कलाकार: आरना शर्मा, आर्यांश मालवीय, एम गांधी, पलाश कांबले, पलामी घोष, पूरब कोहली आदि।
निर्देशक: सुजॉय घोष
ओटीटी: नेटफ्लिक्स
इस साल की सरप्राइज हिट फिल्म बदला बनाने वाले निर्देशक सुजॉय घोष का डिजिटल से दोस्ताना बहुत गाढ़ा रहा है। उनकी शॉर्ट फिल्म अहल्या ने चार साल पहले राधिका आप्टे की असली अदाकारी का दर्शकों से परिचय कराया था। सात साल पहले विद्या बालन को लेकर उन्होंने कहानी बनाई और ये मिथ तोड़ा कि हिंदी सिनेमा में महिला प्रधान फिल्में चलती नहीं हैं। अब वह एक नया ट्रेंड सेट करने की कोशिश में हैं अपनी वेब सीरीज टाइपराइटर से।
वेब सीरीज टाइपराइटर जल्द ही ओटीटी नेटफ्लिक्स पर रिलीज होने वाली है और अपने ट्रेलर से ही ये कहानी दर्शकों को आकर्षित करने में सफल होती दिख रही है। ट्रेलर से समझ आता है कि किस्सा किसी पुरानी हवेली के आसपास गढ़ा गया है। चार बच्चे किसी आत्मा को पकड़ने की कोशिश में हैं। पूरब कोहली के चेहरे से कहानी का रहस्य चमकता है। बाकी किरदार भी इस डरावनी लेकिन खोजी सी दिखती कहानी के अलग अलग सिरे पकड़े ट्रेलर में दिखते हैं।
टेलीविजन पर वास्तविक भुतहा लोकेशन्स पर शूट हुई जी नेटवर्क की पहली सीरीज भूत बंगला के बाद हॉरर कहानियों को कहने में काफी तब्दीली आई है। विशेष फिल्म्स ने भी इसी के बाद रामसे ब्रदर्स की कहानियों का चोला बदलकर इन्हें अपग्रेड किया और राज जैसी कामयाब फिल्म पाई। अब बारी वेब सीरीज की दिखती है। रागिनी एमएमएस से आगे जाकर हॉरर में बहुत कुछ ऐसा किया जाना भारतीय मनोरंजन दुनिया में बाकी है, जो इस कमाऊ जॉनर से भारतीय दर्शकों को मिल सकता है।
नेटफ्लिक्स भी सेक्रेड गेम्स और घूल से आगे जाकर लैला और टाइपराइटर जैसी सीरीज बनाकर दर्शकों को विविधता देने की कोशिश कर रहा है। सुजॉय घोष के निर्देशन की धार टाइपराइटर के ट्रेलर में दिखती है। बड़ों से ज्यादा ट्रेलर में बाल कलाकार प्रभावित करते हैं, जो घोस्टबस्टर बनने की कोशिश में लगे हैं।