जरूरत से ज्यादा ओवरएक्टिंग है। फिल्म का गीत संगीत पक्ष भी कमजोर रह गया है।

संबंधित वीडियो

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें